Dr. Nitish Kumar
05/08/2024
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Treatmet for All types of acute and chronic diseases .
मियाज्म की मनोदशा
गुस्सा -
सोरा का गुस्सा साधारण नाराजगी के रूप में प्रकट होता है। सायकोसिस में गुस्से के साथ अन्य अभिव्यक्ति भी जुड़ जाती है। जैसे चीखना, टेबल पर मुट्ठी से प्रहार करना । सिफलिस में क्रोधोन्माद की स्थिति आ जाती है।
सोरा में भय की स्थिति चिंता के रूप में प्रकट होती है। सायकोसिस में व्यक्ति के हाव-भाव में भयं प्रकट होता है और सिफलिस में भय की तीव्र अवस्था प्रकट होती है।
भुल्लकड़पन -
सोरा में भूलने की आदत सामान्य व क्षणिक होती है, जबकि सायकोसिस में व्यक्ति ताजी घटनाओं, कुछ विशिष्ट शब्दों तथा वाक्यों को यकायक भूल जाता है।
दुख -
सोरा में दुख या व्यथा की अवस्था सामान्य अवसाद की होती है। सायकोसिस में संक्षिप्त हो जाती है पर सिफलिस में यह आत्मघात की अवस्था तक पहुंच जाती है। व्यक्ति
हमेशा कुढ़ता रहता है।
अन्य अवस्था -
• सोरिक पेशेंट हमेशा शिकायत करता रहता है। सायकोटिक कराहता रहता है और सिफलिटिक विलाप करने लगता है।
• सोरिक में अल्प बुद्धि की अवस्था होती है, सायकोटिक में मूढ़ता आ जाती है तो सिफलिटिक में व्यक्ति जड़
बुद्धि हो जाता है। अधीरता की अवस्था सोरिक में है, हड़बड़ी या उतावलापन सायकोटिक को बताता है और हताशा सिफलिटिक को।
सोरिक अपशब्द कहने लगता है। सायकोटिक अवज्ञा करता है तो सिफलिटिक में तिरस्कार की भावना आ जाती है।
• सोरा विचारमग्न रहता है, सायकोसिस में जड़ता आ जाती है और सिफलिटिक में हर्षोन्माद की अवस्था रहती.
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