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19/09/2021

'वेब पत्रकारिता' का ककहरा

#डॉअर्पणजैनअविचल #वेबपत्रकारिता

14/08/2021

आज़ादी के अमृत महोत्सव की मंगलकामनाएँ
डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'
(राष्ट्रीय अध्यक्ष, मातृभाषा उन्नयन संस्थान, भारत)
www.arpanjain.com
#आज़ादी #स्वाधीनतामहोत्सव #अमृतमहोत्सव #स्वतंत्रता #स्वतंत्रतादिवस #डॉअर्पणजैन #हिन्दीग्राम #मातृभाषा #अर्पणजैन

*राष्ट्र का यौवन और स्वाधीनता पर्व*

◆ *डॉ. अर्पण जैन अविचल*

दुश्मनों की तमाम चालों को विफ़ल करते हुए मंगल पांडे और खुदीराम बोस से लेकर भगत, आज़ाद, राजगुरु, सुभाष, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, तिलक, महात्मा गाँधी, सरदार पटेल आदि से लेकर स्वतंत्रता संग्राम के साक्षी कोटिशः भारतीयों के अमर बलिदान और निःस्वार्थ राष्ट्रयज्ञ की आहुतियों के प्रबल पुण्य प्रताप से भारत के स्वाभिमान की अक्षुण्ण स्थापना का स्वप्न अगस्त माह की चौदह तारीख़ की मध्यरात्रि में पूर्ण हो पाया है और पंद्रह तारीख़ की सुबह भारत ने आज़ाद सुबह का सूरज देखा। निश्चित तौर पर उस क्षण का ध्यान मात्र भी रोमांच को अगणित गुना करके प्रत्येक भारतवंशी को रोमांचित कर देता है। आज भारत की स्वाधीनता अपने यौवन में पदार्पण करते हुए पचहत्तर वर्षीय अमृत महोत्सव मना रही है। इस स्वाधीनता संग्राम के साक्षी समय ने भी हरकारे की भूमिका का निर्वहन कर राष्ट्र देव की आराधना करते हुए यौवन में प्रवेश किया है।
बीते पचहत्तर वर्षों में भी राष्ट्रवासियों ने परम वैभव की स्थापना के लिए सैंकड़ो संघर्ष किए हैं और आज भी कई संघर्ष जारी हैं, जैसे अंग्रेज़ी क़ानून से छुटकारा, अंग्रेज़ियत और अंग्रेज़ी संस्कृति से मुक्ति के लिए संघर्ष, हिन्दी भाषा की राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापना, ग़रीबी, अशिक्षा और अनाचार से मुक्ति के लिए संघर्ष, भ्रष्टाचार, पथभ्रष्टता और मातृशक्ति के वाचिक बलात्कार से मुक्ति यानी माँ-बहनों की गालियों से मुक्ति कर सभ्य भारत के निर्माण के लिए संघर्ष, सशक्त और स्वस्थ भारत का नवनिर्माण, आर्थिक रूप से समृद्ध भारत की स्थापना और ऐसे बीसियों संघर्ष वर्तमान में भी लगातार जारी हैं, जिनका उद्देश्य राष्ट्र के यौवन की प्रबल ऊर्जा को प्रारब्ध के पुण्योदय से उत्कर्ष के शिखर तक पहुँचाना है।

पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी लिखते हैं कि 'भारत एक भूमि का टुकड़ा नहीं बल्कि जीता जागता राष्ट्रपुरुष है',
इससे परिलक्षित होता है कि राष्ट्र एक जनसमूह का शोर नहीं बल्कि जनमानस की भावनाओं और संवेदनाओं के कंधे पर संवार जागरण की ऊर्जा का स्त्रोत है।
राष्ट्र अपने यौवन में प्रवेश तो कर रहा है किंतु अब राष्ट्रवासियों को भी अपने कर्त्तव्यों को ध्यान में रखकर कार्य करना होगा। आज़ादी केवल हक़ ही नहीं बल्कि ज़िम्मेदारी भी है।
आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे भारतीयों की कर्त्तव्यनिष्ठा और प्रतिबद्धता की परीक्षा की घड़ी भी है।
हमने कई युद्ध, महामारी, कोरोना, आपातकाल, आर्थिक आपातकाल, सीमा पर तनाव भी देखे हैं तो गृह युद्ध का त्रास भी झेला है। किन्तु अब समय, समझदारी से राष्ट्रयज्ञ करने का है। भारत के नागरिक बेहद संजीदा और ज़िम्मेदार हैं। हम अपनी कर्त्तव्यनिष्ठा का महोत्सव भी मनाना जानते हैं तो जागरुकता और ज़िम्मेदारी का टीका लगवाने से भी नहीं चूकते। इसीलिए यह राष्ट्र अन्य राष्ट्रों की तुलना में शीघ्रता से प्रगतिपथ पर अग्रसर है। आज राष्ट्रवन्दना के त्यौहार पर हम सभी संकल्प लें कि सदैव हक़ माँगने के साथ-साथ अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वहन भी करेंगे तभी राष्ट्र उन्नति के उत्तुंग शिखर पर सफलता का जयघोष कर सकेगा।

*आज़ादी के अमृत महोत्सव की मंगलकामनाएँ*

*डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'*
(राष्ट्रीय अध्यक्ष, मातृभाषा उन्नयन संस्थान, भारत)
www.arpanjain.com

#आज़ादी #स्वाधीनतामहोत्सव #अमृतमहोत्सव #स्वतंत्रता #स्वतंत्रतादिवस #डॉअर्पणजैन #हिन्दीग्राम #मातृभाषा #अर्पणजैन #दिल्ली #अर्पण

14/06/2020

*एक युद्ध-अवसाद के विरुद्ध*

✍🏻 *डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'*

सम्पूर्ण विश्व में हाहाकार मचा हुआ है, कोविड 19। कोरोना अपना कहर बरपा रहा है। देश में लगभग 80 दिनों से लॉक डाउन है, कामकाज ठप्प है, कोरोना से बचना है, घर पर रहना है, इन्हीं हालातों में कामकाजी और नौकरीपेशा भी रोटी की तलाश में हैं। आर्थिक संकट हर दिशा में है, मानसिक अवसाद बढ़ने लगा है, लोग आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं। ऐसे काल में व्यक्तिशः जागरुकता आवश्यक है। हमें ज़िन्दगी को फिर से पटरी पर लाने के लिए लड़ना होगा, शुरुआत करनी होगी, नई शुरुआत आवश्यक है। मान लीजिए, जब आपने अपने काम की पहली शुरुआत की थी या फिर नौकरी की पहली शुरुआत की थी तो कैसे संकटों का सामना किया था, बस उसी को आधार मानकर फिर से शुरुआत कीजिए। यदि कर्ज़ है तो भी चिंता मत कीजिए, जितना कर्ज़ है यदि वो एक साल में दोगुना भी हो गया तो भी एक नहीं दो नहीं तीन या चार साल में समाप्त हो जाएगा, पर यह तब होगा जब हम ज़िन्दा रहेंगे। यदि कोरोना या अवसाद से हार गए तो कर्ज़, तकलीफ़ के साथ एक बदनामी परिवार के लिए भी छोड़ जाएँगे।
कम से कम अवसाद को ख़ुद पर हावी न होने दें, अपनी समस्याएँ साझा करें, अपने ख़ास मित्रों तक ज़रूर बताएँ कि क्या समस्या है? कैसे निपटेंगे? आदि। कभी अवसाद को मन पर हावी न होने दें, इससे आप हारेंगे नहीं बल्कि जिएँगे। जब हम ज़िन्दा रहेंगे तो हर समस्या से जूझकर समाधान तक ले आएँगे, पर हम ही न रहे तो फिर परिवार कैसे जिएगा!
अपना और अपने परिवार का सोचना होगा, हारना नहीं बल्कि जीतने के लिए मेहनत करनी होगी।
मातृभाषा उन्नयन संस्थान विगत 1 जून 2020 से *एक युद्ध अवसाद के विरुद्ध* अभियान संचालित कर रहा है, जिसके माध्यम से हमारी मानवीय ज़िम्मेदारी है कि लोगों को अवसाद में जाने से बचाएँ। तनावमुक्ति हेतु प्रयास करें, और लोगों को सकारात्मक रखने का प्रयास करें। इसी अभियान में संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन 'अविचल', राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य एवं ओज के कवि मुकेश मोलवा जी, राष्ट्रीय सचिव गणतंत्र ओजस्वी जी, शिखा जैन जी, भावना शर्मा जी, कवि हिमांशु भावसार जी आदि सुधिजन सतत प्रयासरत हैं। हर सम्भव मदद कर रहे हैं, तनाव मुक्ति के लिए प्रयासरत हैं। आप भी जुड़ें, अपने आसपास के लोगों को अवसाद से मुक्त करने के लिए जुटे, उन्हें तनाव से बाहर निकालने का प्रयास करें। निश्चित तौर पर हम यह जंग भी जीतेंगे। मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास।
जय हिन्दी!

*डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'*
अध्यक्ष- मातृभाषा उन्नयन संस्थान
www.arpanjain.com
09893877455
#मातृभाषा #एकयुद्धअवसादकेविरुद्ध #हिन्दीग्राम

संकल्प पत्र – हिन्दी ग्राम 20/04/2020

*एक युद्ध- कोरोना के विरुद्ध*

जहाँ एक ओर सम्पूर्ण विश्व कोरोना महामारी की त्रासदी को झेल रहा है, ऐसे में प्रत्येक भारतीय का यह नैतिक दायित्व बनता है कि वे कोरोना को हराने में अपनी भूमिका निभाएँ।
मातृभाषा उन्नयन संस्थान के माध्यम से आप भी संकल्प लीजिए कि घरों में रहकर लॉक डाउन का पूर्णतः पालन करेंगे।

*इस लिंक पर जाकर संकल्प लीजिए*
http://hindigram.com/?page_id=1849

संकल्प लेकर स्क्रीनशॉट 9406653005 व्हाट्सएप्प पर प्रेषित करें और अपना सहभागिता प्रमाणपत्र भी प्राप्त करें।

*** *संकल्प पत्र* ***

मैं.............................. *(अपना नाम बोलना है)*
मातृभाषा उन्नयन संस्थान के माध्यम से प्रण लेता हूँ कि भारत सरकार द्वारा किए गए लॉक डाउन का पूर्णतः पालन करूँगा/ करूँगी।
इस दौरान मैं घर से बाहर नहीं निकलूँगा/ निकलूँगी और कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने हेतु भारत सरकार के सभी निर्देशों का पालन करूँगा/करूँगी।

साथ ही, सामाजिक दूरी यानी सोशल डिस्टेंस बनाए रखते हुए कार्य करूँगा/करूँगी।

कोरोना के बारे में कोई भी अपुष्ट या भ्रामक समाचार प्रेषित नहीं करूँगा/करूँगी।

चिकित्सकों, पुलिसकर्मियों एवं कोरोना योद्धाओं का सम्मान करेंगे, उनके साथ दुर्व्यवहार नहीं करेंगे।
लॉक डाउन खुलने के बाद भी सावधानी बरतेंगे और कोरोना संबंधित किसी भी लक्षण के होने पर चिकित्सकीय परामर्श लेंगे।

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आइये इस महायज्ञ में एक आहुति आपकी भी डालिए

संकल्प पत्र – हिन्दी ग्राम

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