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25/11/2024
**ग़ज़ल**
नज़रों से नज़ारा क्यों छुपा बैठा है,
दिल किसी दर्द का किस्सा सुना बैठा है.!
चाहतें थीं मगर राह में काँटे मिले,
फिर भी हर ख़्वाब को दिल लगा बैठा है.!
चुप रहो, अब तो हवाओं से बातें करो,
दिल को चुपचाप कोई राज़ बता बैठा है.!
मोड़ सारे वो अकेले ही पार कर गया,
जो ग़मों की रीत हमको सिखा बैठा है.!
रात गहरी है मगर ख़्वाब हैं रौशन बहुत,
कोई उम्मीद का दीप जला बैठा है.!
आँसुओं का ये सफ़र यूँ ही चलता रहेगा,
हर लम्हा नया दर्द जगा बैठा है.!
गिरते तारे भी दुआओं के क़रीब हैं,
आसमाँ तक कोई हाथ उठा बैठा है.!!
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#गज़ल
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