Kamesh
10/02/2026
दिलों में तुम अपनी बेताबियाँ लेके चल रहे हो।
तो ज़िंदा हो तुम!
नज़र में ख्वाबों की बिजलियां लेके चल रहे हो
तो जिंदा हो तुम!
हवा के झोंकों के जैसे आज़ाद रहना सीखो
तुम एक दरिया के जैसे, लहरों में बहना सीखो
हर एक लम्हे से तुम मिलो खोले अपनी बाहें
हर एक पल एक नया समा देखिये
जो अपनी आंखों में हैरानियां लेके चल रहे हो
तो जिंदा हो तुम!
दिलों में तुम अपनी बेताबियाँ लेके चल रहे हो
तो जिंदा हो तुम!
लेखक~जावेद अख्तर (फरहान अख्तर की आवाज)
🏔️
05/02/2026
हजारों ख्वाहिशें ऐसी के हर ख्वाहिश पे दम निकले,
बहुत निकले मेरे अरमान, लेकिन फिर भी कम निकले
निकलना खुल से आदम का सुनते आये थे लेकिन,
बहुत बे-आबरू हो कर तेरे कूचे से हम निकले
मगर लिखवाये कोई उसको खाथ, तो हमसे लिखवाये
हुई सुबह, और घर से कान पर रख कर कलम निकले
खुदा के वास्ते पर्दा न काबे का उठा
वैसा कहीं ऐसा न हो या भी वही काफिर सनम निकले
मुहब्बत में नहीं है फर्क जीने और मरने का,
उसी को देख कर जीते हैं, जिस काफिर पे दम निकले
कहाँ मैखाने का दरवाज़ा ग़ालिब, और कहाँ वाइज?
पर इतना जानते हैं कल वो जाता था के हम निकले
~मिर्ज़ा ग़ालिब
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