OPJS University

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28/07/2023

पूरे यूरेशिया में लोग पैर के लिए समान शब्द बोलते हैं: पेरिस के एक कैफे में चितकबरा, कराची बाजार में पावन (پاؤں), ताजिकिस्तान के पहाड़ों में पोदा। नंबर दो के लिए, हिंदी भाषी कहते हैं कि करो जबकि प्राचीन हित्तियों ने संभवतः दान कहा था।

विद्वान लंबे समय से सहमत हैं कि अंग्रेजी सहित ये सभी भाषाएँ तथाकथित इंडो-यूरोपीय परिवार के सदस्य हैं, जो आज 3 अरब से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती हैं। भाषाएँ एक प्राचीन मातृभाषा साझा करती हैं, लेकिन इस बात पर बहस जारी है कि इसे सबसे पहले किसने बोला और उन्होंने पूरे यूरेशिया में अपनी दूर-दराज की भाषाई विरासत को कैसे मजबूत किया। अब, साइंस में आज प्रकाशित आम जड़ों वाले इंडो-यूरोपीय शब्दों के सबसे बड़े लेकिन विश्वसनीय डेटाबेस को एक साथ लाने वाला एक नया अध्ययन, संभावनाओं को समेटने का दावा करता है: 8000 साल पहले, फर्टाइल क्रिसेंट किसान बोलते थे और इंडो-यूरोपीय वेरिएंट का प्रसार करना शुरू कर दिया था, जिसे खानाबदोश चरवाहे लगभग 2000 साल बाद उठाकर उत्तरी मैदान में ले गए।

अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि नया अध्ययन, हालांकि स्वागतयोग्य है, लंबे समय से चली आ रही बहस को पूरी तरह से हल करने की संभावना नहीं है। ज्यूरिख विश्वविद्यालय के भाषाविद्, जो अध्ययन में शामिल नहीं थे, चुंद्रा कैथकार्ट कहते हैं, "पेड़ की शाखा संरचना और कालक्रम के कुछ पहलू असंभव या असंभव हैं।" फिर भी, उनका कहना है कि अध्ययन के लिए एकत्र किया गया डेटा "वास्तव में, वास्तव में शीर्ष पायदान" है और "कम से कम शोधकर्ताओं की एक पीढ़ी के लिए एक अमूल्य संसाधन" होगा।

13/07/2022

BAMS
Bachelor of Ayurvedic Medicine & Surgery
7988585708

13/04/2022

baisakhi ki badhaiyaan

12/03/2022

नई दिल्ली, एजुकेशन डेस्क। केंद्रीय विश्वविद्यालयों (Central Universities) में पढ़ाने का ख्वाब देखने वाले उम्मीदवारों के लिए बड़ी खुशखबरी है। यूजीसी ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पढ़ाने के लिए अब पीएचडी की अनिवार्यता को खत्म करने की तैयारी कर रहा है। आयोग के इस फैसले के बाद, उन तमाम उम्मीदवारों को मौका मिल सकेगा, जो टीचिंग फील्ड में बेहतर अनुभव रखते हैं, लेकिन सिर्फ डिग्री नहीं होने के चलते वे यूनिवर्सिटी में पढ़ा नहीं सकते। अब आयोग के इस फैसले के बाद से उन सभी विशेषज्ञों को मौका मिल सकेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूजीसी नए और विशेष पदों को सृजित करने की भी योजना बना रहा है, जिनमें शिक्षकों को पढ़ाने के लिए अब Phd की आवश्यकता नहीं होगी। इस मामले में यूजीसी अध्यक्ष जगदीश कुमार के साथ केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपतियों (वीसी) की बैठक के दौरान प्रस्ताव पर चर्चा हुई। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) मौजूदा नियमों को संशोधित करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन करेगा।

15/02/2022

हरियाणा में पीएचडी डिग्री की होगी जांच, ये दस्तावेज न मिलने पर कैंसिल हो सकती है डिग्री
हरियाणा में पीएचडी डिग्री की होगी जांच। अटकी लेक्चरर और प्रोफेसरों की सांस। 171 राजकीय और 97 एडिड कालेजों के शिक्षकों की पीचडी की डिग्री की जांच के आदेश जारी। जांच में कोई खामी या नहीं करने पर प्रिंसिपल की जवाबदेही तय।अंबाला, [उमेश भार्गव]। हरियाणा के सभी राजकीय और राजकीय सहायता प्राप्त कालेजों में कार्यरत सरकारी और एक्सटेंशन लेक्चरर जिन्होंने वर्ष 2009 के बाद पीएचडी की है उनकी डिग्री की जांच के आदेश डायरेक्टर जनरल हायर एजुकेशन पंचकूला ने करने के आदेश जारी कर दिए हैं। जांच का जिम्मा सभी कालेजों के प्रिंसिपल को सौंपा गया है। राजस्थान की पांच प्राइवेट यूनिवर्सिटी का जिक्र विशेषतौर पर करते हुए अन्य प्राइवेट यूनिवर्सिटी से भी डिग्री लेने वाले सभी शिक्षकों की डिग्री की जांच के आदेश दिए गए हैं। इतना ही नहीं जांच में क्या-क्या किया जाना है इसकी सूची भी निदेशालय ने पत्र जारी कर प्रिंसिपल को भेजी है।

