Lava pathak
27/04/2026
शाम में बनकर आ गई है चिड़ियों के लिए आश्रयस्थल।
हमारे जीवन में हर जीव के प्रति दयालुता होनी चाहिए। बेजुबान के प्रति तो विशेष। लोग एक दूसरे के प्रति स्वार्थी हो रहे है लेकिन कुछ लोग अब दयालु होते जा रहे हैं।
आप लोग तो टिन से बनी वस्तु देख रहे हैं, उसके बनाने की कोई मेहनताना नही लिए कारीगर ने। कारीगर को घर मे रखी पुरानी एक टिन देने पर जब उसने जाना कि बेजुबान पक्षियों के लिए आश्रयस्थली बनेगी, तो उसने बनाने की मेहनताना लेने से साफ इनकार कर दिया।
यही नहीं उसने बोला कि "दो तीन टिन और लिए, और बना देंगे, बिल्कुल मुफ्त। जब आप हर रोज इसे अपने बगीचे में टांग कर दाना और पानी डाल सकते हैं तो हम मुफ्त में क्यूँ न बनाएं। थोड़ी पुण्य मुझे भी मिल जाये।"
सोचिये, एक अनपढ़ कारीगर में भी दयालुता पैदा हो रही है। आप जब अच्छे कार्य करने को प्रयास शुरू करेंगे तो आपके साथ कुछ लोग जरूर आकर आपका हाथ बटाने को तैयार मिलेंगे। विश्वास रखिये। निराश मत हो। मानवता आज भी जिंदा है। कुछ लोग में ही सही, जिंदा है। तभी तो एक कहावत भी है;
सौ में अस्सी बेईमान,
फिर भी मेरा देश महान
20/04/2026
जो सवाल नहीं उठाते वह पाखंडी हैं,
जो सवाल नहीं करते वो मूर्ख हैं,
लेकिन जहन में ही सवाल नहीं उठता वो गुलाम हैं।
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