Choubey study zone
07/03/2026
सनातन धर्म में आठ चिरंजीवी (अष्ट चिरंजीवी) माने जाते हैं, जिन्हें वरदान या श्राप के कारण कलयुग के अंत तक जीवित माना जाता है। ये 8 महान आत्माएं हैं: अश्वत्थामा, राजा बलि, वेदव्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और ऋषि मार्कण्डेय। इन्हें प्रतिदिन याद करने से आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
• अष्ट चिरंजीवी के नाम और कारण:
1 हनुमान: माता सीता से अमरता का वरदान प्राप्त।
2 परशुराम: भगवान विष्णु के छठे अवतार।
3 विभीषण: भगवान राम से वरदान प्राप्त।
4 महर्षि व्यास: वेदों के रचयिता।
5 अश्वत्थामा: भगवान कृष्ण द्वारा युगों तक भटकने का श्राप (महाभारत)।
6 राजा बलि: भगवान विष्णु ने पाताल लोक का राजा बनाया।
7 कृपाचार्य: कौरव-पांडवों के गुरु।
8 ऋषि मार्कण्डेय: शिवजी के आशीर्वाद से 16 वर्ष की आयु में अमरता प्राप्त।
इन चिरंजीवियों के अस्तित्व को भारतीय पौराणिक मान्यताओं में विश्वास के साथ जीवित माना जाता है, जो कलियुग में भी धर्म के रक्षक हैं।
Choubey study zone fans
28/02/2026
🕉️ नवगुंजरा – अद्भुत दिव्य स्वरूप
नवगुंजरा भारतीय पौराणिक परंपरा का एक अद्भुत दिव्य प्राणी है, जिसका वर्णन विशेष रूप से ओड़िया महाभारत में मिलता है। यह नौ भिन्न जीवों के अंगों से बना एक समग्र रूप है। कथा के अनुसार, वनवास के समय पांडवों में से अर्जुन का सामना इस रहस्यमय स्वरूप से हुआ।
जब अर्जुन ने उस विचित्र प्राणी को देखा, तो वे चकित और सावधान हो उठे। उन्होंने अपना गांडीव धनुष उठा लिया। उसी क्षण एक दिव्य वाणी गूंजी — “जिसे तुम कल्पना नहीं कर सकते, उसे यह ब्रह्मांड रच सकता है।” तब अर्जुन को अनुभूति हुई कि यह कोई साधारण जीव नहीं, अपितु स्वयं कृष्ण का विराट रूप है। वे विनम्र होकर उस दिव्य स्वरूप के आगे नतमस्तक हो गए।
नवगुंजरा नौ प्राणियों का संयुक्त रूप है — परंपरानुसार इसमें मुर्गे का सिर, मोर की गर्दन, बैल का कूबड़, सिंह की कमर, हाथी का पैर, बाघ का पैर, हिरण का पैर, साँप की पूँछ और मनुष्य का हाथ सम्मिलित बताए जाते हैं। यह विविधता में एकता का गहन प्रतीक है।
यह कथा हमें सिखाती है कि सृष्टि के प्रत्येक रूप में एक ही दिव्य चेतना व्याप्त है। भिन्नता केवल बाहरी है, अपितु मूल तत्व एक ही है। नवगुंजरा का दर्शन अर्जुन के लिए आत्मज्ञान का क्षण था — यह समझ कि सम्पूर्ण सृष्टि एक ही परम तत्व की अभिव्यक्ति है।
यह कथा परस्पर जुड़ाव, विनम्रता और उस दिव्यता की अनुभूति का संदेश देती है, जो समस्त सृजन में व्याप्त है। विविध रूपों से युक्त यह जगत अंततः एक ही परम सत्य की अभिव्यक्ति है।
नमामीशमीशान
#नवगुंजरा
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Contact the school
Telephone
Address
303/1 Sai Parisar New Ram Nager Adhartal
Jabalpur
482004