Abdul Rafey

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15/03/2024

देश में 2 तरह की बयार है। एक राहुल गांधी की न्याय यात्रा में 5 गारंटियों और किसान नीति की ठंडी हवा है तो दूसरी ओर मोदी सत्ता के भ्रष्टाचार और घोटालों की गर्म हवा।
इलेक्टोरल बॉन्ड के रूप में 37 खरब का घोटाला हुआ है। जिस मेघा इंजीनियरिंग ने बीजेपी को 1200 करोड़ का चंदा दिया, वह टीवी9 समूह का मालिक है।

बहरहाल, एसबीआई ने 2019 से 24 तक के घोटाले का ब्योरा दिया है। 2500 करोड़ उससे पहले का घोटाला है।

एसबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को यह नहीं बताया कि इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वाले हरेक कंपनी के लिए एक यूनिक कोड जनरेट होता है। उससे लेन–देन का पूरा ब्योरा मिल जाता है।

कोर्ट ने आज एसबीआई को तथ्य छिपाने के लिए फिर डांटा है।

मसलन, वैक्सीन बनाने वाली सीरम इंस्टीट्यूट ने बीजेपी को एक दिन में 52 करोड़ का चंदा दिया।

मेघा इंजीनियरिंग को चंदा देने के एक ही महीने बाद ठेका मिला।
पाकिस्तान की हब पावर कंपनी ने पुलवामा हमले के एक माह बाद बीजेपी को चंदा दिया।

सब लिस्ट में मौजूद हैं। यहां तक कि यूपी में बिजली दे रही कंपनी ने भी बीजेपी को चंदा दिया।

बड़ी बात यह है कि चंदे का यह खेल इस देश में लूट की वह कहानी लिख गया, जो आजाद भारत में पहली बार है।

चंदा, यानी प्रोटेक्शन मनी। हर गलत काम से बचाने की सुरक्षा निधि। जैसे, सिलक्यारा हादसे की जिम्मेदार नवयुग कंस्ट्रक्शन का बीजेपी को चंदा।

इलेक्टोरल बॉन्ड की कब्र से भूत बाहर आ रहे हैं। लोगों को समझ आ रहा है कि द्वारका एक्सप्रेसवे सोने की सड़क कैसे बनी।

लेकिन, जो बात कही जानी है वह यह कि मैं, आप, हर भारतीय इस लूट के शिकार होकर गरीब कैसे बन गए।

क्यों हम मध्यमवर्गीय आज लोन पर जिंदा हैं? क्यों इस देश में नौकरी नहीं है? क्यों इस देश में दौलत 434 अमीरों के पास है, जो बीजेपी को चंदा देते हैं?

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