Jadeed Markaz

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18/01/2016

कहां गया मोदी का 56 इंच का सीना
पिछले साल गुरदासपुर और अब पठानकोट एयर फोर्स बेस। पाकिस्तानी दहशतगर्द भारी भरकम हथियार लेकर हमारे मुल्क में दाखिल होते हैं, दस बारह किलोमीटर तक घूमते हुए अपने निशाने तक पहुंच जाते हैं हमला करते हैं और नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार यह कहकर अपना पीछा छुड़ाने की कोशिशें करते दिखते हैं कि पाकिस्तानी दहशतगर्द गरोह साजिश करके हमारे मुल्क पर हमले करा रहे हैं। मोदी सरकार की हालत यह है कि पहली जनवरी की रात में दहशतगर्दों ने पठानकोट एयरफोर्स बेस पर हमला किया, दो जनवरी को वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी, डिफेंस मिनिस्टर मनोहर पारिकर, होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह और फाइनेंस मिनिस्टर अरूण जेटली सभी ने अपनी सरकार की पीठ थपथपाते हुए ट्वीट कर दिया कि सिक्योरिटी फोर्सेज के हमारे बहादुर जवानों ने सभी पांचों दहशतगर्दों को मार गिराया और यह आप्रेशन कामयाबी के साथ मुकम्मल हो गया। यह पैगाम अभी पूरे मुल्क में ठीक से पहुंचा भी नहीं था तीन जनवरी को पठानकोट एयरफोर्स बेस में फिर से गोलियां चलने लगीं पता चला कि दो दहशतगर्द तो बेस में छुपे ही रह गए थे। इससे ज्यादा शर्मनाक सूरते हाल और क्या हो सकती है कि पूरे एयरफोर्स बेस की छानबीन किए बगैर ही वजीर-ए-आजम समेत सभी सीनियर वजीरों ने बयान जारी करा दिए।
हम बात कर रहे हैं वजीर-ए-आजम बनने से पहले नरेन्द्र मोदी के जरिए की गई लफ्फाजियों की। 6 फरवरी 2013 को एक टीवी प्रोग्राम में अपने 56 इंच के सीने को दिखाते हुए कहा था कि पाकिस्तान को उसी की जुबान (भाषा) मंे जवाब देने की जरूरत है। उन्होंने मनमोहन सिंह सरकार का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि पाकिस्तान को लवलेटर लिखना बंद करो और पाकिस्तान को उसी जबान में जवाब दो जो जुबान वह समझता है। मोदी ने बड़े ही ड्रामाई अंदाज में कहा था कि पाकिस्तान हम पर हमला करता है और हम भागकर अमरीका जाते हैं ओबामा के सामने रोते हुए कहते हैं कि हमंे पाकिस्तान से बचाओ। मोदी ने कहा था कि अगर वह मुल्क के वजीर-ए-आजम होते तो मुंबई पर 26 नवम्बर का हमला ही न हो पाता और होता तो वह वैसी ही कार्रवाई करते जो हमने गुजरात में किया है। गुजरात में पाकिस्तानी दहशतगर्दों का तो कोई हमला हुआ नहीं था। वहां तो मोदी, उनकी सरकार, उनकी पार्टी बीजेपी इन सब को पैदा करने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और उसकी बनाई हुई बजरंग दल व विश्व हिंदूू परिषद जैसी दहशतगर्द तंजीमों ने गरीब निहत्थे मुसलमानों पर जुल्म की तमाम हदें पार कर दी थीं। मोदी अभी तक उन जालिमाना कार्रवाइयों पर फख्र करते हैं। अब नरेन्द्र मोदी खुद ही मुल्क के वजीर-ए-आजम हैं पाकिस्तान सरहद पर रोजाना ही सीज फायर की खिलाफवर्जी करता रहता है। पहले गुरदासपुर फिर जम्मू और अब पठानकोट, पाकिस्तानी दहशतगर्द और फौज बराबर हमारे मुल्क पर हमले करते जा रहे हैं और पाकिस्तान की जुबान में जवाब देने जैसी बातें करने वाले नरेन्द्र मोदी पाकिस्तानी वजीर-ए-आजम नवाज शरीफ के साथ गुपचुप बातें करते फिर रहे हैं। हर तरफ एक ही सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर अब नरेन्द्र मोदी का छप्पन इंच का सीना अचानक किसी डरपोक चूहे जैसा क्यों हो गया है। अब मोदी पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने से भाग क्यों रहे हैं अब वह सख्त जवाब देने के बजाए नवाज शरीफ को मुबारकबाद देने और उनकी वालिदा के पैर छूने के लिए लाहौर में क्यों उतर गए? क्या वजीर-ए-आजम बनने के बाद नरेन्द्र मोदी बुजदिल हो गए हैं या 2013 मे वह महज वोट हासिल करने की गरज से आम हिन्दुओं को भड़काने के लिए मनमोहन सरकार पर पाकिस्तान के बहाने हमले कर रहे थे। उस वक्त तो वह बहुत अकड़ते फिर रहे थे अब आखिर मोदी की क्या मजबूरी है कि वह पाकिस्तान के साथ उसी जुबान मंे बात करने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं जिस जुबान का जिक्र वह खुद किया करते थे। जब तक भारतीय जनता पार्टी अपोजीशन मंे थी उस वक्त तो मोदी भी बड़े बहादुर हुआ करते