Asheesh Kumar Singh
मेरा खड़ा हुआ एक सिपाही भी अगर अपमानित हुआ… तो ठीक नहीं होगा!”मेरठ कलेक्ट्रेट में किसान संगठनों का धरना।
दारोगा जी से बदतमीजी। लेकिन 2013 बैच के PPS अधिकारी अभिषेक तिवारी (डिप्टी एसपी) ने तुरंत पारा चढ़ाया और बिना किसी लिहाज के किसानों को उनकी औकात याद दिला दी! ये कोई साधारण वार्निंग नहीं थी…
ये था पुलिस के सम्मान का एलान! जब अधिकारी अपने जवान की इज्जत के लिए खड़ा होता है, तब पता चलता है असली अफसर कौन होता है। अभिषेक तिवारी सर… सैल्यूट
28/02/2026
नाव का हास्यास्पद संकट: किसे फेंकें पानी में?
दोस्तों, आजकल सोशल मीडिया पर एक मीम वायरल हो रहा है, जो हंसाते-हंसाते सोचने पर मजबूर कर देता है। पोस्ट है: एक छोटी नाव में पांच प्रोफेशनल्स बैठे हैं - डॉक्टर, इंजीनियर, पुलिस ऑफिसर, आर्मी ऑफिसर और पत्रकार। नाव सिर्फ चार को ले जा सकती है, तो एक को बाहर फेंकना है। सवाल है - किसे? और क्यों?यह मीम असल जिंदगी की कड़वी सच्चाई पर चोट करता है। replies में ज्यादातर लोग चिल्ला रहे हैं: "पत्रकार को फेंको!" क्यों? क्योंकि आजकल कुछ पत्रकार सच दिखाने की बजाय 'गॉड मीडिया' बन चुके हैं - सरकार की गोद में बैठकर झूठ परोसते हैं। कोई कहता है, "इनके जिंदा रहने से क्या फायदा?" हा-हा, लेकिन सोचिए, बिना डॉक्टर के बीमारी, बिना इंजीनियर के पुल, बिना पुलिस के कानून, बिना आर्मी के सुरक्षा - सब जरूरी। लेकिन पत्रकार? अगर वो ईमानदार न हों, तो सच में 'अनावश्यक वजन'!फिर भी, यह मीम हमें हंसाता है क्योंकि यह समाज की हिपोक्रिसी दिखाता है। क्या हम वाकई पत्रकारों को दोषी ठहरा रहे हैं, या सिस्टम को? आप बताइए: आपकी नाव में कौन extra है? डॉक्टर को फेंकेंगे क्योंकि महंगे बिल? या इंजीनियर को क्योंकि पुल गिरते हैं? कमेंट में जवाब दें - किसे फेंकना चाहिए और क्यों? क्या यह मीम सिर्फ मजाक है या गहरी सच्चाई? #नावमीम #हास्यसत्य #पत्रकारफेंको #सोशलमीडियावायरल #समाजीचोट #किसेफेंकें #डॉक्टरइंजीनियरपुलिसआर्मी #मीडिया सच्चाई #हिंदीमीम्स #वायरलपोस्ट
23/02/2026
*बंगाल चुनाव में BJP का सांस्कृतिक मोड़: 'जय श्री राम' छोड़ 'जय मां काली' का उद्घोष, मोदी की नई रणनीति*
*मोदी का भावुक संदेश: 'जय मां काली' से शुरू होकर TMC पर प्रहार, बंगाल में बदलाव की पुकार*
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी चुनावी रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के मतदाताओं को एक भावुक खुला पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने पारंपरिक 'जय श्री राम' नारे को पीछे छोड़ते हुए 'जय मां काली' और 'जय मां दुर्गा' जैसे स्थानीय सांस्कृतिक प्रतीकों को प्रमुखता दी है।
यह कदम BJP की उस कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें पार्टी बंगाल की गहरी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ना चाहती है, जहां मां काली और दुर्गा की पूजा स्थानीय जीवन का अभिन्न हिस्सा है। पत्र में मोदी ने राज्य की तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि TMC के शासन में बंगाल का विकास रुका हुआ है, घुसपैठ की समस्या बढ़ी है और महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है।
