Imran Ghazi
16/02/2026
जब हाकिम ए वक्त हज़रत उमर रज़ीo ने इलाके के गरीबों और मिस्किनो की लिस्ट मंगवाई तो उनमें सबसे ऊपर नाम हिम्स के गवर्नर सईद बिन आमिर रज़ीo का था लोगो ने बताया उनके पास पहनने को कपड़ा नहीं है खाने को खाना नहीं होता
हज़रत उमर रज़ीo ने थोड़ा सा माल सईद बिन आमिर रज़ीo को भेज दिया जब उन्होंने देखा तो दुआ पढ़ी इन्ना लिल्लाही वा इन्ना इलैहि राजीऊन और कहा जिस दुनिया से मैने पीछा छुड़ाया था वो फिर मेरे पास आ गई
जब एक मर्तबा उमर रज़ीo ने अपने गवर्नरों का हाल जानने के लिए हिम्स के इलाके की जामा मस्जिद तशरीफ ले गए उनकी आवाम से जानकारी ली तो उनकी आवाम ने चार शिकायतें सईद बिन आमिर रज़ीo की करी
नंबर एक लोगो ने कहा ए उमर पहले सईद बिन आमिर फ़ज़र की नमाज़ के बाद हमारे पास आते थे लेकिन जबसे गवर्नर बने है चास्त के बाद आते है
दूसरी शिकायत पहले हमसे रात में भी मिला करते थे अब सिर्फ दिन में वक्त देते है
तीसरी हफ्ते में एक दिन हमसे मिलने नहीं आते
चौथी बैठे बैठे रोने लगते है और गश खाकर बेहोश हो जाते है
उमर रज़ीo ने कहा ए आमिर बताओ क्या वजह है तो सईद बिन आमिर रज़ीo ने कहा मैने पहले ही कहा था मैं इसके अहल नहीं हु उमर रज़ीo ने कहा अब तुम मंसब पर हो तुमको आवाम को वजह बतानी होगी
सईद बिन आमिर ने कहा अमीरूल मोमिनिन मेरे घर में कोई खादिम नहीं है और बीवी बीमार है घर में चुलाह बर्तन खाना सब मुझे ही करना पड़ता है इसलिए फजर बाद लोगो से मिलना मुश्किल हो जाता है
उमर रज़ीo ने कहा दूसरी वजह तुम दिन में क्यों नहीं मिलते तो सईद बिन आमिर ने अपनी दाढ़ी पकड़ कर कहा ए उमर रज़ीo देखिए मेरी दाढ़ी सफेद हो रही है क्या पता मेरा अल्लाह मुझे कब बुला ले इसलिए मैने दिन मखलूक के लिए रखा है और रात खालिक के लिए
उमर रज़ीo ने कहा तीसरी शिकायत इसपर सईद बिन आमिर ने कहा ए उमर रहने दे ये मेरा और अल्लाह का मामला है उमर रज़ीo ने कहा नहीं अब तुम मंसब पर हो तुमको आवाम को बताना ही होगा तो सईद बिन आमिर ने कहा मेरे पास एक ही कपड़ा है जिसे हफ्ते में एक बार धोता हु और जब तक सूख ना जाए घर में बीवी के कपड़े पहन कर बैठता इसलिए मिलने नहीं आ सकता
उमर रज़ीo ने कहा चौथी वजह तो आपने कहा ए उमर मैने ईमान लाने से पहले जवानी में बहुत गुनाह किए उनको याद करके रोने लगता हूं जिससे रोते रोते बेहोश हो जाता हूं
वल्लाह क्या ही सहाबा थे क्या ही ईमान था ऐसी हुकूमत दुनिया के किसी निज़ाम में नहीं है ये सिर्फ अल्लाह के निज़ाम में ही हो सकता है क्योंकि अल्लाह का निज़ाम ही हक और इंसाफ का निज़ाम है और अल्लाह के निज़ाम के अलावा जितने भी निज़ाम है वही तो तागूत है!
