Chitrakoot

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17/05/2026

अनाथों के नाथ, कामतानाथ स्वामी मुझ पर अपनी दृष्टि बनाए रखना। कहीं भटक जाऊं तो रास्ता दिखाना, मेरा एक मात्र सहारा तू ही है, ऐसा भाव रख कर दर्शन करिए श्री कामतानाथ जी महाराज का ।

05/05/2026

आज बङे मंगलवार के दिन पहाड़ी क्षेत्र में स्थित नांदी गांव में मौजूद दक्षिणमुखी नांदी के हनुमान जी के दर्शन । जहां लगता है सिर्फ देशी घी से बने हुए लड्डूओ का भोग। ऐसी मान्यता है कि नांदी के हनुमान जी शुद्ध देसी घी के बने लड्डू बहुत पसंद करते हैं, मंदिर समिति और भक्त इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि मंदिर में शुद्ध लड्डूओ का ही भोग लगें ।इस शुद्धता को बनाये रखने के लिए मंदिर समिति खुद अपनी रसोई चलाती है और वही से प्रसाद वितरण होता है। इस छोटे से गांव में स्थित हनुमान जी के दर्शन करने बहुत दूर दूर से लोग आते हैं। तो बोलिए
संकट कटै मिटे सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

02/05/2026

मैं गुरूदेव के बारे में क्या कहूं, वो संत शिरोमणि त्याग और तप के साक्षात मूर्ति थे। जानकी सम्प्रदाय के और श्री राम और जानकी जू के साक्षात उपासक । ऐसे संतों का शिष्य होना एक उपाधि और वरदान की तरह ही है । भौतिक युग में माया महाठगिनी है, फिर भी क्या गृहस्थ, क्या संन्यासी साधू सब उसकी चाकरी में ही व्यस्त हैं, भगवान की माया अच्छे अच्छे को नचाती हैं, पर राम नाम की खेवन और प्रभु को ही आसरा मानने वाले लोग इस भवबंधन से निकल आते हैं। श्री गुरुदेव महाराज श्री श्री सिया वल्लभ दास भी महाराज ऐसे ही संत हैं, अपने जीवन में महाराज श्री ने न एक कमरा बनाया, न एक पैसा रखा, दक्षिणा का सारा पैसा मुक्त भाव से साधु संतों में फटाफट बांट दिया। तन पर जो कपङा आप देख रहे हैं यही उनकी कुल संपत्ति थी, दो धोती। एक को ओढ़ लिया दूसरे को पहन लिया। अपने शिष्यों को राम नाम का मंत्र जपने का ही उपदेश देते थे, उनके गये हुए पूरे दस साल बीत गए हैं, पर उनके उपदेश उतने ही सार्थक है । आइये हम सब मिलकर जपते हैं..... राम, राम, राम

Photos from Chitrakoot's post 28/04/2026

देख रहे हो विनोद, कैसा ड्रामा चल रहा है, आरोग्य धाम में मंदाकिनी को कैसे बचाया जाए इस पर संगोष्ठी चल रही है, जबकि आरोग्य धाम की पूरी बिल्डिंग नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल बोर्ड के नियमों के विपरीत बनी हुई है, पर्ण कुटी नाम का होटल जो दीनदयाल शोध संस्थान का ही एक व्यावसायिक उपक्रम है मंदाकिनी नदी के किनारे बना हुआ है, मंदाकिनी में इस होटल समेत पूरे दीनदयाल शोध संस्थान का अपशिष्ट जाता है, सिया राम कुटीर जहां आरोग्य धाम के समस्त अधिकारी रहते हैं वहां भी गंगा के तट पर अनाधिकृत रूप से मंच बना हुआ है, मंदाकिनी में आंशिक रूप से २००५ में डैम बना कर पानी को रोक कर ऊंचा उठाया गया ताकि वहां स्वीमिंगपूल जैसा बन सके जिससे नदी की अविरलता को नुक़सान पहुंचा। अब मंदाकिनी को स्वच्छ निर्मल और अविरल बनाने की बातें चल रही है, जिनके पास न कोई विजन है न नीति वो बस सरकारी पैसे को पचाने के लिए जुगाली कर रहे हैं और कुछ नहीं।

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