The Urban Rishi
प्रेत आएगा
किताब से निकाल ले जाएगा प्रेमपत्र
गिद्ध उसे पहाड़ पर नोच-नोच खाएगा
चोर आएगा तो प्रेमपत्र चुराएगा
जुआरी प्रेमपत्र पर ही दाँव लगाएगा
ऋषि आएँगे तो दान में माँगेंगे प्रेमपत्र
बारिश आएगी तो
प्रेमपत्र ही गलाएगी
आग आएगी तो जलाएगी प्रेमपत्र
बंदिशें प्रेमपत्र पर ही लगाई जाएँगी
साँप आएगा तो डँसेगा प्रेमपत्र
झींगुर आएँगे तो चाटेंगे प्रेमपत्र
कीड़े प्रेमपत्र ही काटेंगे
प्रलय के दिनों में
सप्तर्षि, मछली और मनु
सब वेद बचाएँगे
कोई नहीं बचाएगा प्रेमपत्र
कोई रोम बचाएगा,कोई मदीना
कोई चाँदी बचाएगा, कोई सोना
मैं निपट अकेला
कैसे बचाऊँगा तुम्हारा प्रेमपत्र।
-बद्रीनारायण
लोग मरे जा रहे भाई...अब 9 बजे फिर से रिव्वु करेंगे।
13/09/2025
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चलो चलें
इस बार किसी जंगल मे नहीं
किसी पहाड़, समंदर में नहीं
अपने भीतर, अपने अंदर चलें
चलो चलें।
चलो चलें
की बहुत ढूंढ लिया बाहर,
भटक भी लिया
नदी में बह भी लिया
पहाड़ से कूदे भी,
जंगल के सन्नाटों में
खुद की धड़कनें भी सुन ली...
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#भृगुऋषि
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Karnal
23/12/2025