HELLO INDORE
*किसी ने पूछा समाज को आगे बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए,*
*एक विद्वान ने जवाब दिया-*
*"टांग के बदले हाथ खींचो,*
*समाज अपने आप आगे बढ़ेगा !!"*
😊😊😊😊😊
*. स्वस्थ रहे, मस्त रहे,आनंद रहे*
🌹 *शुभ प्रभात 🌹
🙏 Good Morning🙏
*मन में शांति नहीं तो अरबों की संपत्ति भी बेकार-*
राष्ट्रसंत ललितप्रभजी जी महाराज ने कहा कि जीवन की सबसे बड़ी दौलत है :
मन की शांति। मन में शांति नहीं है तो अरबों की संपत्ति भी बेकार है। जिनका मन शांत होता है उन्हें दाल रोटी भी अच्छी लगती है, पर जिनके मन में अशांति, चिंता और तनाव है उन्हें छप्पन भोग भी फीके लगते हैं। अगर कुटिया में रहने वाले लोग भी मन से सुखी हैं तो कुटिया में भी स्वर्ग है और मन दुखी है तो राजमहलों में भी नरक है।
उदाहरण देते हुए संत प्रवर ने कहा कि अगर धन-दौलत, जमीन-जायदाद, ऐशो-आराम और भोगविलास में सुख होता तो महावीर और बुद्ध जैसे लोग मूर्ख नहीं थे जो इनका त्याग कर मन की शांति पाने के लिए निकल पड़े।
उन्होंने कहा कि अगर किसी की मृत्यु हो जाए तो उसके पीछे उठावना का कार्यक्रम होता है उसमें सैकड़ों लोग आते हैं और तस्वीर पर फूल चढ़ाते हुए कहते हैं कि भगवान उनकी आत्मा को आत्म शांति दे, क्या कोई यह प्रार्थना करता है कि भगवान उसको सुंदर मकान, सुंदर बीवी, सुंदर बच्चे, सुंदर ऑफिस, ढेर सारी संपत्ति दे, जबकि वह तो जीवन भर इन्हीं सब चीजों के पीछे भागता रहा था और परिणाम यह आया कि वह सब कुछ यहां पर पा चुका, पर मन की शांति पा न चुका तो कम से कम मरने के बाद तो उसे मन की शांति प्राप्त हो जाए। संत प्रवर ने कहा कि मेरे मरने के बाद कोई मेरे लिए आत्मशांति की प्रार्थना न करें क्योंकि मैं जीते जी अपने मन की शांति की व्यवस्था करके जाऊंगा। मुझे नहीं पता कि दूसरों की प्रार्थना करने से मन की शांति मिलेगी या नहीं मिलेगी, पर मैं अपने जीवन को ऐसे जिऊंगा कि मुझे जीते जी मन की शांति उपलब्ध हो जाए। जो जीते जी शांति को प्राप्त कर लेते हैं उन्हें ही मरते समय और मरने के बाद परम शांति नसीब होती है।
मन की पवित्रता पर जोर देते हुए संत प्रवर ने कहा कि मन शांत होने के साथ-साथ पवित्र भी होना चाहिए क्योंकि दूषित मन कभी शांत नहीं हो सकता। जैसे लालटेन का गोला अगर साफ न हो तो प्रकाश बाहर नहीं आ सकता वैसे ही मन अगर पवित्र नहीं है तो हम शांति को प्राप्त नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि रावण का मन अगर पवित्र होता तो वह राम से भी ज्यादा महान बन जाता।
उन्होंने महिलाओं से कहा कि वे दूषित मन वाले लोगों से दूर रहें फिर चाहे वे परिचित भी क्यों न हों। गंदे मन वाले के पास रहने में दिन को 12 बजे भी खतरा रहेगा और पवित्र मन वाले के पास रहने में रात को 12 बजे भी खतरा नहीं है।
मन की शांति पाने के मंत्र देते हुए संत प्रवर ने कहा कि इच्छाओं में न उलझे क्योंकि मन कभी तृप्त नहीं होता और इच्छाएं आकाश के समान अनंत होती है। दूसरे मंत्रों में संत प्रवर ने कहा कि लोड मत लो। जीवन में कुछ भी अच्छा बुरा घट जाए तो उसे सहज रूप से स्वीकार करें।
जीवन में घटने वाली छोटी-मोटी घटनाओं को मन पर हावी न होने दें, जीवन में घट चुके अप्रिय प्रसंग को भूलने की कोशिश करें और रोज अच्छी बातों को सुनने की आदत डालें क्योंकि महापुरुषों की वाणी अग्नि पर जल की फुहार करने की तरह होती है।
शांतिप्रिय सागर ने कहा कि खाली पेट चाय न पिएं क्योंकि इससे 80 तरह के रोग होते हैं। खड़े-खड़े खाने पीने की आदत को बदलें क्योंकि यह हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है।
पानी पीने का तरीका बताते हुए मुनि प्रवर ने कहा कि खाने के 1 घंटे बाद ही पानी पीएं, जब भी पानी पिएं
तो धीरे-धीरे पिएं, सुबह एक गिलास गुनगुना पानी पिएं और गर्मी में मटके का और सर्दी में तांबे के लोटे में रखा जल पिएं।
फ्रिज के पानी से बचें।
कभी भी सिर पर गर्म पानी न डालें, खाने को खूब चबाकर और चूर कर खाएं।
उन्होंने कहा कि सूर्यास्त के बाद खाने की आदत का त्याग करें। जो लोग जल्दी खाना खाते हैं उन्हें पेट और दर्द से जुड़ी तकलीफ कभी नहीं होती है।
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