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Photos from Geography education's post 20/12/2025

अरावली बचाने की जंग हुई तेज,

अगर अरावली के जंगल कट गए, तो क्या सच में कुछ बदलेगा? SC के ‘100 मीटर’ वाले फैसले को आसान भाषा में समझते हैं

अगर अरावली के जंगल कट गए, तो क्या सच में कुछ बदलेगा? SC के ‘100 मीटर’ वाले फैसले को आसान भाषा में समझते हैंअरावली को लेकर सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला चर्चा में है. 100 मीटर वाला फैसला. सवाल उठ रहा है कि क्या इससे जंगल कटेंगे? क्या पर्यावरण को नुकसान होगा? या फिर डर जरूरत से ज़्यादा है? आइए आसान भाषा में समझते हैं.

अगर अरावली के जंगल कट गए, तो क्या सच में कुछ बदलेगा? SC के ‘100 मीटर’ वाले फैसले को आसान भाषा में समझते हैं
नई दिल्ली:
अरावली सिर्फ पहाड़ों की एक कतार नहीं है. ये उत्तर भारत की आखिरी प्राकृतिक ढाल है, जो रेगिस्तान को दिल्ली तक आने से रोकती है, जो जहरीली हवा को थामती है और जो जमीन के नीचे पानी को जिंदा रखती है. अब इसी अरावली को लेकर सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला चर्चा में है.

100 मीटर वाला फैसला. सवाल उठ रहा है कि क्या इससे जंगल कटेंगे? क्या पर्यावरण को नुकसान होगा? या फिर डर जरूरत से ज़्यादा है?

सुप्रीम कोर्ट ने असल में कहा क्या?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि 2.5 अरब साल पुरानी दुनिया की सबसे पुराने पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली क्षेत्र में 100 मीटर से नीचे की पहाड़ियों को अपने-आप ‘जंगल' नहीं माना जाएगा. मतलब यह कि सिर्फ इस आधार पर कि कोई पहाड़ी अरावली में है, उसे वन भूमि घोषित नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा हर जमीन का फैसला रिकॉर्ड, अधिसूचना और वास्तविक स्थिति के आधार पर होगा ना कि सिर्फ ऊंचाई के पैमाने पर.
तो क्या अब अरावली में धड़ल्ले से कटाई होगी?
सीधा जवाब- नहीं.

यह फैसला ना तो अंधाधुंध कटाई की इजाजत देता है, ना ही सभी पहाड़ियों को निर्माण के लिए खोल देता है.

अगर कोई जमीन पहले से वन भूमि घोषित है या किसी पर्यावरण कानून के तहत संरक्षित है. तो उस पर यह फैसला कोई असर नहीं डालता.

फिर विवाद क्यों?

क्योंकि इस फैसले से राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन को जमीन की व्याख्या करने की ज्यादा ताकत मिल जाती है. यानी जो इलाका पहले 'जंगल जैसा' माना जा रहा था, अब उसे 'राजस्व भूमि' या 'गैर-वन क्षेत्र' बताया जा सकता है.

यहीं से डर पैदा होता है कि कहीं इसी रास्ते से अरावली धीरे-धीरे न खोखली हो जाए.

पर्यावरण के लिए खतरा कहां है?

खतरा फैसले में नहीं, उसके इस्तेमाल में है. अगर जमीनी रिकॉर्ड बदले गए, पर्यावरण आकलन को नजरअंदाज किया गया और विकास के नाम पर ढील दी गई तो असर साफ होगा. दिल्ली-NCR की हवा और जहरीली, भूजल और नीचे, गर्मी और ज्यादा बेरहम होगी.

तो ये फैसला अच्छा है या बुरा?

यह फैसला न तो पूरी तरह राहत है, न पूरी तरह खतरा. यह एक कानूनी स्पष्टता है. लेकिन इसकी नैतिक जिम्मेदारी अब सरकारों पर है.

अरावली बचेगी या कटेगी, यह अब कोर्ट से ज़्यादा नीति और नीयत पर निर्भर करता है.

डेटा के साथ समझिए क्या बदलेगा और क्या नहीं

दरअसल अरावली का फैलाव गुजरात, राजस्थान, हरियाणा होते हुए दिल्ली तक है. इसकी लंबाई करीब 800 किलोमीटर है.

कितनी अरावली पर असर पड़ सकता है?

हरियाणा और राजस्थान में बड़ी मात्रा में अरावली क्षेत्र राजस्व भूमि के रूप में दर्ज है. पहले इन्हें 'जंगल जैसा क्षेत्र' मानकर संरक्षण मिलता था अब राज्य सरकारें तय करेंगी कि ये वन हैं या नहीं. यहीं से लोगों में खतरा पैदा होता है.

दिल्ली की हवा पर क्या असर

अरावली NCR के लिए डस्ट बैरियर के रूप में काम करती है. अगर अरावली क्षेत्र में खनन/कटाई बढ़ी तो PM10 और PM2.5 में तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. दिल्ली-NCR में पहले से खराब AQI और ज्यादा खराब होगा.

पहले के अध्ययन दिखाते हैं कि अरावली के नंगे हिस्सों से उड़ने वाली धूल NCR की सर्दियों की स्मॉग में बड़ा योगदान देती है.

पानी पर असर

अरावली की चट्टानें बारिश का पानी रोकती हैं. धीरे-धीरे जमीन में भेजती हैं. डेटा कहता है कि हरियाणा-राजस्थान बेल्ट पहले से जल संकट में है. ऐसे में अगर अरावली कमजोर हुई तो बोरवेल और नीचे जाएंगे. ट्यूबवेल सूखने की रफ्तार तेज होने लगेगी.

तापमान और जलवायु पर असर

अरावली को NCR का नेचुरल कूलिंग सिस्टम कहा जाता है. अगर कटाई बढ़ी तो Urban Heat Island Effect तेज होगा. गर्मियों में तापमान और ज्यादा ऊपर जाएगा. यानी आसमान आग फेंकेगा.

तो क्या ये फैसला जंगल कटने की गारंटी है?

नहीं. लेकिन ये फैसला एक दरवाजा जरूर खोलता है. अब सब कुछ निर्भर करेगा कि राज्य सरकार रिकॉर्ड कैसे तय करती है. पर्यावरण मंजूरी कितनी सख्त रहती है. विकास बनाम संरक्षण का संतुलन कैसे रखा जाता है.

सवाल वही- अरावली बचेगी या कटेगी?

जवाब- अब कोर्ट से ज्यादा सरकारों के फैसलों पर निर्भर करता है कि अरावली कटेगी या बचेगी.
Source -

30/09/2025

दिन-1/ Day-1 (0830 IST of 30-09-2025 to 0830 IST of 01-10-2025)

*मेघगर्जन/वज्रपात होने की संभावना*

बांदा, चित्रकूट, कौशाम्बी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी, ललितपुर एवं आसपास के इलाकों में।

*तेज झोकेंदार हवाएँ (30-40 किमी/घंटा) चलने की संभावना*
बांदा, चित्रकूट, कौशाम्बी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी, ललितपुर एवं आसपास के इलाकों में।

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