Desh Disavar
30/05/2022
राजस्थानी रीति रिवाजों की शब्दावली (स वर्ग)
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1.संथारो = जैन संप्रदाय के अनुसार मृत्यु को नजदीक देख माया और ममता के साथ साथ खाना पीना छोड़ कर मृत्यु का वरण।
2.सकरांत = मकर सक्रांति का पर्व।
2.सगाई = कन्या के पिता द्वारा नारियल आदि भेचकर संबंध पक्का करने की रस्म/ मंगनी।
3.सगो-सगी = बेटा या बेटी के ससुराल वाले/ समधी।
5.सतवाड़ो = प्रसव के सातवें दिन प्रसूता का समान या संस्कार।
6.सधवार = गर्भवती स्त्री को गर्भ के सातवें मास में दिया जाने वाला उपहार।
7.सनेसरियो = शनि देव को पूजा करके उसके नाम पर दान लेने वाला व्यक्ति।
8.समेळो = बरात आगमन के तुरंत बाद कन्या पक्ष की ओर से नारियल आदि की दक्षिणा से दूल्हे के आदर सत्कार की एक रस्म।
9.साई = खरीद की जाने वाली जमीन, वस्तु आदि की कीमत का वह अंश जो सौदा तय हो जाने पर अग्रिम दिया जाता है/ पेशगी।
10.सात्यो = ससुराल से पीहर या पीहर से ससुराल आते जाते समय बहन बेटी द्वारा घर की दहलीज पर अंकित की जाने वाली कुमकुम की सात बिंदुओं का समूह।
11.सावड़ = मातृभूमि कृषि की अधिष्ठात्री एक देवी/ फसल काटते समय सांड,बहन-बेटी आदि के लिए छोड़ा जाने वाला फसल का भाग/ फसल बोते समय किसानों द्वारा अन्न की देवी स्यावड़ की स्तुति।
12.सावो = विवाह का शुभ मुहूर्त/ पाणिग्रहण संस्कार की तिथि व समय निश्चित कर कन्या पक्ष की ओर से वर पक्ष को भेजे जाने वाला निमंत्रण।
13.सासूबाड़ो = दहेज के समय कन्या पक्ष की ओर से वर की माता को दी जाने वाली पोशाक।
14.सिंझारो/सुंधारो = श्रावण कृष्णा तृतीया के पर्व से पूर्व कन्या या वधू के लिए भेजा जाने वाला सामान।
15..सिरपाव = सिर से पांव तक पहनने के वस्त्र आदि जो राजा बादशाह द्वारा सम्मान में दिए जाते थे।
16..सिरै रो कुरब = जोधपुर महाराज द्वारा अपने सामंतों को दिया जाने वाला सम्मान।
17.सीख = बहन बेटी या दामाद को विदाई के समय दिया जाने वाला द्रव्यादि/एक लोकगीत।
18.सीरणी = किसी गुरु या इष्ट को मानकर चढ़ाया जाने वाला प्रसाद।
19.सीळीसातम/बासीड़ा = चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी जिस दिन शीतला देवी की पूजा होती है।
20.सुदाय = यज्ञोपवीत संस्कार के लिए प्रस्तुत ब्रह्मचारी को दी जाने वाली भिक्षा।
21.सुहागथाळ = भोजन का थाल जिसमें कुछ सुहागिन स्त्रियां नवागंतुक वधू के साथ भोजन करती हैँ।
22.सुहागबीड़ो = दूल्हे के स्वागत के समय वधू पक्ष की स्त्रियों द्वारा दी जाने वाली पान की गिलोरी।
23.सूंखड़ी = खलिहान से ब्राह्मण, साधू आदि को दिया जाने वाला अनाज।
24.सूंज = विवाह के समय तथा प्रथम प्रसव के बाद विदाई के समय लड़की को दिया जाने वाला वस्त्र आभूषण आदि।
25.सूतक = प्रसूता अवधि/ मृत्यु के कारण होने वाला है अशोच।
26.सूतकाळो = किसी की मृत्यु के नौवें दिन परिवार एवं संबंधियों द्वारा किया जाने वाला सामूहिक स्नान।
27.सेवरो = विवाह के समय सिर पर बांधा जाने वाला सेहरा/ विवाह की एक रस्म जो विवाह मंडप में कन्या के भाई या मामा द्वारा वर के सामने की जाती है।
28.सोट = गोडवाड़ में बच्चे के जन्म के बाद प्रथम होली पर बांटा जाने वाला एक प्रकार का खाजा।
29.सोभाड = वह स्त्री या कन्या जो किसी विवाहित कन्या के प्रथम बार ससुराल जाते समय साथ भेजा जाता है।
30.सोगाळो = मेवाड़ में मृतक के पीछे की जाने वाली एक रस्म।
31.हंतकार = पितरों के उद्देश्य से ब्राह्मण आदि को दी जाने वाली रोटी।
32.हथळेवो = विवाह में वधू का हाथ वर के हाथ में पकड़ने की एक रस्म/ पाणिग्रहण संस्कार।
33.हलांणो = प्रथम प्रसव के बाद कन्या को दिया जाने वाला सामान व विदाई।
34.हांती = विवाह एवं पर्व आदि विशिष्ट अवसरों पर बने भोजन विशेष का अंश जो संबंधियों व मिलने वालों के घर बांटा जाता है।
35.हीड़ = दीपावली की संध्या को बच्चों द्वारा मनाया जाने वाला उत्सव।
36.हूंडी = सेठ साहूकार या व्यापारियों द्वारा लिखा जाने वाला भुगतान पत्र
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डॉ. भरत ओला
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