Ananya Rai Parashar

Ananya Rai Parashar

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05/10/2022

रूख़ सफ़र का सुकूं को मोड़ा जाए
ख्वाहिशों को यहीं पे छोड़ा जाए

जिस मुहब्बत का हुस्न तोड़ा गया
उस मोहब्बत का हुस्न जोड़ा जाए

जो नहीं है हमारी चाहत में
उस त'आक़ुब में सर ना फोड़ा जाए

वो मुझे ख़्वाब में ही हासिल है
क्या ज़रूरी है ख़्वाब तोड़ा जाए

एक मुद्दत से आंखें गीली हैं
अब के सावन इसे निचोड़ा जाए

© Ananya Rai Parashar

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