RJ Navneet
किसी की मदद करने में कोई समस्या नहीं है हमें लेकिन भिक्षा देकर मक्कारी को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता.
इंदौर भिक्षा और भिक्षुक मुक्त है तो ये कहाँ से आ गए? कृपया IMC संज्ञान में ले.
इंदौर, क्या हम बच्चों की जान को हल्के में ले रहे हैं? क्या हम किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहे हैं, अपनी बात दम से प्रशासन के सामने रखने के लिए?”
इंदौर के स्कूल Shishukunj में 100 से ज्यादा बच्चे फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए। खबरों के मुताबिक मेस का खाना खाने और पानी पीने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ी, कई बच्चों को उल्टी, पेट दर्द और बुखार की शिकायत के चलते अस्पताल ले जाना पड़ा।
सवाल सिर्फ इस एक घटना का नहीं है। सवाल यह है कि क्या हम बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और उनके अधिकारों को पर्याप्त गंभीरता से ले रहे हैं? जब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं होती, तब तक क्या हम चुप रहेंगे?
स्कूल हो, हॉस्टल हो, कोचिंग हो या कोई भी संस्थान—जहां बच्चों की जिम्मेदारी दी जाती है, वहां सुरक्षा और गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
बच्चों की सुरक्षा पर आपकी क्या राय है? क्या प्रशासन और संस्थानों की जवाबदेही तय होनी चाहिए? अपनी बात कमेंट में जरूर रखें।
🚨 इन दो बच्चों की मौत का ज़िम्मेदार कौन है? 😔
क्या सिर्फ सिस्टम की नाकामी बच्चों को मानसिक दबाव में डाल रही है? या फिर कहीं न कहीं माता-पिता की बढ़ती उम्मीदें भी उन्हें ऐसे खतरनाक कदम उठाने पर मजबूर कर देती हैं? 💔
यह सवाल आज हर पेरेंट को खुद से पूछना चाहिए। 🙏
जब NEET जैसे एग्जाम दोबारा हो रहे हैं, तब बच्चों पर दबाव बढ़ाने की नहीं, बल्कि उनकी ताकत बनकर खड़े होने की ज़रूरत है। 🤝❤️
उन्हें कहिए —
“डरो मत, एक बार फिर परीक्षा दो। रिजल्ट चाहे जो भी आए, हम तुम्हारे साथ थे, हैं और हमेशा रहेंगे।” 🌈✨
याद रखिए, हमारी सबसे बड़ी पूँजी 💎 हमारे बच्चे हैं, न कि वह पैसा या दौलत जो हमने उनकी पढ़ाई पर खर्च की है।
जिस दिन बच्चों को यह भरोसा हो जाएगा कि उनके माता-पिता हर परिस्थिति में उनके साथ खड़े हैं, उस दिन वे सिर्फ एग्जाम ही नहीं, बल्कि जिंदगी की हर चुनौती जीत लेंगे। 💪❤️
🕯️ एक परीक्षा में असफल होना, जीवन में असफल होना नहीं है।
❤️ अपने बच्चों को नंबरों से नहीं, उनके हो�
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