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31/12/2021
क्षारीय जल (एल्कलाइन वाटर),खनिज जल (मिनरल वाटर) और अल्कलाइन डाइट ।
क्षारीय जल (एल्कलाइन वाटर) पानी, खनिज जल (मिनरल वाटर )का शोर है। बोतलबंद क्षारीय पानी, मिनरल वाटर जिसमें कृत्रिम रासायनिक खनिज और लवण होते हैं। जो कृत्रिम रासायनिक खनिजों और लवणों को मिलाकर बनाया जाता है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक आम जनता को ऊंचे दामों पर बोतलबंद अल्कलाइन पानी बेचने वाले मिनरल वाटर बेचने वाले लूट रहे हैं। वहीं, आप घर पर आसानी से क्षारीय पानी, मिनरल वाटर बना सकते हैं। इसके साथ ही आप क्षारीय आहार अपनाकर अन्य स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
एक बात का और ध्यान रखें की धरती से निकला पानी या नल का पानी (टेप वाटर ) हमेशा अल्कलाइन रहता है ।हम आरो (RO)वाटर प्यूरीफायर से उसके अल्काइन तत्वों ,खनिज साल्ट को निकाल कर उसे एसिडिक बना देतें हैं । कभी भी 100 mg / lit (PPM) से नीचे का पानी नहीं पीना चाहिए । उसका पीएच लेवल हमेशा 7.35 से 7.45 के बीच रखे ,उससे कम या अधिक ना रखे । हमेशा जब भी प्यूरीफायर के सॉल्ट सेपरेटर मेम्ब्रान ट्यूब बदलवाए तब हमेशा उसकी सेटिंग पीएच लेवल 7.35 से 7.45 के और खनिज साल्ट का कॉन्सेंट्रेशन 100mg/lit. (PPM) के बीच सेट करवाएं.
क्यों की उस पानी में इलेक्ट्रोलाइट भी होते हैं साथ ही पानी में आयरन मेंगनीज ,ज़िंक आदि और अन्य माइक्रो न्यूट्रिएंट खनिज होते हैं । इलेक्ट्रोलाइट शरीर को स्वस्थ रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी मदद से ही शरीर के मुख्य अंग अपना काम ठीक तरह से कर पाते हैं। इलेक्ट्रोलाइट्स सोडियम, पोटेशियम, क्लोराइड, बाई-कार्बोनेट, मैग्नीशियम क्लोराइड आदि का मिश्रण है, जो दिल से लेकर दिमाग और किडनी तक को सुरक्षित रखने का काम करता है ।
इलेक्ट्रोलाइट शरीर को स्वस्थ रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी मदद से ही शरीर के मुख्य अंग अपना काम ठीक तरह से कर पाते हैं। किसी भी तत्त्व जैसे ज़िंक ,मेगनीज ,पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन या सोडियम आदि एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं। ऐसे में किसी एक का स्तर घटने या बढ़ने से सभी असंतुलित होने लगते हैं। जिसका शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है ।
हालांकि भारतीय आरओ वाटर प्यूरीफायर कंपनियां टीडीएस का स्तर ८० -१५० पीपीएम के बीच आदर्श मानती हैं । । यदि आप आरओ वाटर प्यूरीफायर का उपयोग कर रहे हैं तो सुनिश्चित करें कि शुद्ध पानी का टीडीएस स्तर ८० मिलीग्राम/लीटर(पीपीएम) से कम नहीं हो ।टीडीएस स्तर ८० मिलीग्राम/लीटर(पीपीएम) से नीचे का पानी पीने के लिए स्वीकार्य नहीं है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के अनुसार, पानी में टीडीएस स्तर की ऊपरी सीमा ५०० पीपीएम है निचला स्तर २०० पीपीएम है । जबकि वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन )(डब्ल्यूएचओ) द्वारा अनुशंसित आदर्श टीडीएस स्तर ३०० मिलीग्राम/लीटर(पीपीएम) है।
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