थे, आरएसएस लीडरान कहते फिरते थे कि अगर अमरीका पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मार सकता है तो हिन्दुस्तान ऐसा क्यों नहीं कर सकता। सुषमा स्वराज कहती थीं कि पाकिस्तानी फौजियांे ने हमारे एक जवान का सर काटा है हम दस पाकिस्तानियों के सर काट कर लाएंगे। तो राजनाथ सिंह कहते थे कि मोदी में इतना दम है कि वह कराची से दाऊद इब्राहीम को बकरे की तरह गर्दन पकड़ कर ला सकते हैं। मोदी लाहौर जाकर नवाज शरीफ को उनके जन्म् दिन की मुबारकबाद देते और उनकी वालिदा के पैर छूते दिखते हैं। सुषमा स्वराज पाकिस्तान के साथ कम्पोजिट डायलाग की वकालत कर रही हैं और राजनाथ सिंह तमाशा देख रहे हैं। उधर पाकिस्तान और उसके दहशतगर्द किसी भी कीमत पर अपनी हरकतों से बाज आने के लिए तैयार नहीं हैं। सरहद पार से हिन्दुस्तान के अंदर दहशतगर्द गरोहों की घुसपैठ और हमले जारी हैं। आखिर पाकिस्तान के साथ उसी की भाषा में बात करने और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से नरेन्द्र मोदी डर क्यों रहे हैं?
नरेन्द्र मोदी 25 दिसम्बर को टूरिज्म डिप्लोमेसी के तहत अफगानिस्तान से दिल्ली वापस आते वक्त लाहौर मंे उतर गए थे आरएसएस कुन्बे ने उनकी इस पहल का खूब ढिंढोरा पीटा था और कहा था कि मोदी ने ऐसी बेमिसाल पहल करके पाकिस्तान ही नहीं पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है। ऐसा करने वाले वह पहले हिन्दुस्तानी वजीर-ए-आजम हैं जिन्होंने इस तरह पाकिस्तान मे उतरने की हिम्मत दिखाई। उनकी हिम्मत के इस मुजाहिरे को एक हफ्ता भी नहीं गुजरा कि पाकिस्तान ने रिटर्न गिफ्ट मे हमारे सात बहादुर फौजियों की लाशें हमें थमा दीं। पाकिस्तान की यूनाइटेड जेहाद कौंसिल ने पठानकोट हमले की जिम्मेदारी ली इसके बावजूद पाकिस्तान यही कहता रहा है कि इस हमले मे उसका कोई हाथ नहीं है। जिस दिन पठानकोट पर पाकिस्तानी फिदाईन दहशतगर्दों का हमला हुआ ठीक उसी दिन नागपुर मंे आरएसएस चीफ मोहन भागवत अपने स्वयं सेवकों की भीड़ को देश और हिन्दुत्व की हिफाजत करने का हलफ (शपथ) दिला रहे थे। दावा किया गया कि एक लाख लोगों को हलफ दिलाया गया। आरएसएस चीफ आखिर यह कौन सी फौज खड़ी कर रहे हैं और देश भक्ति के बहाने किसके खिलाफ खड़ी कर रहे हैं। अगर आरएसएस के स्वयं सेवकों की फौज इतनी ही देशभक्त है तो इन देशभक्त स्वयं सेवकों को सरहद पर बीएसएफ और फौज की मदद में क्यों नहीं तैनात किया जाता। पाकिस्तान के साथ पंजाब में मिलने वाली सरहद से अक्सर पाकिस्तानी दहशतगर्द हिन्दुस्तान में घुसपैठ करते रहते हैं बीएसएफ उन्हें रोक पाने में नाकाम है या लापरवा ऐसी सूरत में अगर खुद को देशभक्त कहने वाले आरएसएस स्वयं सेवकों को सरहद पर तैनात कर दिया जाए तो यह लोग देश की हिफाजत करने का काम बखूबी कर सकेंगे। अगर अब भी यह लोग सरहद पर जाकर देश की हिफाजत का काम नहीं संभालते तो यही समझा जाएगा कि उन्हें लड़ने की जितनी भी टेªनिंग दी जाती है वह सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ दंगा फसाद कराने के मकसद से ही दी जाती है।
एक तरफ पाकिस्तानी दहशतगर्द जब चाहें हमारी सरहद मे घुसकर हमले करते रहते हैं। दूसरी तरफ मुल्क के स्यूडो देशभक्त किसी भी तरह उन लोगों की जवाबदेही तय करने के लिए तैयार नहीं है जिन पर सरहद की रखवाली की जिम्मेदारी है। सरहद पर हर जगह बार्डर सिक्योरिटी फोर्स और कुछ दीगर पैरा मिलीट्री फोर्स के दस्ते तैनात रहते हैं इसके बावजूद पाकिस्तानी दहशतगर्द बड़ी तादाद में असलहों मोर्टार, राकेट लांचर और एके सीरीज की एसाल्ट रायफल लेकर हमारे मुल्क में घुस आते हैं सरहद से पन्द्रह से बीस किलोमीटर तक आराम से घूमते रहते हैं पुलिस कप्तान तक तो अगवा कर लेते हैं पंजाब के अंदर छुपे भी रहते हैं दो तीन छुपे रहने के बाद अपनी मर्जी मुताबिक मकाम पर हमले कर देते हैं। पंजाब पुलिस की भी उनपर नजर नहीं पड़ती। यह कोई मामूली चूक नहीं है जिन लोगों की चूक से ऐसा होता है उनकी शिनाख्त करके उनके खिलाफ सख्त तरीन कार्रवाई करनी पडेगी। अगर किसी पर जवाबदेही तय न की गई तो इस किस्म के दहशतगर्दी के हमले होते रहेंगे और हम मुंह छुपाकर घडि़याली आंसू बहाते रहेंगे जवाब नहीं दे सकेंगे।

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