Anyonya Mitra Sanstha
पिसता बचपन
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बच्चों को हम
भगवान की देन मानते हैं,
अपनी जीवन-बगिया में
बच्चों की किलकारी चाहते हैं।
वे बच्चे जो प्यार का पर्याय हैं,
वे बच्चे जो हमारा अरमान हैं,
जिनके अन्तर में छिपीं हैं
अनेक आशायें,
आँखों में जिनकी
सपने सजे हैं।
आज हम कितनी बेरहमी से
मिटा रहे हैं
उनके सपनों को,
उनकी आशाओं को।
उम्र जो है खेलने की
उसको घर-गृहस्थी में
लगा रहे हैं।
करके मेहनत मजदूरी
घर वालों को पाल रहे हैं।
उनींदी आँखों में सपने,
दिल में उमंग लिए,
निकल पड़ते हैं
हाथ में रोटी पाने के
औजार लिए।
हर कदम के नीचे कुचलते
अपना बचपन,
हर साँस में मिटाते
अपना जीवन।
खो गई बालपन की हँसी
इन पसाने की बूँदों में छलक कर।
जिनके लिए पढ़ना, खेलना
एक छलावा है,
जिन्दगी का हर सुख
एक दिखावा है।
एक दिखावा हम भी कर रहे हैं,
एक छलावा हम भी दे रहे हैं,
नारों और लेखों के सहारे
मिटाना चाहते हैं
उनके अँधियारे।
चन्द सिक्के मासूम हाथों में रख
कर्तव्य की इतिश्री करते हैं।
बाद इसके लग जाते हैं
अपने परिवार का भविष्य बनाने को,
छोड़ देते हैं मासूम बचपन
फिर यूँ ही भटक जाने को।!!!
Dr. Kumarendra Singh Sengar ..
21/11/2012
DEDICATED TO ALL,WHO LOST THEIR LIVES IN "MUMBAI TERROR ATTACK" finally justice prevailed
One - Parikrama (Unofficial Video) Parikrama was formed in 1991 a.d. and since have been quite active in the Indian Rock Industry.With over a 2500 shows and more then 10 million downloads from...
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