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एक अच्छी और बहुत खुबसूरत कहानी "
🎄🎄जय श्री सीताराम जी 🎄🎄
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कह लंकेस कवन तैं कीसा।
केहि कें बल घालेहि बन खीसा।।
की धौं श्रवन सुनेहि नहिं मोही।
देखेउँ अति असंक सठ तोही।।
मारे निसिचर कहेि अपराधा।
कहु सठ तोहि न प्रान कइ बाधा।
सुनु रावन ब्रह्मांड निकाया।
पाइ जासु बल बिरचति माया।।
जाकें बल बिरंचि हरि ईसा।
पालत सृजत हरत दससीसा।।
जा बल सीस धरत सहसानन।
अंडकोस समेत गिरि कानन।।
धरइ जो बिबिध देह सुरत्राता।
तुम्ह से सठन्ह सिखावनु दाता।।
हर कोदंड कठिन जेहिं भंजा।
तेहि समेत नृप दल मद गंजा।।
खर दूषन त्रिसिरा अरु बाली।
बधे सकल अतुलित बलसाली।।
जाके बल लवलेस तें
जितेहु चराचर झारि।
तासु दूत मैं जा करि
हरि आनेहु प्रिय नारि।।
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🍀🌺🍀🌺लंकापति रावण ने कहा -- अरे वानर ! तू है कौन ? किसके बल पर तूने मेरे वन को उजाड़ कर नष्ट कर दिया? क्या तूने कभी मेरा नाम और यश नहीं सुना? अरे दुष्ट ! मैं देख रहा हूँ कि तू बड़ी हिम्मत से अकड़कर खड़ा है ।तूने कौन से अपराध पर राक्षसों को मारा? अरे मूर्ख ! क्या तुझे अपने प्राणों का भय नहीं है?
हनुमानजी ने कहा -- हे रावण ! सुन ।जिनका बल पाकर माया सभी ब्रह्माण्डों की रचना करती है ।जिनके बल से ब्रह्मा, विष्णु, महेश क्रमशः सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करते हैं; जिनके बल से सहस्त्र मुख वाले शेष जी पर्वत और वनों सहित समस्त ब्रह्माण्ड को सिर पर उठाये रहते हैं; जो देवताओं की रक्षा के लिए अनेक प्रकार के अवतार लेते हैं और जो तुम्हारे जैसे मूर्खों को सही सीख देते हैं; जिन्होंने शिव जी के कठोर धनुष को सहज ही तोड़ डाला और उसी के साथ सम्पूर्ण राजाओं के घमंड को चकनाचूर कर दिया; जिन्होंने खर, दूषण, त्रिशिरा और बालि को मार डाला, जो सभी अतुलनीय बलशाली थे; जिनके लेशमात्र बल से तुमने समस्त चराचर जगत को जीत लिया और जिनकी प्रिय पत्नी श्री जानकी जी को तुम चोरी से हर लाये हो, मैं उन्हीं का दूत हूँ ।
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