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30/01/2026
उच्चतम न्यायालय ने 'यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026' की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इन नियमों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने पाया कि इन विनियमों की शब्दावली अस्पष्ट है और इनके दुरुपयोग की गंभीर संभावना है। न्यायालय ने विशेष रूप से विनियम 3(c) और 3(e) के बीच विरोधाभास पर सवाल उठाया, जहाँ 'जाति-आधारित भेदभाव' और सामान्य 'भेदभाव' को अलग-अलग परिभाषित किया गया है, जबकि उपचार की प्रक्रिया दोनों के लिए समान है। पीठ ने यह भी चिंता जताई कि इन नियमों में अति-पिछड़ा वर्गों (EBC/MBC) का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। सबसे गंभीर आपत्ति विनियम 7(d) में प्रयुक्त 'पृथक्करण' (Segregation) शब्द पर ली गई, जिसे कोर्ट ने संविधान की प्रस्तावना में निहित बंधुत्व की भावना और 'समानता के अधिकार' के विरुद्ध माना। इसके अतिरिक्त, 2012 के नियमों से 'रैगिंग' जैसे महत्वपूर्ण विषय को हटा दिए जाने को न्यायालय ने एक प्रतिगामी कदम बताया है। इन कानूनी विसंगतियों को देखते हुए अदालत ने चार प्रमुख संवैधानिक प्रश्न निर्धारित किए हैं और केंद्र सरकार व यूजीसी से जवाब तलब किया है।
केस टाइटल: राहुल दीवान और अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य (Rahul Dewan and Ors. vs. Union of India & Ors.)
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