प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बंगाल के लोगों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है, और राज्य को एक नई दिशा की जरूरत है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि उनका वोट बंगाल के भविष्य को तय करेगा, और BJP ही वह बदलाव ला सकती है जो राज्य को समृद्धि की ओर ले जाए। यह स्लोगन परिवर्तन BJP की पुरानी रणनीतियों से अलग है। पहले के चुनावों में, खासकर 2019 और 2021 में, पार्टी ने 'जय श्री राम' को अपना मुख्य हथियार बनाया था, जो उत्तर भारत में लोकप्रिय था लेकिन बंगाल में TMC द्वारा 'बाहरी' करार दिया जाता रहा।
TMC ने इस बदलाव पर तंज कसा है, कहते हुए कि 'राम की टीआरपी गिर गई है', और BJP अब स्थानीय देवी-देवताओं का सहारा ले रही है।
वहीं, BJP नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पार्टी बंगाल में 'जय महा काली' और 'जय श्री राम' दोनों को साथ लेकर चलेगी, ताकि स्थानीय भावनाओं का सम्मान हो।
पिछले कुछ वर्षों में BJP ने बंगाल में अपनी छवि को 'बंगाली अस्मिता' से जोड़ने की कोशिश की है। 2025 में दुर्गापुर रैली में मोदी ने 'जय मां काली' से भाषण शुरू किया था, और अब 2026 चुनाव से पहले यह रणनीति और मजबूत हो रही है।
पार्टी का मानना है कि इससे वह TMC के 'बाहरी' आरोपों का जवाब दे सकेगी और बंगाल के हिंदू मतदाताओं से बेहतर जुड़ सकेगी, जहां दुर्गा पूजा और काली पूजा जैसे त्योहार जीवन का केंद्र हैं।
हालांकि, विपक्षी नेता अभिषेक बनर्जी ने इसे BJP की हताशा बताया है, कहते हुए कि केंद्र ने बंगाल के फंड रोके हैं और लोग चुनाव में जवाब देंगे।
कुल मिलाकर, यह बदलाव BJP की चुनावी रणनीति में एक सांस्कृतिक अनुकूलन का संकेत है, जो बंगाल की अनोखी पहचान को अपनाने की दिशा में है। चुनाव नजदीक आते ही यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह शिफ्ट मतदाताओं को प्रभावित कर पाएगी।
16/02/2026
*नफरत के बीच भाईचारे की मिसाल बना 'मोहम्मद दीपक'* भारत एक ऐसा देश है जहां सदियों से विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं का सुंदर संगम रहा है। लेकिन पिछले कुछ दशकों में सांप्रदायिक ताकतों ने नफरत की आग को इतना भड़काया है कि हिंदू-मुस्लिम सद्भाव लगभग खतरे में पड़ गया है। मुसलमानों के खिलाफ घृणा का माहौल इतना गहरा गया है कि वे समाज से अलग-थलग होकर अलग मोहल्लों में रहने को मजबूर हो रहे हैं। लव जिहाद, लैंड जिहाद जैसे शब्द रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन गए हैं। नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक नफरत फैलाने में जुटे हैं, जिससे समाज तेजी से बंट रहा है।इस निराशाजनक माहौल में असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा के बयान तो जैसे नफरत की पराकाष्ठा हैं। उन्होंने बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों (मियां) को निशाना बनाते हुए कहा कि लाखों नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे, उन्हें वोट नहीं देने दिया जाएगा और असम में रहना उनके लिए कष्टप्रद बना दिया जाएगा। यहां तक कि एक वीडियो में वे निशाना साधते दिखे, जो बाद में डिलीट कर दिया गया। मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने उनके खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल की, तो जवाब में सरमा ने उन्हें जेल भेजने की धमकी दे डाली।