Sahitya Dil Tak
28/01/2023
बेहतरीन
तू गहरे पानी में हाथ न छुड़ाता,
तो मुझे कभी भी तैरना न आता
गर जानता सब नमक लिए बैठें हैं
मैं अपने ज़ख़्म किसी को न दिखाता
बात तो अपने ज़मीर की है भाई
छल फरेब करना किसे नहीं आता
जिस पाप की दौलत पे ग़ुरूर है तुझे
गर मेरे पास होती तो डूब के मर जाता
इक शायर ही ऐसा हुनर रखता है
धुनता है जब तो हाथ नहीं लगाता
सब पूछ रहे थे मेरी चुप्पी का सबब
मैं किस किस से तेरा नाम छुपाता
गिरने का मतलब हार नहीं होता
हारता तो वो है जो उठ नहीं पाता
वो रंक हो कोई या राजा कहीं का
वक़्त उंगलियों पे किसे नहीं नचाता
कुछ ग़लत यकीनन किया होगा तूने
यूं ही कोई किसी से आंख नहीं चुराता
मेरे घर की तो नींव ही कमज़ोर थी
वरना तूफान उसे इस तरह न गिराता
उठ गए सब "राज " जब आई मेरी बारी
वरना मैं गज़ब के शेर सुनाता
राजिंदर सिंह ' बग्गा '
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Website
Address
Chakarpur
Khatima
262308