B.I.G
06/05/2026
मक्खन नान (Butter Naan) रेसिपी
पोस्टर के अनुसार, यहाँ आपकी स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी दी गई है:
🛒 सामग्री (Ingredients):
* मैदा: 2 कप
* नमक: स्वादानुसार
* चीनी: 1 छोटा चम्मच
* दही: 1/2 कप
* बेकिंग सोडा: 1/4 छोटा चम्मच
* तेल: 2 बड़े चम्मच
* कलौंजी और हरा धनिया: स्वाद और सजावट के लिए
* मक्खन (Butter): नान पर लगाने के लिए
👩🍳 बनाने की विधि (Steps):
* आटा तैयार करें: एक बड़े बर्तन में मैदा, नमक, चीनी और बेकिंग सोडा डालकर अच्छी तरह मिला लें।
* दही और तेल: अब इसमें दही और थोड़ा तेल डालकर मिलाएं।
* गूंथना: हल्के गुनगुने पानी की मदद से एक बहुत ही नरम और लचीला आटा गूंथ लें।
* रेस्ट: आटे पर हल्का तेल लगाकर उसे ढक दें और कम से कम 1 से 2 घंटे के लिए फूलने दें।
* आकार देना: आटे की लोइयां बनाकर उन्हें अंडाकार (Oval) या गोल बेल लें। ऊपर से थोड़ी कलौंजी और हरा धनिया छिड़क कर बेलन से हल्का दबा दें।
* सेकना: नान की पिछली सतह पर थोड़ा पानी लगाएं और गरम तवे पर डाल दें। जब ऊपर बुलबुले दिखने लगें, तो तवे को पलट कर सीधी आंच पर सुनहरा होने तक सेकें।
* सर्विंग: नान को उतारकर उस पर खूब सारा मक्खन लगाएं।
💡 प्रो-टिप: नान को और भी सॉफ्ट बनाने के लिए आप पानी की जगह दूध का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
25/04/2026
गुरूदत्त ने जब अपनी फ़िल्म आर-पार को सेंसर बोर्ड में सर्टिफ़िकेशन के लिए भेजा तो वहां एक दिक्कत हो गई। सेंसरबोर्ड ने इस फ़िल्म के गीत "कभी आर कभी पार लागा तीरे नज़र" पर आपत्ति जता दी। सेंसर बोर्ड का कहना था कि इस गीत को किसी फ़ीमेल आर्टिस्ट पर फ़िल्माया जाना चाहिए।
शमशाद बेगम द्वारा गा गए उस गीत को गुरूदत्त जी ने जगदीप पर फ़िल्माया था। सेंसर बोर्ड की आपत्ति के बाद गुरूदत्त प्रैशर में आ गए। क्योंकि फ़िल्म की रिलीज़ डेट घोषित की जा चुकी थी। गुरूदत्त साहब के पास वक्त नहीं बचा था। कुमकुम तब तक फ़िल्म इंडस्ट्री में आ चुकी थी। तो उन्होंने कुमकुम को बुलाया।
कुमकुम का स्क्रीनटेस्ट लिया। और कुमकुम को इस गीत के लिए फाइनल भी कर दिया। रोचक बात ये है कि इस गीत की कोरियोग्राफ़ी गुरूदत्त जी ने खुद ही की थी। आर पार जब रिलीज़ हुई तो इस गीत को बहुत पसंद किया गया। और कुमकुम जी को भी प्रसिद्धी मिल गई। संगीतकार थे ओ.पी.नैयर। नैयर साहब की भी ये पहली हिट फ़िल्म थी।
नृत्यांगना के तौर पर तो कुमकुम को ख्याति मिल गई। मगर उन्हें एक्ट्रेस भी बनना था। तो गुरूदत्त साहब ने ही उन्हें एक्ट्रेस बनने का मौका भी दिया। फ़िल्म थी 1955 की मिस्टर एंड मिसेज 55. हालांकि गुरूदत्त साहब ने इस फ़िल्म में कुमकुम जी को जो रोल दिया था उसका सिनेमैटोग्राफ़र वी.के.मूर्ति ने विरोध किया था।
गुरूदत्त ने पांच बच्चों की मां के किरदार में कुमकुम को लिया था। और वी.के.मूर्ति जी का कहना था कि ये तो खुद बच्ची दिखती है। ये इस रोल में कैसे जंचेगी? मगर गुरूदत्त अडिग रहे। उन्होंने कुमकुम को उस रोल से नहीं हटाया। मिस्टर एंड मिसेज 55 भी सफ़ल रही। और यूं कुमकुम नृत्यांगना के साथ-साथ बतौर अभिनेत्री भी फ़िल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गई।
कुमकुम के पास काम की कोई कमी नहीं रही। कई बड़ी फ़िल्मों में कुमकुम जी ने अभिनय किया। 1973 की जलते बदन कुमकुम जी की आखिरी फ़िल्म थी। एक्टर किरण कुमार इस फ़िल्म में कुमकुम जी के हीरो थे। वैसे 1976 में आई बॉम्बे बाय नाइट कुमकुम जी की आखिरी फ़िल्म थी। वो एक ब्लैक एंड व्हाइट फ़िल्म थी जो एक लेट रिलीज़ थी। उसमें संजीव कुमार कुमकुम जी के हीरो थे।
