Daily Navin Kadam

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Photos from Navin Kadam's post 10/02/2023

नवीन कदम न्यूज़ नेटवर्क छत्तीसगढ़ की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं 💐💐💐

30/11/2022

🙏 सादर धन्यवाद परमात्मा 🙏

परमपिता परमेश्वर की असीम अनुकंपा और आप सभी आदरणीयों के स्नेह एवं आशीर्वाद के परिणामस्वरूप 30 नवंबर 2022 को एक और सम्मान प्राप्त हुआ. "स्वामी विवेकानंद सेवा सम्मान-2022" प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था "काव्य कला सेवा संस्थान मोहरनिया, जनपद सीतापुर (उत्तर प्रदेश)" द्वारा प्रदान किया गया है. इस सम्मान के लिए संस्थान के अध्यक्ष आदरणीय श्री अवनीश त्रिवेदी "अभय" जी सहित संस्थान के समस्त पदाधिकारियों का मैं आभारी हूँ। 🙏

सादर
राजेन्द्र सिंह राठौड़
स्थानीय संपादक, नवीन क़दम

07/08/2022

फ्रेंडशिप डे विशेष : "सुख में समधियान अउ दुःख में मितान"

मानव जीवन की जिजीविषा की क्षमता उसके संघर्षशीलता पर विनिहित है। मानव को इसके संघर्ष की राह में कोई हमसफर मिल जाये तो हौसला किसी हिरनी की तरह कुलांचे भरने लगता है। इसी हौसले का एक एहसास होता है दोस्ती या मित्रता। मित्रता, मित्र के हर दुःख-सुख, जय-पराजय के अवसर पर साथ खड़े रहने का नाम। इसी मित्रता में प्रगाढ़ता लाने मानव ने मित्रता के नाम पर कई उत्सवों, रस्मों रिवाजों को परम्परा में शामिल किया है। छत्तीसगढ़ में भी मित्रता निबाहने और इसमें प्रगाढ़ता लाने कई उत्सव या परम्पराएं हैं। आइये इनको जानने का प्रयास करें :-

1. गिंयां: छत्तीसगढ़ में प्रायः "गिंयां " बाल्यावस्था में माता पिता द्वारा समरूप चेहरे-मोहरे वाले बच्चों को आपस में बैठाया जाता है। यह जाति-धर्म से परे होता है। किसी अच्छे अवसर पर दोनों पक्षों द्वारा इसकी तैयारी की जाती है, घरवाले अपने अष्टजनों की आमंत्रित करते हैं। गांव-मोहल्ला के लोगों को भी आमंत्रित किया जाता है। फिर किसी एक के घर दूसरा पक्ष नारियल पुष्प की थाली सजाकर पहुँचते हैं।आंगन में सभी बैठकर पंडित या किसी गणमान्य द्वारा "कृष्ण सुदामा मैत्री" कथा या कोई आशीष वचन सुनते हैं, फिर लाये हुए नारियल को आपस में बदलते हैं। तत्पश्चात प्रसाद बनाया जाता है। ये मित्रता उन बच्चों के जीवन भर और उनके अगले पीढ़ी द्वारा भी निभायी जाती है। इसमें दोनों परिवारों के बीच घनिष्टता बढ़ जाती है।

2. मितान: इसे अक्सर किशोरावस्था या युवावस्था में बैठाया जाता है। जब दो युवा युवतियों में आपस में गाढ़ी मित्रता हो जाती है, तब घर वालों को बताते हैं कि आपस में हम लोग मितान बैठना चाहते हैं। बाँकी सारा रस्म गिंयां की तरह है। कभी-कभी गांव के दो लड़के, जिनमें आपस में नहीं जमती, अक्सर लड़ते-झगड़ते रहते हैं, उनके बीच कडुवाहट ख़त्म कर मित्रता बढ़ाने पालक लोग आपस में उनको मितान बैठा देते हैं। मितान भी जीवनभर व उनके भावी पीढ़ी आपस में इस मित्रता की कद्र करते हैं।

3. महाप्रसाद: छत्तीसगढ़ अंचल के लिए जगन्नाथ पुरी तीर्थस्थल का विशेष महत्व है। अक्सर पुरी का तीर्थाटन किया जाता है। जगन्नाथ मंदिर में वितरित "महाप्रसाद" (जो पका हुआ चावल दाल होता है) को घर लाते हैं और आपस में उस प्रसाद की अदला-बदली कर महाप्रसाद बैठा जाता है।

4. कर्मा डार: इस अंचल में कर्मा एक प्रमुख उत्सव है। इसमें कलमी वृक्ष के शाखा की पूजा की जाती है। इस शाखा को पवित्र माना जाता है। दो मित्रों द्वारा इस शाखा में से कुछ तोड़कर रख लिया जाता है और आपस में अदला-बदली कर कर्मा डार बैठा जाता है।

5. गंगाजल: तीर्थ के लिए जब गंगा जाते हैं तो वहाँ सर पवित्रजल "गंगाजल" लाते हैं। दो मित्रों द्वारा कांसा के लोटा में दो मित्रों द्वारा गंगाजल लिया जाता है फिर आपस में बदलकर गंगाजल बैठा जाता है।

6. सखी: इसे परिवार बन जाने के बाद बैठा जाता है। ऐसे दो दम्पतियों के बीच, जिनके बच्चों की संख्या सामान हो, यथा दो लड़का-एक लड़की, इनके बीच सखी बैठा जाता है।

छत्तीसगढ़ में इन मित्रता की परिपाटियों को बहुत ही सम्मान दिया जाता है। दो परिवार सुख-दुख के अवसर के लिए घनिष्ट हो जाते हैं और उनकी आने वाली पीढ़ी भी इस रिश्ता को निभाता है। दुःख की बेला में मित्र से अधिकतम सहयोग अपेक्षित होता है। छत्तीसगढ़ में एक कहावत है "सुख में समधियान अउ दुःख में मितान" अर्थात सुख के अवसर पर समधी घर से रिश्ते के लोग आते हैं तो वही मित्र सुख के अवसर पर आये न आये पर दुःख की घड़ी में जरूर आता है। यह मित्रता जाति-धर्म, गरीबी-अमीरी से परे होता है। मित्र को स्वयं ही समझा जाता है, नाम नहीं लिया जाता, जिस परिपाटी में बैठा गया है। वैसा ही संबोधन किया जाता है, यथा गिंयां, मितान, महाप्रसाद आदि। मित्र के रिश्तेदारों को स्वयं के रिश्ते की भांति सम्मान दिया जाता है।

यूँ तो मित्रता के लिए किसी दिन विशेष की आवश्यकता नहीं है फिर भी परिपाटी का सम्मान करते हुए इस "फ्रेंडशिप डे" के अवसर पर आइये हम सब जड़ व चेतन मित्रवत हो जाएं।

सादर
राजेन्द्र सिंह राठौड़
स्थानीय संपादक, नवीन क़दम

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