Fight for the truth

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25/06/2023

जयगुरूदेव।

थोड़े से सेवक शंकरचार्य के बौद्ध मजहब का हिंदुस्तान से जड़ से नाश कर दिया था, एवम चार पीठ स्थापित कर अपने गुरु का नाम पूरे जगत में कर दिया था। यह ऐसे समय हुआ जब बौद्ध धर्म का दबदबा था। उस वक्त इस मजहब में नाना प्रकार की बुराइयां आ गई थी, मानवता खत्म हो गई थी। और अभी सिर्फ 130 साल पूर्व स्वामी विवेकानंद ने अकेले ही अपने गुरु रामकृष्ण परम हंस का नाम पूरे जगत में कर दिया। यह भी ऐसे समय हुआ, जब ब्रिटिश शासकों और ईसाई मिशनरियों का एक वर्ग भारत की अवमानना और पाश्चात्य संस्कृति की श्रेष्ठता साबित करने में लगा हुआ था।

विवेकानंद तो इकलौते थे, शंकराचार्य के सेवक तो थोड़े थे। वे थोड़े थे, इकलौते थे। और बाबा जयगुरूदेव के अनुयाई.... करोड़ों...! एक करोड़ तो सिर्फ टाट बोरा वाले ही हो गए, और हम जैसे करोड़ों..! हमने क्या किया..? हमने अपने गुरु के लिए क्या किया..? कभी गुरु के प्रति हमने अपनी उपलब्धि पर विचार किया है..? विचार करना.. हमारी उपलब्धि क्या है..? हमारी उपलब्धि है; गुरु महाराज की लगी लगाई बगिया को उजाड़ देना। हमारी उपलब्धि है; संगत को फाड़ फाड़ कर देना। हमारी उपलब्धि है; नफरत के बीज। हमारी उपलब्धि है; पतन। हमारी उपलब्धि है; जगह जगह कुकुरमुत्ते की तरह उगने वाले ढोंगी मठाधीश। हमारी उपलब्धि है; रामपाल, रामरहीम जैसे ढोंगी बाबाओं में विलय। वे थोड़े थे, इसलिए उनकी उपलब्धि थोड़ी थी, हम करोड़ों हैं, इसलिए हमारी उपलब्धि थोड़ी ज्यादा है। यही स्वर्णिम इतिहास लिखा जायेगा; हमारी और तुम्हारी उपलब्धि पर..! कुछ तो शर्म करो प्रेमियों..! क्या यही उपलब्धि ले कर तुम ऊपर जाना चाहोगे..?

याद रखना, अंत समय में न पंकज यादव काम आयेंगे, न ही उमाकांत जी काम आने वाले हैं। न ही रतन लाल जी आपकी जीवात्मा की संभाल कर पाएंगे, न ही आनंद जौहरी जी करने वाले हैं। यह जो उपलब्धियों का पहाड़ खड़ा है, यह इन्हीं मठाधीशों की देन है। इनको तुमसे एक पैसे का नहीं मतलब, इनको सिर्फ तुम्हारे धन से मतलब है। इनको सिर्फ तुम्हारे मान सम्मान से मतलब है। पर दुःख इस बात का है कि हम अब तक उनके इस मतलब को नहीं समझ पाए हैं। इनके इस मतलब को समझने के लिए हमें और आपको मिलकर इन्हें आजमाना होगा। पर दुःख इस बात का भी है कि तुम्हें आजमाना भी नहीं आता।

याद करना , कोरोना काल में रतन लाल जी का एक वीडियो बहुत वायरल हुआ था। वह कहते पाए जाते हैं कि; " कहीं कार्यक्रम तो होते नहीं, और एक एक औरत चार-चार और पांच-पांच बच्चे लेकर आई है। इनको भंडारे में रोटी देना बंद कर दो। जब यहां भोजन नहीं मिलेगा तो खुद घर भगेगी।" जरा आजमाना अपने अपने विचारों से, क्या कोई महात्मा ऐसा कह सकता है..? क्या महात्माओं की ऐसी भी वाणी होती है..? याद करना, उमाकांत जी मथुरा के जिस मंदिर को कंकड़ और पत्थर बता रहे थे, कह रहे थे; मंदिरों में चूहे घूमते हैं, बिल्लियां घूमती हैं गिलहरियों के चक्कर में, कंकड़ और पत्थरों में नहीं मिलता कुछ, अगर मिलता है कुछ तो महापुरुषों के चरणों में। जरा इसे भी आजमाना अपने अपने विचारों से, जब महापुरुषों के चरणों में ही मिलता है सब कुछ, तो ये बाबल हरियाणा में कंकड़ और पत्थरों से क्या निर्मित करने में लगे हैं..? इसे भी याद करना.. वो पंकज जी महाराज जो पवित्र मंदिर के प्रांगण में अश्लीलता के ठुमके लगवाते हैं, यह काम संतो का है क्या..? यह संतमत है या रंगमंच..? सेवादारों को भगा कर, चप्पे चप्पे पर सिक्योरिटी गार्ड का पहरा, आश्रम के रख रखाव में कुव्यवस्था, मंदिर के संगमरमर की जीर्ण हो रही अवस्था, यही रखवाला का काम है क्या..? और एक वो.., जो हो जाने के बाद अपनी ज्योतिषी की गणना करता है, गोदी मीडिया का सहारा लेता है, कभी जगह जगह भव्य मंदिर बनेगा, कह कर पलट जाता है, कभी मथुरा आश्रम पर जल्द ही अपने सत्संग का दावे करने वाला, नाम दान देने का भी वादे करने वाला, वह ज्योतिषी गणनक अपनी ही बातों से बार बार क्यों मुकर जाता है..? जिसकी ज्योतिषी की गणना ऐसी की बीच सत्संग से, किसी अपनों की अप्रिय घटना का संदेश सुन कर, सत्संग अधूरा छोड़ कर जाना पड़ जाए। इसे भी आजमाना अपने अपने विचारों से, कि काहे का संत..? जो अपनों की संभाल नहीं कर पाया, वह तुम्हारी क्या संभाल कर पाएगा..?

प्रेमियों, ज्यादा नहीं तुम सिर्फ एक वर्ष के लिए इन्हें आजमा कर देख लो। तुम इनके कार्यक्रमों में सिर्फ एक वर्ष के लिए जाना छोड़ दो। इन सब का चेहरा उतर जाएगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, फिर तुम जो कहो, मैं मान लूंगा। बस एक वर्ष के लिए ही सही, इस प्रार्थना को मान लो। अगर इतना भी नहीं कर सकते, तो इतना कर देना कि इनकी झोली में सेवा चढ़ाना तुम बंद कर देना। सिर्फ एक वर्ष के लिए। साल के सिर्फ 12 महीने के लिए। यह कोई बड़ी बात तो नहीं है। सत्य और असत्य की पहचान के लिए , नर्कों की मार से बचने के लिए, क्या तुम एक वर्ष भी नहीं दे सकते..? देखना एक वर्ष बाद.., यह आजमाइश तुम्हारी इनके प्रति आस्था को 180 डिग्री टर्न न कर दे, तो फिर कहना..!

सादर जयगुरूदेव🙏

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