Vastu cure
वास्तु के प्रयोग संबंधी दोष एवं उनसे उत्पन्न होने वाली परेशानियाँ
कभी-कभी हम व्यवहारिक रूप में कुछ ऐसे कार्य करते हैं जिनका हमारे ऊपर बहुत ही गलत प्रभाव पड़ता है |हमें यह बिलकुल ही नहीं पता होता है कि हम जाने-अनजाने क्या-कुछ गलत कर रहे हैं |यहाँ मैं आपको प्रयोग संबंधी कुछ ऐसे दोषों से अवगत करा रहा हूँ जो कि वास्तु के नियमों के अनुसार गलत होते हैं और आपके स्वास्थ्य,धन,सम्बन्ध और आपकी चहुँमुखी उन्नति के रास्ते में रूकावट बन जाते हैं |ऐसे कुछ दोष निम्नवत हैं-
(1)आपके घर के मुख्य द्वार के सामने,बाहर या अंदर की ओर यदि किसी भी प्रकार की बाधा या रूकावटकारी वस्तु है तो आप उस रुकावटकारी वस्तु को तुरन्त हटा दें अन्यथा आपकी उन्नति में आश्चर्यजनक रूप में व्यवधान पैदा हो जाएगा |यही नहीं,इस दोष का असर आपके धन,स्वास्थ्य एवं आपसी संबंधों पर भी पड़ेगा |
(2)हमेशा पूर्व या दक्षिण की तरफ सिर करके सोने से स्वास्थ्य उत्तम रहता है और विचार उत्तम होते हैं |इसके साथ ही धन लाभ भी होता है |
(3)झाड़ू एवं पोंछा घर में इस प्रकार रखें कि उन पर किसी की नज़र न पड़ने पाए अर्थात ये दोनों चीज़ें आपकी नज़र में हर समय नहीं आनी चाहिए |ये दोनों नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती हैं |भोजन करते समय या घर से कहीं बाहर जाते समय इनका सामने पड़ना अच्छा नहीं माना जाता |
(4)उत्तर दिशा की ओर सिर करके सोने से मृत्यु-तुल्य कष्ट प्राप्त होता है |वायु-विकार बढ़ता है और अजीबोगरीब बीमारियाँ शरीर को लग जाती हैं |इसके साथ ही धन-नाश भी होता है |
(5)पश्चिम दिशा की तरफ सिर करके सोने से अनावश्यक चिंता उत्पन्न होती है और बुरे-बुरे स्वप्न आते हैं |
(6)किसी भी ऐसे दम्पति का जो अभी गृहस्थ जीवन के सुख से निवृत नहीं हुए हैं,ईशान कोण में सोना भयंकर रोगकारक सिद्ध होता है |पूर्व एवं उत्तर दिशा के बीच का कोण ईशान कोण कहलाता है |यह दिशा भगवान् शंकर की दिशा मानी जाती है |इस दिशा का प्रतिनिधि ग्रह गुरु होता है जो कि बुद्धि,विद्या और धन-संपत्ति का कारक ग्रह माना जाता है |
(7)ईशान कोण में बनी रसोई ऐश्वर्य का नाश करती है |ईशान कोण में जल से भरा कलश अति-लाभप्रद होता है |रसोई के लिए उत्तम स्थान अग्निकोण (दक्षिण-पूर्व) होता है |इसलिए संभव हो अति शीघ्र ईशान कोण से रसोई को हटा लेना चाहिए |
(8)किसी भी खिड़की या दरवाजे की ओर पीठ करके बैठना भी दोषकारक होता है |यह स्थिति तब और भी नुक्सानदेह सिद्ध होती है जब इस स्थिति में व्यक्ति को रोजाना बैठना पड़ता है |इससे आपका अपने सहकर्मियों,पारिवारिक लोगों आदि से झगड़ा हो सकता है |आपके ऊपर किसी प्रकार का लांछन भी लग सकता है |आपको किसी से धोखा मिल सकता है |
(9)किसी भी कमरे का ईशान कोण खाली रखना चाहिए |इस कोण में मेज़,कुर्सी,अलमारी आदि नहीं रखें |इस कोण को खाली रखने से वस्तु के सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं |
(10)पलंग के नीचे लोहे का कबाड़ या किसी भी प्रकार की सामग्री रखना दोषकारक होता है |इससे धीरे-धीरे आपकी नींद पर बुरा प्रभाव पड़ता है और आप रोग-ग्रस्त हो जाते हैं |आपके विचार,आपका स्वास्थ्य और आपकी आर्थिक स्थिति पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है |
(11)घर की दक्षिण दिशा में कबाड़ रखना दोषपूर्ण होता है |यदि यह कबाड़ लोहे का हो महा -रोगकारक सिद्ध होता है |आपके अनेकों शत्रु भी बन सकते हैं |
(12)घर के दक्षिण में तुलसी के पौधे नहीं लगाने चाहिए |इससे शत्रुओं के साथ ही रोग भी पैदा होते हैं और मृत्यु-तुल्य कष्ट प्राप्त होता है |
(13)यदि घर की पूर्व दिशा में कूड़ा-करकट,पत्थर या अनुपयोगी सामन रखा हो तो यह घर के बच्चों के लिए नुकसानदायक होता है |उनकी उन्नति में बाधाएँ उत्पन्न हो जाती हैं और उनका समुचित विकास नहीं हो पाता |यही नहीं इससे आपकी आर्थिक स्थिति पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है |
(14)आपके शयन-कक्ष में मृत-पूर्वजों और ईश्वर के चित्र बुरा प्रभाव देते हैं |इन्हें उनके लिए नियत स्थान पर ही लगाएं |इससे आपके गृहस्थ जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है |
