SANS Technologies

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11/01/2024

*13 वर्षों की यात्रा के हर राही को प्रणाम*

*आज सेंस टेक्नोलॉजीस 13 वर्ष पूर्ण कर गया...*

आनंद इस बात का है कि महज़ एक कमरे और 150 रुपए से शुरू हुई एक यात्रा अपनी सफलता के 14वें वर्ष में प्रवेश करते कर रही है। सॉफ़्टवेयर निर्माण का कार्य आरंभ करते हुए 11 जनवरी 2010 को सेन्स टेक्नोलॉजीस की नींव रखी गई। आप सब का सहयोग, प्यार, स्नेह और समर्पण बना रहा। मुझे गर्व है कि आज प्रगति के कई मानक हमने साथ तय किए। मैं अभिनंदन करता हूँ आप सभी का। आगे भी ऐसा ही प्यार सेंस को दीजिए। ग्राहकों का विश्वास और प्रेम ही सबलता है, हम निरंतर बेहतर सेवाओं के लिए प्रतिबद्ध हैं। जुड़े रहें, मिलकर कीर्तीमान रचेंगे।

सेंस दिवस की हार्दिक शुभेच्छाओं के साथ.....

आपका,
डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'
CEO- SANS Technologies

11/08/2021

*शहीद खुदीराम बोस*

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मात्र 18 वर्ष की अल्पायु में हाथों में गीता लेकर फाँसी पर चढ़ गए, ऐसे युवा क्रान्तिकारी खुदीराम बोस जी को कोटिशः नमन।

*डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'*

#क्रान्तिकारी #खुदीरामबोस #शहीदखुदीरामबोस #अर्पणजैन #डॉअर्पणजैन #मातृभाषा #हिन्दीग्राम

14/08/2020

पासे सभी उलट गए दुश्मन की चाल के
अक्षर सभी पलट गए भारत के भाल के
मंजिल पे आया मुल्क हर बला को टाल के
सदियों के बाद फिर उड़े है बादल गुलाल के...

_स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभेच्छा..._

*डॉ.अर्पण जैन 'अविचल'*
www.arpanjain.com

14/06/2020

*एक युद्ध-अवसाद के विरुद्ध*

✍🏻 *डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'*

सम्पूर्ण विश्व में हाहाकार मचा हुआ है, कोविड 19। कोरोना अपना कहर बरपा रहा है। देश में लगभग 80 दिनों से लॉक डाउन है, कामकाज ठप्प है, कोरोना से बचना है, घर पर रहना है, इन्हीं हालातों में कामकाजी और नौकरीपेशा भी रोटी की तलाश में हैं। आर्थिक संकट हर दिशा में है, मानसिक अवसाद बढ़ने लगा है, लोग आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं। ऐसे काल में व्यक्तिशः जागरुकता आवश्यक है। हमें ज़िन्दगी को फिर से पटरी पर लाने के लिए लड़ना होगा, शुरुआत करनी होगी, नई शुरुआत आवश्यक है। मान लीजिए, जब आपने अपने काम की पहली शुरुआत की थी या फिर नौकरी की पहली शुरुआत की थी तो कैसे संकटों का सामना किया था, बस उसी को आधार मानकर फिर से शुरुआत कीजिए। यदि कर्ज़ है तो भी चिंता मत कीजिए, जितना कर्ज़ है यदि वो एक साल में दोगुना भी हो गया तो भी एक नहीं दो नहीं तीन या चार साल में समाप्त हो जाएगा, पर यह तब होगा जब हम ज़िन्दा रहेंगे। यदि कोरोना या अवसाद से हार गए तो कर्ज़, तकलीफ़ के साथ एक बदनामी परिवार के लिए भी छोड़ जाएँगे।
कम से कम अवसाद को ख़ुद पर हावी न होने दें, अपनी समस्याएँ साझा करें, अपने ख़ास मित्रों तक ज़रूर बताएँ कि क्या समस्या है? कैसे निपटेंगे? आदि। कभी अवसाद को मन पर हावी न होने दें, इससे आप हारेंगे नहीं बल्कि जिएँगे। जब हम ज़िन्दा रहेंगे तो हर समस्या से जूझकर समाधान तक ले आएँगे, पर हम ही न रहे तो फिर परिवार कैसे जिएगा!
अपना और अपने परिवार का सोचना होगा, हारना नहीं बल्कि जीतने के लिए मेहनत करनी होगी।
मातृभाषा उन्नयन संस्थान विगत 1 जून 2020 से *एक युद्ध अवसाद के विरुद्ध* अभियान संचालित कर रहा है, जिसके माध्यम से हमारी मानवीय ज़िम्मेदारी है कि लोगों को अवसाद में जाने से बचाएँ। तनावमुक्ति हेतु प्रयास करें, और लोगों को सकारात्मक रखने का प्रयास करें। इसी अभियान में संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन 'अविचल', राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य एवं ओज के कवि मुकेश मोलवा जी, राष्ट्रीय सचिव गणतंत्र ओजस्वी जी, शिखा जैन जी, भावना शर्मा जी, कवि हिमांशु भावसार जी आदि सुधिजन सतत प्रयासरत हैं। हर सम्भव मदद कर रहे हैं, तनाव मुक्ति के लिए प्रयासरत हैं। आप भी जुड़ें, अपने आसपास के लोगों को अवसाद से मुक्त करने के लिए जुटे, उन्हें तनाव से बाहर निकालने का प्रयास करें। निश्चित तौर पर हम यह जंग भी जीतेंगे। मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास।
जय हिन्दी!

*डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'*
अध्यक्ष- मातृभाषा उन्नयन संस्थान
www.arpanjain.com
09893877455
#मातृभाषा #एकयुद्धअवसादकेविरुद्ध #हिन्दीग्राम

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