Badlav
13/06/2026
बदलाव टीम ने हाल ही में दिल्ली और हरियाणा में एक एक्सपोज़र विज़िट किया। इस दौरान टीम को दिल्ली स्थित I Am Wellbeing, Manzil Mystics, Dance Out of Poverty , GOONJ, Salaam Baalak Trust तथा हरियाणा के रेवाड़ी में SRI (Self Reliant India) के कार्यों को निकटता से समझने और उनसे सीखने का अवसर मिला।
इस यात्रा ने बच्चों के मनोसामाजिक विकास, पुनर्वास, शिक्षा तथा वंचित, सड़क से जुड़े और भीख माँगने की स्थिति में संलग्न बच्चों के लिए सामुदायिक-आधारित हस्तक्षेपों को समझने के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किए।
यात्रा के दौरान I Am Wellbeing के साथ संवाद के माध्यम से संवेदनशील परिस्थितियों में रह रहे बच्चों के लिए मनोवैज्ञानिक सहयोग एवं कला-आधारित हस्तक्षेपों के महत्व को समझा। Manzil Mystics Foundation से यह जानने का अवसर मिला कि संगीत किस प्रकार शिक्षा, आत्मविश्वास निर्माण और कौशल विकास का प्रभावी माध्यम बन सकता है, वहीं Dance Out Of Poverty ने नृत्य को आत्म-अभिव्यक्ति, सहभागिता और सामाजिक समावेशन के एक सशक्त उपकरण के रूप में प्रस्तुत किया।
Goonj Processing Centre के भ्रमण के दौरान संसाधनों के वर्गीकरण, पुनः उपयोग (Reuse) और Green by Goonj जैसी सतत विकास पहलों को समझा। Salaam Baalak Trust के डे-केयर सेंटर एवं आवासीय गृहों के दौरे ने सड़क से जुड़े बच्चों के लिए बाल संरक्षण प्रणालियों, आवासीय देखभाल मॉडल, पुनर्स्थापन प्रक्रियाओं तथा कानूनी अनुपालनों की बेहतर समझ विकसित की। वहीं रेवाड़ी में Self Reliant India के कार्यों को देखकर यह जाना कि किस प्रकार सरकरी स्कूल मे पढ़ रहे बच्चों को जवाहर नवोदय विद्यालय जैसे गुणवत्तापूर्ण आवासीय विद्यालयों में प्रवेश के लिए तैयार किया जाता है।
इस एक्सपोज़र विज़िट ने हमें यह महसूस कराया कि आपसी सीख, सहयोग और नवाचारी सामुदायिक दृष्टिकोण ही बच्चों के लिए सार्थक अवसरों का निर्माण करने और सामाजिक प्रभाव को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
15/05/2026
आज में मिलिए रोहित (बदला हुआ नाम) से। 35 वर्षीय रोहित, लखनऊ के बख्शी का तालाब क्षेत्र के निवासी हैं। बचपन से ही एक जेनेटिक बीमारी के कारण उनके पैरों में विकलांगता रही, जो समय के साथ और गंभीर होती गई। लगातार घाव और चलने-फिरने में कठिनाई ने उनके जीवन को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया।
माँ के निधन और पिता के पुनर्विवाह के बाद उन्हें परिवार से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उपेक्षा और पारिवारिक तनाव के कारण उन्हें घर छोड़ना पड़ा।
नाई का काम सीखने के कारण उन्होंने खुद का छोटा काम शुरू किया और धीरे-धीरे जीवन संभलने लगा। लेकिन बढ़ती शारीरिक समस्याओं और पैरों के घावों के कारण उन्हें अपना काम बंद करना पड़ा। इलाज और रोज़मर्रा की जरूरतों के लिए मजबूरी में उन्हें भीख मांगनी पड़ी।
उन्होंने हार नहीं मानी। फुटपाथ पर छोटी दुकान शुरू करने की कोशिश की, लेकिन तबीयत और बिगड़ती गई। बिना किसी पारिवारिक सहारे के उनका जीवन संघर्षों से भर गया।
इसी दौरान उन्हें बदलाव के बारे में पता चला और वे पुनर्वास केंद्र पहुँचे। यहाँ उन्हें चिकित्सीय सहायता, काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहयोग मिला। समूह सत्रों और मार्गदर्शन ने उनके अंदर फिर से उम्मीद जगाई।
उनकी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्हें छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया। आज रोहित अपनी ट्राइसाइकिल के सहारे पान, मसाला और छोटे सामान बेचकर आजीविका चला रहे हैं। इसके साथ ही वे पुनर्वास केंद्र में अन्य लोगों के बाल काटने में भी सहयोग करते हैं।
आज उनका जीवन पहले से कहीं अधिक स्थिर और सकारात्मक है। आत्मनिर्भरता और लोगों से जुड़ाव ने उनके भीतर आत्मविश्वास फिर से जगा दिया है।
रोहित कहते हैं—
“अगर शरीर साथ दे और काम का सहारा मिल जाए, तो हम भी अच्छा जीवन जी सकते हैं।”
उनकी कहानी यह दिखाती है कि सही सहयोग, अवसर और हौसले के साथ कोई भी व्यक्ति कठिन परिस्थितियों से निकलकर सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ सकता है
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