(15)शयनकक्ष में किसी भी प्रकार की ऐसी तस्वीर न लगाएँ जिसमे पानी दर्शाया गया हो |शयन-कक्ष में पानी से भरा कोई भी पात्र आपके संबंधों को नीरस बना देता है |यही नहीं,कालांतर में आपके संबंधों में दरार पैदा होकर नौबत तलाक तक आ सकती है |
(16)घर में किसी भी प्रकार की चढ़ने वाली बेल शत्रुओं को पैदा करती है |इसलिए ध्यान रखें कि किसी भी प्रकार की बेल आपके घर को छूते हुए उस पर न चढ़ने पाए |
(17)आपके पलंग के ऊपर किसी भी प्रकार की बीम आदि नहीं होनी चाहिए |किसी भी प्रकार का झाड़-फानूस या कोई भी लटकने वाली वस्तु का पलंग के ठीक ऊपर होना स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करता है |
(18)सोते समय किसी भी दर्पण में आपके शरीर का कोई भी अंग नहीं दिखना चाहिए |यदि ऐसा है तो सोते समय उस दर्पण को किसी कपड़े आदि से ढँक देना चाहिए |
(19)घर में दर्पण हमेशा पूर्व,उत्तर या ईशान कोण में लगाएँ |कभी भी दर्पण को दक्षिण,पश्चिम या नैऋत्य कोण की तरफ आने वाली दीवार पर नहीं लगाएँ |दर्पण की तरह प्रभाव देने वाली सभी वस्तुओं पर भी यही बात लागू होती है |
(20)घर में कभी भी ऐसे चित्र ना लगाएँ जिनसे नकारात्मकता का सृजन होता हो |मसलन,रोते हुए लोगों के चित्र,भिखारियों,जंगली पशुओं,नुकीली आकृतियों की पेंटिग,गरीबी को दर्शाते चित्र,लड़ाई-झगड़े को दर्शाते चित्र,लड़ाई के लिए उकसाते चित्र(महाभारत का वह चित्र,जिसमे श्रीकृष्ण अर्जुन को रथ में बैठकर लड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं ),नटराज की मूर्ति या चित्र,एक ही पक्षी का चित्र,शिकार करते पशुओं के चित्र |इन सभी चित्रों को घर से तुरंत हटा देना चाहिए |इनके स्थान पर घर में सकारात्मकता का सृजन करने वाले चित्रों को लगाना चाहिए |
किसी भी प्रकार की वास्तु संबंधी अन्य जानकारी के लिए इस नंबर पर संपर्क करें - 7784882119
05/02/2017
व्यवहारिक वास्तु - घर में इधर-उधर बिखरे पड़े जूते-चप्पल दुर्भाग्य को आमंत्रित करते हैं,इसलिए इन्हें उनके लिए नियत स्थान पर ही उतारकर रक्खें |इस बात का भी अवश्य ध्यान रक्खें कि अपने घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने भीतर या बाहर की ओर जूते-चप्पल न उतारें |बल्कि इन्हें द्वार के एक ओर द्वार से कुछ दूर हटकर उतारें |इन्हें कभी उल्टा न रखें,न ही दायाँ-बायाँ पलटकर रखें |इन्हें उसी अवस्था में रक्खें जिस प्रकार यह पहने जाते हैं |घर के मंदिर या किसी भी मंदिर आदि पवित्र स्थान में जूते-चप्पल पहनकर प्रवेश नहीं करना चाहिए |अन्न आदि के भण्डार कक्ष में और रसोई में भी जूते-चप्पल पहनकर प्रवेश न करें |इतना ही नहीं,तिजोरी से सामान निकालते या उसमे सामान रखते समय भी जूते आदि उतार दें |इस बात का ध्यान रखने से देवी लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है |
29/01/2017
वास्तु का परिचय-वास्तुशास्त्र एक विस्तृत एवं गूढ़ विज्ञान है |जिस स्थान पर हम रहते हैं,उस स्थान की भूमि का विशेष महत्त्व होता है |ठोस,बलुई एवं कूड़े वाली भूमि के आधार पर हम भवन के स्थायित्व की भविष्यवाणी भली प्रकार कर सकते हैं |पृथ्वी की गुरुत्व शक्ति,ब्रह्मांडीय चुम्बकीय शक्ति,पृथ्वी के ध्रुवों की चुम्बकीय तरंगों के प्रवाह,सूर्य की ऊर्जा एवं पञ्च-तत्वों के मध्य उचित एवं सकारात्मक तालमेल बिठाना ही वास्तु का मुख्य उद्देश्य होता है |एक निर्दोष वास्तु में इन सभी तत्वों के बीच बहुत ही सुंदर तालमेल पाया जाता है |
यहाँ यह बात स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि वास्तु का ज्ञान हमारे ऋषि-मुनियों की एक बहुत ही उत्कृष्ट देन है |उनके इस ज्ञान का उचित लाभ उठाकर हम अपने जीवन के साथ ही दूसरों के जीवन को भी बेहतर बना सकते हैं |हमारे पुराणों और कई धार्मिक ग्रन्थों में वास्तु के सन्दर्भ में विस्तृत चर्चा की गई है |यही नहीं,इन ग्रन्थों में वास्तु दोषों के निवारण के अत्यंत सटीक उपाय बताए गए हैं |जिनका प्रयोग करके हम भवन को किसी भी प्रकार की क्षति पहुँचाए बिना उसके वास्तु दोषों का निराकरण अत्यंत सरल एवं प्रभावी ढंग से कर सकते हैं |
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