साथ ही निर्देश दिए हैं कि इस जांच के लिए कमेटी का गठन किया जाए और संबंधित यूनिवर्सिटी से रिकार्ड एकत्रित कर रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाए। जांच के आदेश जारी होने से सभी कालेजों में कार्यरत लेक्चरर व प्रोफेसर की सांसें अटक गई हैं। करीब डेढ़ साल पहले भी विभाग ने सभी एक्सटेंशन और सरकारी लेक्चरर और प्रो. की पीएचडी के दस्तावेज मांगे थे लेकिन जांच नहीं करवाई गई थी न ही जांच का कोई दायरा तय नहीं किया गया था। फर्जी पीएचडी डिग्री पाए जाने पर एक्सटेंशन लेक्चरर का वेतन घटाए जाने से लेकर हटाने का भी प्रावधान है जबकि नियमित लेक्चरर या प्रोफेसर की पदोन्नति पर रोक लगनी तय है।
अंबाला, [उमेश भार्गव]। हरियाणा के सभी राजकीय और राजकीय सहायता प्राप्त कालेजों में कार्यरत सरकारी और एक्सटेंशन लेक्चरर जिन्होंने वर्ष 2009 के बाद पीएचडी की है उनकी डिग्री की जांच के आदेश डायरेक्टर जनरल हायर एजुकेशन पंचकूला ने करने के आदेश जारी कर दिए हैं। जांच का जिम्मा सभी कालेजों के प्रिंसिपल को सौंपा गया है। राजस्थान की पांच प्राइवेट यूनिवर्सिटी का जिक्र विशेषतौर पर करते हुए अन्य प्राइवेट यूनिवर्सिटी से भी डिग्री लेने वाले सभी शिक्षकों की डिग्री की जांच के आदेश दिए गए हैं। इतना ही नहीं जांच में क्या-क्या किया जाना है इसकी सूची भी निदेशालय ने पत्र जारी कर प्रिंसिपल को भेजी है।

साथ ही निर्देश दिए हैं कि इस जांच के लिए कमेटी का गठन किया जाए और संबंधित यूनिवर्सिटी से रिकार्ड एकत्रित कर रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाए। जांच के आदेश जारी होने से सभी कालेजों में कार्यरत लेक्चरर व प्रोफेसर की सांसें अटक गई हैं। करीब डेढ़ साल पहले भी विभाग ने सभी एक्सटेंशन और सरकारी लेक्चरर और प्रो. की पीएचडी के दस्तावेज मांगे थे लेकिन जांच नहीं करवाई गई थी न ही जांच का कोई दायरा तय नहीं किया गया था। फर्जी पीएचडी डिग्री पाए जाने पर एक्सटेंशन लेक्चरर का वेतन घटाए जाने से लेकर हटाने का भी प्रावधान है जबकि नियमित लेक्चरर या प्रोफेसर की पदोन्नति पर रोक लगनी तय है।

इन पांच यूनिवर्सिटी का किया गया जिक्र

ओपीजेएस यूनिवर्सिटी चुरू

सिंघानिया विश्वविद्यालय झुंझुनू

श्रीधर विश्वविद्यालय झुंझुनू

सनराइज विश्वविद्यालय अलवर

जगदीश प्रसाद जाभरमल इबड़ेवाला विश्वविद्यालय झुंझुनू

नोट:- इनके अलावा अन्य प्राइवेट यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने वालों की भी जांच की बात कही गई है।

क्या तय किया गया है जांच का दायरा
इन विश्वविद्यालयों के अलावा अन्य विश्वविद्यालयों से पीचीडी की डिग्री धारकों की रजिस्ट्रेशन की तारीख और फीस की रसीदें। कोर्स वर्क का समय, तारीख सहित, विभागीय कमेटी द्वारा सिनाप्सिस (सार) अप्रूवल की तारीख, शोध पत्रों का प्रकाशन, पीएचडी करने के दौरान प्रकाशित शोधपत्रों का विवरण वह किस जरनल में है उसका ब्यौरा, पीएचडी के दौरान उसकी पोस्टिंग कहां-कहां रही। शोधकर्ता के गाइड का विषय क्या था और उसकी पोस्टिंग कहां-कहां रही। दो विषय विशेषज्ञ के मूल्यांकन की रिपोर्ट, वाइवा की रिपोर्ट, वाइवा तारीख और पीएचडी नोटिफिकेशन की तारीख और उसकी प्रति मांगी गई है।

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार से सत्यापित होनी चाहिए सभी दस्तावेज

निदेशालय ने यह भी आदेश दिए हैं कि जो रिपोर्ट भेजी जाए और संबंधित दस्तावेज संबंधित यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार द्वारा सत्यापित होने चाहिए या उस व्यक्ति द्वारा जिसे संबंधित यूनिवर्सिटी के वीसी ने नियुक्त किया हो। साथ ही यह भी कहा है कि यदि इस प्रक्रिया में कोई खामी पाई जाती है या वेरिफिकेशन और रिपोर्ट भेजने में कोई खामी पाई गई तो विभाग संबंधित कालेज के प्रिंसिपल को इसका जिम्मेदार मानेगा।

निदेशालय को भेजी जाएगी जांच रिपोर्ट

राजीव गांधी राजकीय कालेज साहा के प्रिसिंपल सतपाल सिंह ने बताया कि विभागीय आदेशों के अनुसार जांच कमेटी का जल्द ही गठन कर दिया जाएगा। 8 फरवरी को आदेश जारी हुए हैं। जांच में जो भी तथ्य उजागर होंगे उनकी रिपोर्ट भी निदेशालय को जल्द भेज दी जाएगी।

Photos from DDD Research Education Center & Your Education Partner's post 29/12/2021
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