ऐसे में सवाल उठता है कि वह भारत कहां गया जहां सद्भाव और एकता की मिसालें आम थीं? जहां खान-पान, त्योहार और संस्कृति में हिंदू-मुस्लिम का खूबसूरत मेल था?लेकिन इसी अंधेरे में एक उम्मीद की किरण जगमगाई उत्तराखंड के कोटद्वार से। गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) के आसपास बजरंग दल के कार्यकर्ता एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद की दुकान पर पहुंचे। दुकान का नाम था "बाबा स्कूल ड्रेस" – पिछले 30 साल से चल रही। उनका कहना था कि "बाबा" शब्द हिंदू है, मुस्लिम इसे इस्तेमाल नहीं कर सकता। वे दुकानदार को धमकाने लगे।तभी वहां मौजूद स्थानीय युवक दीपक कुमार ने बीच में आकर विरोध किया। बजरंग दल के लोगों ने गुस्से में उनसे नाम पूछा। दीपक ने शांत लेकिन दृढ़ स्वर में जवाब दिया – "मुहम्मद दीपक"।यह पल सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और दीपक रातोंरात भाईचारे के प्रतीक बन गए। पुलिस ने मौके पर कुछ नहीं किया, बल्कि बाद में दीपक और उनके दोस्त के खिलाफ FIR दर्ज कर ली। बजरंग दल वालों के खिलाफ दर्ज FIR में आरोपी अज्ञात बताए गए।कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दीपक की तारीफ करते हुए कहा कि वे नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान चला रहे हैं। दीपक ने खुद बताया कि उस पल उनकी जुबान पर सरस्वती विराजमान थीं, इसलिए "मोहम्मद दीपक" नाम निकल गया। वे सोच रहे थे कि हिंदू नाम बताने से माहौल शांत हो जाएगा, लेकिन उलटा हुआ।यह घटना बताती है कि नफरत के इस दौर में भी इंसानियत जिंदा है। दीपक जैसे लोग ही असली भारत के रखवाले हैं – जहां संविधान और भाईचारा सबसे ऊपर है। उम्मीद है ऐसे लोग बढ़ेंगे और नफरत की दीवारें ढहेंगी। #भाईचारा #हिंदूमुस्लिमएकता #कोटद्वारघटना #नफरतकेखिलाफमोहब्बत #इंसानियतकीजीत #दीपककुमार #सांप्रदायिकसद्भाव #भारतीयसंविधान #उत्तराखंड #बजरंगदल #राहुलगांधी #हर्षमंदर #सांप्रदायिकता #भाईचारेकीमिसाल #वायरलवीडियो
21/12/2025
*कॉर्पोरेट ट्रस्टों की बरसात: बीजेपी की झोली में 3100 करोड़, विपक्ष को सिर्फ टुकड़े!*
*बॉन्ड खत्म, ट्रस्ट की बाढ़: राजनीतिक चंदे में बीजेपी की धमाकेदार जीत!*
इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद भी राजनीतिक दलों को कॉर्पोरेट ट्रस्टों से भारी-भरकम चंदा मिलना जारी है। इस बार कुल 3811 करोड़ रुपये का चंदा विभिन्न पार्टियों को बांटा गया, जिसमें से अधिकांश हिस्सा सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खाते में गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी को इन ट्रस्टों से करीब 3112 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जो कुल राशि का लगभग 82 प्रतिशत है। वहीं, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को मात्र 299 करोड़ रुपये मिले, जो 8 प्रतिशत के आसपास है। बाकी पार्टियों को संयुक्त रूप से 400 करोड़ रुपये से कुछ अधिक मिला।