Upendra Rai

Upendra Rai

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28/08/2023

।।गुलाब।।
कांटों के बीच अपनी पंखुड़ियों को फैलाता हूं,
गुलाब हूं मैं, हर एक के नाकों तक खुशबू ले जाता हूं।
कांटे हर वक्त कोशिश करते हैं,
हमारी पंखुड़ियों में आने की।
मगर उनसे सजग रह कर,
मैं कोशिश करता हूं सुंगध फैलाने की।।
कभी-कभी हवा के झोके उन्हें दे देते हैं मौका,
मगर अधिकांश फुल आपके पास लाता हूं।।
कांटों के बीच अपनी पंखुड़ियों को फैलाता हूं,
गुलाब हूं मैं, हर नाकों तक खुशबू ले जाता हूं।
मैं कभी दुखी नहीं होता उन कांटों से,
क्योंकि उनका तो काम है अवरोध लाना।।
वे तो कांटे हैं आखिर काटे ही रहेंगे,
मैं जिसके लिए बना हूं, वह हमें है करते जाना।।
आखिर मैं उनसे उलझुं तो,
फिर मैं अपना काम कैसे कर पाऊंगा।।
समाज में खुशबू के लिए बना हूं मैं,
समाज को कैसे अपने खुशबू से परिचित कराऊंगा।।
कांटे हैं, उन कांटों का क्या,
उनको मैं हमेशा पीछे धकेल ले जाता हूं।।
कांटों के बीच अपनी पंखुड़ियों को फैलाता हूं,
गुलाब हूं मैं, हर नाकों तक खुशबू ले जाता हूं।
आखिर समाज में भी तो हैं हजारों कांटे,
उन कांटों को देख अपना दर्द भूल जाता हूं।।
कांटों के बीच अपनी पंखुड़ियों को फैलाता हूं,
गुलाब हूं मैं, हर नाकों तक खुशबू ले जाता हूं।

Photos from Upendra Rai's post 24/08/2023

भगवान शिव ने जिसे अलकों (जटाओं) में बांध लिया था, वह अलकनंदा, जिसे विष्णुगंगा भी कहते हैं, जो कैलाश से बढ़ते हुए आगे चलकर गंगा के रूप में मोक्षदायिनी बन जाती है। अपने लिए ऐसी ही उम्मीद को पालकर जिसका नाम अलकनंदा रखा, उस हमारी छोटी बच्ची का आज जन्मदिन है।
भगवान भोलेनाथ की कृपा और आप सभी का आशीर्वाद बना रहे।

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