ASC Astrro Science

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29/10/2025

बृहस्पति खाना नंबर 10 (नीच)
दसवें घर का नीच बृहस्पति चौथे सूर्य से संचालित होता है —
वह मिट्टी (ख़ाक) से सोना बनता है, लेकिन चौथे शनि से वह गल (नष्ट) जाता है।सूखा पीपल, धन का नुकसान, शिक्षा का अंत —
जब बुरा असर हो, तो नदी या दरिया में तांबे के सिक्के प्रवाहित करना लाभकारी उपाय है।)

जब गुरु दसवें घर में होता है, तो वह स्वर्ग लोक के कामों से जुड़ा होता है।
लेकिन यदि व्यक्ति लालच में फँस जाए, तो उसे न धन मिलता है, न शांति (माया भी नहीं, राम भी नहीं)।

जब गुरु शनि के घर (मकर) में आता है, तो उसकी सांस तक शनि पर निर्भर हो जाती है —
कोई ग्रह उसका साथ नहीं देता, केवल शनि ही उसका सहारा होता है।

ऐसे व्यक्ति का वस्त्र गंदा, जीवन राख-भरे भंडार जैसा हो जाता है।
गुरु की इज़्ज़त और संसार का सुख – दोनों शनि की इच्छा पर निर्भर रहते हैं।

अगर चौथे, पाँचवें घर में शनि, रवि (सूर्य), बुध, शुक्र या राहु हो,
तो व्यक्ति के कर्म और बुध्दि पर नकारात्मक असर पड़ता है — सुध (सुधार) की गुंजाइश नहीं रहती।

दसवें घर का नीच बृहस्पति चौथे सूर्य से संचालित होता है —
वह मिट्टी (ख़ाक) से सोना बनता है, लेकिन चौथे शनि से वह गल (नष्ट) जाता है।

यदि गुरु और सूर्य दोनों किसी घर में साथ बैठे हों,
और पाँचवें घर में उसका मित्र (या उसकी बुद्धि) शत्रु बन जाए —
तो यह व्यक्ति अपने ही कर्मों से संघर्ष करता रहता है।

आयु फल
यदि शुक्र (शुभ ग्रह) का साथ न हो, तो व्यक्ति की उम्र कम होती है।
लेकिन यदि शुक्र या शुभ ग्रह साथ हों, तो लंबी उम्र प्राप्त होती है।

जीवन कथा
ऐसा व्यक्ति अक्सर निर्धन पिता का पुत्र या यतीम (अनाथ) होता है।
वह अपने बच्चों को भी निर्धनता में छोड़ जाता है।
उसने सपनों में महल देखे, लेकिन वास्तविक जीवन में टूटी हुई चारपाई पर ही सोया।
जीवन का आरंभ भी दुःख में और अंत भी दुःख में —
उसने केवल अफ़सोस देखा, सुख केवल स्वप्न में ही पाया।

27 से 36 वर्ष की उम्र तक जीवन बहुत कठिन रहता है,
लेकिन 28 के बाद यदि भाई का सहयोग मिले या किसी मंदिर/गणेश जी की पूजा में भाग ले,
तो भाग्य में सुधार होता है।

यह व्यक्ति जीवनभर संघर्ष करता है —
गरीबों पर दया करता है, लेकिन बदले में उसे अपमान या मार सहनी पड़ती है।
दूसरों की छोटी चीज़ें भी रोशनी दे जाती हैं,
लेकिन इसका तो शुद्ध तेल भी पेशाब से कम कीमत का समझा जाता है।

भावार्थ:
दसवें घर में नीच बृहस्पति व्यक्ति को कर्मफल के कठोर अनुभव कराता है।
वह ज्ञानवान तो होता है, पर परिस्थितियों के कारण उसका ज्ञान और परिश्रम फल नहीं देते।
जीवन में देर से सफलता, लेकिन पहले बहुत संघर्ष और अपमान झेलना पड़ता है।

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