यह आंकड़े चुनाव आयोग को सौंपी गई रिपोर्टों से सामने आए हैं, जहां 19 पंजीकृत इलेक्टोरल ट्रस्टों में से 13 ने अपनी रिपोर्ट जमा की। इनमें से नौ ट्रस्टों ने सक्रिय रूप से चंदा वितरित किया, जबकि चार ट्रस्टों ने कोई योगदान नहीं दिया। पिछले वित्तीय वर्ष 2023-2024 की तुलना में इस साल चंदे की राशि में तीन गुना से अधिक की वृद्धि हुई है, जो 1218 करोड़ से बढ़कर 3811 करोड़ तक पहुंच गई। यह 200 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्शाती है।ट्रस्टों में प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट सबसे बड़ा दानदाता रहा, जिसने कुल 2668 करोड़ रुपये वितरित किए। इसमें से 2180 करोड़ रुपये बीजेपी को दिए गए, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 21 करोड़ मिले। इस ट्रस्ट को जिंदल स्टील, मेघा इंजीनियरिंग, भारती एयरटेल, ऑरोबिंदो फार्मा और टॉरेंट फार्मास्यूटिकल्स जैसी बड़ी कंपनियों से फंडिंग मिली। प्रूडेंट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी (आप) और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) को भी कुछ राशि दी, लेकिन मुख्य फोकस बीजेपी पर रहा।दूसरा प्रमुख ट्रस्ट प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 917 करोड़ रुपये इकट्ठा कर 915 करोड़ बांटे, जिसमें से 757 करोड़ बीजेपी और 77 करोड़ कांग्रेस को गए। इस ट्रस्ट की मुख्य फंडिंग टाटा ग्रुप की कंपनियों से आई। न्यू डेमोक्रेटिक इलेक्टोरल ट्रस्ट ने महिंद्रा ग्रुप की कंपनियों से 160 करोड़ प्राप्त कर 150 करोड़ बीजेपी को सौंपे। ट्रायंफ इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 25 करोड़ में से 21 करोड़ बीजेपी को दिए, जिसका मुख्य दानदाता सीजी पावर था। हार्मनी इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 35 करोड़ में से 30 करोड़ बीजेपी को प्रदान किए, जिसमें भारत फोर्ज और कल्याणी स्टील की भूमिका प्रमुख रही। जनकल्याण ट्रस्ट ने 19 लाख रुपये बांटे, जो आधे-आधे बीजेपी और कांग्रेस को मिले। जनप्रगति इलेक्टोरल ट्रस्ट ने केईसी इंटरनेशनल से मिले 1 करोड़ को शिवसेना (यूबीटी) को दिया, जबकि समाज इलेक्टोरल ट्रस्ट एसोसिएशन ने 6 करोड़ में से 3 करोड़ बीजेपी को सौंपे।यह सब तब हो रहा है जब 2018 में शुरू हुई इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक घोषित कर दिया था। बॉन्ड स्कीम में दानदाताओं की पहचान छिपी रहती थी, जिस पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया गया। अब ट्रस्टों के माध्यम से चंदा देने का तरीका अपनाया जा रहा है, जो अपेक्षाकृत अधिक पारदर्शी माना जाता है, क्योंकि ट्रस्टों को दानदाताओं के नाम उजागर करने पड़ते हैं। हालांकि, ट्रस्ट से पार्टियों तक पहुंचने वाले फंड में दानदाता और प्राप्तकर्ता के बीच सीधा संबंध स्पष्ट नहीं होता।पिछले साल बीजेपी को कुल 3967 करोड़ का चंदा मिला था, जिसमें 1685 करोड़ बॉन्ड से आए थे। अब बॉन्ड खत्म होने के बाद ट्रस्टों से चंदा बढ़ने से साफ है कि कॉर्पोरेट जगत की राजनीतिक फंडिंग में भूमिका और मजबूत हो रही है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ी है, लेकिन कई लोग अभी भी पूर्ण जानकारी की कमी पर सवाल उठा रहे हैं। यह रिपोर्ट राजनीतिक फंडिंग के बदलते परिदृश्य को उजागर करती है, जहां बीजेपी की वित्तीय ताकत अन्य दलों से कहीं आगे नजर आती है।
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Contact the public figure
Telephone
Website
Address
Lucknow
226010