30/12/2025
सद्दाम हुसैन की सुरक्षा में लगाए गए बारह अमरीकी सैनिक उनकी पूरी ज़िंदगी के बेहतरीन मित्र न सही, लेकिन उनके आख़िरी मित्र ज़रूर थे। 🕊️
सद्दाम के आख़िरी क्षणों तक साथ रहे 551 मिलिट्री पुलिस कंपनी से चुने गए इन सैनिकों को ‘सुपर ट्वेल्व’ 🇺🇸👥 कहा जाता था।
इनमें से एक विल बार्डेनवर्पर 📖 ने एक किताब लिखी —
‘द प्रिज़नर इन हिज़ पैलेस, हिज़ अमेरिकन गार्ड्स, एंड व्हाट हिस्ट्री लेफ़्ट अनसेड’ —
जिसमें उन्होंने सद्दाम की सुरक्षा करते हुए उनके अंतिम दिनों के बेहद मानवीय और चौंकाने वाले विवरण साझा किए हैं।
🕵️♂️ एजेंट जिसने असली सद्दाम को पहचाना
विल बार्डेनवर्पर, ‘सुपर ट्वेल्व’ टीम का हिस्सा थे।
उनका कहना है कि जब सद्दाम को उन लोगों के हवाले किया गया जो उन्हें फांसी देने वाले थे, तो सभी सैनिकों की आँखों में आँसू थे 😢।
बार्डेनवर्पर अपने साथी एडम रोजरसन के हवाले से लिखते हैं:
“हमने सद्दाम को कभी एक मनोविकृत हत्यारे की तरह नहीं देखा। हमें तो वो हमारे दादा जैसे लगते थे।” 👴
सद्दाम पर अपने 148 विरोधियों की हत्या का आदेश देने का मुक़दमा चला था ⚖️।
🎧 आख़िरी दिनों की आदतें
▪️ जेल में उन्होंने अपने अंतिम दिन मेरी जे. ब्लाइज़ 🎶 के गाने सुनते हुए बिताए
▪️ खचाड़ा एक्सरसाइज़ बाइक 🚲 जिसे वो प्यार से ‘पोनी’ कहते थे
▪️ मीठे के शौकीन 🍰, ख़ासतौर पर मफ़िन
▪️ बेहद विनम्र व्यवहार 🤍 — कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता था कि वो कभी एक क्रूर शासक थे
🚬 कास्त्रो ने सिगार पीना सिखाया
सद्दाम को ‘कोहिबा’ सिगार 🚬 का शौक था, जिन्हें वो गीले वाइप्स के डिब्बे में रखते थे।
उनका कहना था कि फ़िदेल कास्त्रो 🇨🇺 ने उन्हें सिगार पीना सिखाया था।
उन्हें बागबानी 🌱 पसंद थी और जेल की बेतरतीब झाड़ियों में भी उन्हें फूल नज़र आते थे।
🍳 खाने की नज़ाकत
नाश्ता हमेशा क्रम में:
➡️ पहले ऑमलेट
➡️ फिर मफ़िन
➡️ फिर ताज़े फल 🍎
अगर ऑमलेट टूट जाए, तो वो उसे खाने से मना कर देते थे।
🔥 उदय की क्रूरता का किस्सा
एक बार सद्दाम ने अपने बेटे उदय की क्रूरता का ज़िक्र किया —
पार्टी में गोली चलने से कई लोग मारे गए थे।
ग़ुस्से में सद्दाम ने हुक्म दिया कि उदय की सारी कारों को जला दिया जाए 🚗🔥 —
रॉल्स रॉयस, फ़रारी, पोर्श…
और वो खुद लपटों को देखते रहे 😐।
🤝 इंसानियत के पल
▪️ एक सैनिक के भाई की मौत पर सद्दाम ने उसे गले लगाया और कहा:
“आज से मुझे अपना भाई समझो।” 🤍
▪️ एक सैनिक के बेटे की कॉलेज फ़ीस भरने की पेशकश 🎓
▪️ एक सैनिक डॉसन को अपना सूट तोहफ़े में दिया 👔 — जिस पर सब हँसते रहे 😄
🏛️ ‘सद्दाम का दरबार’
गार्डों ने जेल के स्टोररूम को सद्दाम के दफ़्तर जैसा बना दिया:
▪️ छोटी मेज़
▪️ चमड़े की कुर्सी
▪️ इराक़ का झंडा 🇮🇶
सद्दाम रोज़ आकर कुर्सी पर बैठते और सैनिक सामने बैठते —
मानो दरबार लगा हो।
गार्डों का मानना था:
“अगर हमारे साथ कुछ बुरा होता, तो सद्दाम हमारी जान बचाने के लिए अपनी जान दे देते।” 🛡️
⚰️ फांसी और पछतावा
सद्दाम की फांसी के बाद कई सैनिकों ने शोक मनाया 😔।
एडम रोजरसन ने कहा:
“हमें लगा हमने उनके साथ ग़द्दारी की है।”
जब शव के साथ बदसलूकी हुई, तो सैनिक स्तब्ध रह गए 😳।
एक सैनिक ने भिड़ने की कोशिश भी की, लेकिन रोका गया।
⌚ आख़िरी तोहफ़ा
30 दिसंबर 2006 🌅, तड़के 3 बजे सद्दाम को जगाया गया।
फांसी से पहले उनकी एक ही चिंता थी:
“क्या सुपर ट्वेल्व को नींद आई?”