आज कुमकुम जी का जन्मदिवस है। 22 अप्रैल 1934 को कुमकुम जी का जन्म हुआ था। हालांकि कुमकुम जी की जन्मतिथि 21 दिसंबर 1935 भी बताई जाती है। सही क्या है, कहा नहीं जा सकता। फिलहाल हम भी 22 अप्रैल ही मानकर चल रहे हैं। वैसे तो कुमकुम जी के बारे में अधिकतर लोगों को यही पता है कि उनका जन्म बिहार के हुसैनाबाद में हुआ था।
उनके पिता वहां के नवाब थे। मगर बीते हुए दिन वाले शिशिर कृष्ण शर्मा जी के एक लेख में किसी वक्त पर भारत की प्रख्यात नृत्यांगना रही सितारा देवी के हवाले से लिखा गया है कि कुमकुम के पिता वासुदेव महाराज थे जो बनारस के मशहूर तबला नवाज़ और गोविंदा के नाना थे।
इंटरनेट पर ऐसी बातें तो हमेशा से सुनने-पढ़ने को मिलती रही हैं कि कुमकुम गोविंदा की सगी मौसी हैं। मगर इन बातों की पुष्टि कभी किसी लेख या वीडियो के ज़रिए हुई नहीं। सभी इनके रिश्ते पर धूल में लठ्ठ मारने जैसे कमेंट करते हैं। मगर शिशिर कृष्ण जी ने अपने लेख में कुछ दमदार फैक्ट्स रखे हैं। वो क्या हैं, चलिए जानते हैं।
गोविंदा की मां कौन थी? निर्मला देवी, जो किसी वक्त की मशहूर ठुमरी गायिका थी। कुमकुम और गोविंदा की मां के धर्म भी अलग थे। हालांकि गोविंदा की मां निर्मला देवी जी के बारे में भी बहुत जगह ऐसे दावे किए जाते हैं कि वो मुस्लिम परिवार में जन्मी थी। लेकिन बाद में धर्म परिवर्तन करके हिंदू बन गई थी। उनका नाम पहले नज़ीम हुआ करता था। जबकी कुछ लोगों ने कुमकुम के बारे में भी लिखा कि वो मुस्लिम नहीं थी। वो भी एक सिंधी हिंदू थी।
एक दिन शिशिर कृष्ण जी ने सितारा देवी जी से कुमकुम और निर्मला देवी के रिश्ते पर बात की। सितारा देवी जी ने शिशिर जी को बताया कि कुमकुम और निर्मला देवी के पिता एक ही थे। मां अलग-अलग थी। सितारा देवी जी ने ही शिशिर जी को ये भी बताया कि कुमकुम की एक छोटी बहन भी हैं जिनका नाम राधा है।
कुमकुम की छोटी बहन राधा भी कुछ फ़िल्मों में राधिका नाम से एक्टिंग कर चुकी हैं। मिस्टर एंड मिसेज 55 में राधिका भी थी। उसके अलावा राधिका जी ने रात के राही, लाल निशान, शोला जो भडके नामक कुछ फ़िल्मों में काम किया था। सितारा जी के मुताबिक, कुमकुम और राधा वासुदेव महाराज की बेटियां हैं। जबकी निर्मला देवी भी उन्हीं की बेटी है।
फ़र्क बस इतना है कि निर्मला देवी वासुदेव महाराज की पहली पत्नी, जो कि एक हिंदू महिला थी, उनकी संतान हैं। और कुमकुम व राधा वासुदेव महाराज की दूसरी पत्नी, जो एक मुस्लिम महिला थी, उनकी संतानें हैं। कुमकुम की मां को लोग मुन्नन आपा के नाम से जानते थे।
कुमकुम जी को शम्भू महाराज से नृत्य की शिक्षा दिलाने के लिए मुन्नन आपा ही लखनऊ लेकर गई थी। सितारा देवी जी ने ही शिशिर कृष्ण शर्मा जी को ये भी बताया था कि गोविंदा के नाना वासुदेव महाराज ठेठ बनारसी क्षत्रिय खानदान से थे। उनका नाम वासुदेव नारायण सिंह था।
इन्हीं वासुदेव महाराज के पुत्र थे लच्छू महाराज, जो भारत के मशहूर तबला वादक रहे हैं। और लच्छू महाराज गोविंदा के सगे मामा, यानि निर्मला देवी जी के सगे भाई थे। उनका नाम लक्ष्मण नारायण सिंह था। एक बड़े अखबार में कभी गोविंदा का कोई इंटरव्यू छपा था। उस इंटरव्यू में गोविंदा ने कुमकुम जी को कुमकुम आंटी कहकर संबोधित किया था। इस बात से भी लोग दावा करते हैं कि गोविंदा और कुमकुम का कुछ रिश्ता तो था।
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