Indian Himalayan Excursions
10/10/2023
One of the first spells of season at beas kund area. White magic has began.
28/08/2022
कुलूत मुद्रा, भाग 1
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कुलूत शासकों के नाम से अभी तक कुल बारह सिक्के मिले हैं।
सबसे पहला सिक्का एलेग्ज़ेण्डर कनिंघम* को 1870 के दशक में उत्तरी-पंजाब (सम्भवतः पठानकोट) से मिला था। इस ताम्र सिक्के पर एक ओर ब्राह्मी लिपि में “राज्ञ कुलूतस्य वीरयशस्य” और दूसरी तरफ खरोष्ठी लिपि में “राञा” लिखा है। वीरयश का यह सिक्का अब ब्रिटिश म्यूज़ियम में है।
बाकी के ग्यारह सिक्के जॉन मार्शल** को सिरकप (तक्षशिला) की खुदाई के दौरान (1912-1930) मिले थे। इन सिक्कों का आकार चौरस है और सभी तांबे के हैं। इन पर भी एक तरफ ब्राह्मी और दूसरी तरफ खरोष्ठी में लिखा हुआ है। हालाँकि ब्रिटिश म्यूजियम वाले सिक्के के विपरीत (जिसपर खरोष्ठी में केवल "राञा" लिखा है) इन पर खरोष्ठी में भी पूरे लेख हैं। तक्षशिला में मिले ये कुलूत सिक्के अब कहाँ हैं, ये मैं पता नहीं लगा पाया।
बहरहाल, इन सिक्कों से विजयमित्र, वीरयश, सत्यमित्र, और आर्यमित्र नामक चार कुलूत शासकों का पता चलता है। इनमें विजयमित्र के सिक्के पर एक ओर ब्राह्मी लिपि में “राज्ञ कुलूतस्य विजयमित्रस्य” और दूसरी तरफ खरोष्ठी लिपि में “राञा कुलूतस विजयमितस” लिखा है।
सभी बारह कुलूत सिक्कों को उनपर लिखी लिपि और उसके उपयोग के आधार पर पहली शती ईसवी का माना गया है। तक्षशिला वाले सिक्के ब्रिटिश म्यूज़ियम वाले से थोड़े पुराने माने गए हैं।
ध्यान देने योग्य बात है कि सभी सिक्के वर्तमान कुलूत (कुल्लू) की सीमा से बाहर ही मिले हैं।...
(जारी)
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* अलेक्जेंडर कनिंघम ने ही 1861 में ‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण’ की स्थापना की थी और इसके प्रथम महानिदेशक रहे (1871-1885)।
** जॉन मार्शल ‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण’ के तीसरे महानिदेशक थे (1902-1928)।
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