उन्होंने अपनी रेमंड वील घड़ी ⌚ स्टीव हचिन्सन को दी।
वो घड़ी आज भी जॉर्जिया के एक सेफ़ में टिक-टिक कर रही है… 🕰️
📌 Via ~ BBC
06/12/2025
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से जब गाज़ा के तनाव के बारे में पूछा गया कि उनका शांति प्लान क्या है, तो उन्होंने कहा कि उनका कोई अलग प्लान नहीं है। पुतिन ने कहा कि गाज़ा और फिलिस्तीन समस्या का समाधान तभी संभव है जब संयुक्त राष्ट्र का टू-स्टेट सॉल्यूशन पूरी तरह लागू हो। इसके तहत एक स्वतंत्र फिलिस्तीन देश का निर्माण होना सबसे ज़रूरी है, और यही इस पूरे विवाद का असली समाधान है। हम एक स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र चाहते हैं. हाल ही में बंधकों की रिहाई को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप ने जो किया है, वो गाजा के पुनर्वास के लिए अच्छा कदम है. मैं मानता हूं कि ये सही होगा कि गाजा को एकजुट करके पूरी शक्ति फिलिस्तीन को देनी चाहिए.
06/12/2025
आज से तीन साल पहले लिखा था
**
यहूदी जब फिलस्तीन में घुसे थे तो उन्होंने कहा था कि साल दो साल की बात है बुढ्ढे मर जाएंगे और बच्चे भूल जाएंगे
हुआ क्या आपको ख़बर है
जब वो लोग अपने गाँव से बस्तियों से निकाले गए तो उन्ही बस्तियों के नाम से मोहल्लों के नाम ग़ाज़ा में रखे इस अज़्म के साथ कि हम वापस जाकर उनको आबाद करेंगे और इन मोहल्लों के नाम हमे याद दिलाते रहेंगे
आडवाणी से लेकर आरएसएस और उनकी चढ्ढी फौज अगर इस गलतफहमी में है कि हम भूल जाएंगे तो तारीख़ में 30 या 40 साल की कोई हैसियत नही
अश शायक नाम की आबादी को इस्राइली फौजो ने 6 बार पूरा खत्म किया आबादी हटाई और 6 बार फिलिस्तीनियों ने उसको आबाद किया
इसलिए हम भी न बाबरी को भूलने वाले है न अपने ऊपर हुई इस न इंसाफी को
हम में से कुछ जियाले निकलेंगे जो हालात और वक़्त बदलेंगे
अब रही आज के वक़्त की तो 1400 साल में वो वक़्त भी देखा है जब एक मंगोल 20 मुसलमानो को लाइन लगा कर ज़बह करता था
बल्ख़ समरकन्द निशापुर से लेकर बगदाद तक कोई शहर नही बचा
उसके बाद मंगोल भी हमारे हुए आधा योरोप भी और सल्तनतें रुम भी गयी
वक़्त बदलेगा और हालात भी
मस्जिद भी दुबारा बनेगी और सजदे भी होंगे
है अयान योरिश-ए-तातार के अफसाने से
पासबाँ मिल गए काबे को सनम खाने सेl
~ Khan
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