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01/01/2026
उदयपुर राजमहल
28/12/2025
ठाकुर कुशाल सिंह अऊआ ओर ठाकुर शिवनाथ सिंह जी आसोप दोनों ने 1857 की क्रांति में संपूर्ण मारवाड़ की सेना का नेतृत्व करते हुवे ब्रिटिश सेना और उनके सहयोगियों के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी, बिठोड़ा और चेलावास के युद्धों में उन्हें हराया, और 'चलो दिल्ली, मारो फिरंगी' के नारे के साथ क्रांति का नेतृत्व कर मारवाड़ को स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाया
उन्होंने ब्रिटिश पॉलिटिकल एजेंट कैप्टन मेसन का सिर आउवा किले पर टांग दिया था, जिससे वे मारवाड़ में स्वतंत्रता और राजपूती शौर्य के प्रतीक बन गए
26/12/2025
🔥 अद्भुत शौर्य गाथा: एक वीर जिसने अपना वचन निभाने के लिए दो बार वीर-गति प्राप्त की! 🔥
राजस्थान के इतिहास के पन्नों में एक ऐसी कहानी दर्ज है, जिस पर विश्वास करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन यह सत्य है। एक ऐसा क्षत्रिय वीर जो मृत्यु के उपरांत भी अपना वचन निभाने युद्ध भूमि में लौट आया।
वे थे वीरवर बल्लू जी चांपावत राठौड़।
इनके लिए यह दोहा प्रसिद्ध है:
"जलम्यो केवल एक बर, परणी एकज नार |
लडियो, मरियो कौल पर, इक भड दो दो बार ||"
(अर्थात्: उस वीर ने केवल एक बार जन्म लिया, एक ही स्त्री से विवाह किया, परन्तु अपने वचन (कौल) का निर्वाह करते हुए वह वीर दो-दो बार लड़ता हुआ वीर-गति को प्राप्त हुआ।)
⚔️ स्वाभिमान और पहला वचन:-
जब जोधपुर के कुंवर अमरसिंह राठौड़ को देश निकाला मिला, तब बल्लू जी चांपावत ने विपत्ति में सदैव साथ देने का वचन दिया। उनका स्वाभिमान इतना प्रबल था कि जब नागौर में उन्हें मेंढों की रखवाली का काम सौंपा गया, तो यह कहकर चल दिए कि "मैं विपत्ति में प्राण देने आया था, मेंढे चराने नहीं।"
⚔️ मेवाड़ को दिया दूसरा वचन:-
वे मेवाड़ गए, जहाँ निहत्थे ही शेर का शिकार कर अपनी वीरता सिद्ध की। महाराणा ने प्रसन्न होकर उन्हें एक विशेष घोड़ी भेंट की। इस पर बल्लू जी ने वचन दिया कि "जब भी मेवाड़ पर संकट आएगा, मैं सहायता के लिए अवश्य आऊंगा।"
🚩 पहली वीर-गति (आगरा का किला):-
जब आगरा के किले में अमरसिंह राठौड़ धोखे से मारे गए, तो रानी हाड़ी के सती होने के लिए उनका शव लाना आवश्यक था। अपना पहला वचन निभाने के लिए बल्लू चांपावत आगरा किले में घुस गए। अमरसिंह का शव लेकर उन्होंने अपने घोड़े सहित किले की बुर्ज से छलांग लगा दी। शव को साथियों के हवाले कर, वे शाही सेना को रोकते हुए आगरा में पहली बार वीर-गति को प्राप्त हुए।
🐎 दूसरी वीर-गति (देबारी का चमत्कार):-
इतिहास की सबसे अद्भुत घटना इसके कुछ समय बाद घटी। जब मेवाड़ के महाराणा राजसिंह का औरंगजेब से 'देबारी की घाटी' में भीषण युद्ध हुआ।
रणभूमि में लोगों ने एक चमत्कार देखा! उन्होंने देखा कि वीर बल्लू चांपावत उसी घोड़ी (जो महाराणा ने भेंट की थी) पर सवार होकर भीषण तलवारबाजी कर रहे हैं। आगरा में वीर-गति पा चुका वह योद्धा, मेवाड़ को दिया अपना वचन निभाने के लिए मृत्यु के बाद भी युद्ध लड़ने आया था और देबारी की घाटी में लड़ते हुए दूसरी बार वीर-गति को प्राप्त हुआ।
यह घटना प्रमाण है कि एक क्षत्रिय के लिए उसका 'वचन' देह त्यागने के बाद भी जीवित रहता है।
कोटि-कोटि नमन ऐसे वचनबद्ध वीर योद्धा को! 🙏⚔️
26/12/2025
आसोप का इतिहास कुंपाजी के वंशजों से जुड़ा है, जिन्होंने मारवाड़ की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया, खासकर 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में ठाकुर शिवनाथ सिंह जैसे योद्धाओं ने अंग्रेज़ों और जोधपुर महाराजा का विरोध कर अपनी शौर्य गाथा लिखी।
24/12/2025
राजस्थान के प्रमुख क्षत्रिय राजवंश एवं शासक
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