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तांत्रिक साधना के मार्ग ,
तांत्रिक कर्म ,
तंत्र के प्रतीक,
तांत्रिक मंत्रों की पहचान
तांत्रिक साधना के मार्ग :-
तांत्रिक साधनाओं को साधारणत्य तीन मार्ग वाम मार्ग, दक्षिण मार्ग, मध्यम मार्ग कहा गया है। हालांकि यह मुख्य दो प्रकार की होती हैं। एक वाममार्ग और दूसरी दक्षिण मार्ग। वाममार्गी साधना बेहद कठिन है ।वाममार्गी तंत्र साधना में छह प्रकार के कर्म बताए गए हैं जिन्हें षट्कर्म कहते हैं
तांत्रिक कर्म:-
1. शांति कर्म :-जिससे रोग, कुकृत्य और ग्रह आदि की शांति होती है उसको शांति कर्म कहा जाता है।
2. वशीकरण :-जिस क्रम से सब प्राणियों को वश में किया जाए। अपने अधीन किया जाए अपनी बातों को मनमाना होगा उसको वशीकरण कहते हैं।
3. स्तंभन:- जिससे प्राणियों की प्रवृत्ति रोक दी जाए। जिससे किसी भी व्यक्ति को एक ही स्थान पर बांध दिया जाए या उसकी बुद्धि बांध दी जाए उसको स्तंभन कहते हैं।
4. विद्वेषण:- 2 प्राणियों की आपस में लड़ाई करवा देना परस्पर प्रीति को छुड़ा देने वाला ही विद्वेषण कहलाता है।
5. उच्चाटन:- जिस क्रम से किसी प्राणी को देश आदि से अलग कर दिया जाए उसको उच्चाटन कहते हैं। या परिवार से किसी व्यक्ति को अलग कर दिया जाए उसको उच्चाटन कहते हैं।
6. मारण:- जिस कर्म से किसी भी प्राणदेह के प्राण हरण किया जाए उसको मारण कर्म कहते हैं ।
यह छ तांत्रिक षट्कर्म है।
इसके अलावा नौवप्रकार के प्रयोगों का वर्णन मिलता है मारण, मोहन, स्तंभन , विद्वेषण, उच्चाटन, वशीकरण, आकर्षण, यक्षिणी साधना, रासायनिक क्रिया तंत्र के नौ प्रकार हैं।
तंत्र के प्रतीक:-
त्रिकोण से बनाई गई स्टार के बीच स्वास्तिक या ओम का चिन्ह, हाथों में लगाई जाने वाली मेहंदी ,
आंगनओ द्वारो पर चित्रण की जाने वाली अल्पना, बालक के संध्याकाल में पैदा होने पर लगाए जाने वाले स्वास्तिक और डालिया की आकृति ,दीपावली और अन्य त्योहारों पर सजाई गई रंगोली आदि तंत्र के प्रतीक हैं हालांकि तंत्र के और भी प्रतीक हैं जैसे योग की कुछ क्रियाएं मुद्राएं आदि।।
तांत्रिक मंत्रों की पहचान:-
तांत्रिकों के बीज मंत्रों में श्रीं,क्लीं, ह्रीं ,ऐं, क्रीं, क्रां आदि के अक्षरों का उपयोग किया जाता है। जिस भी मंत्र के प्रारंभ में इस तरह के अक्सर होते हैं वे सभी तांत्रिक मंत्र होते हैं एक अक्षर से पता चलता है कि यह किस देवी या देवता का मंत्र है जैसे लक्ष्मी के लिए श्रीं का उपयोग करते हैं ।काली माता के लिए क्रीं और क्रां का उपयोग करते हैं।
तंत्र साधना में देवी काली ,अष्ट भैरवी ,नवदुर्गा, दसमहाविद्या ,चौसठ योगिनी की साधना की जाती है इसी तरह देवताओं में बटुक भैरव ,काल भैरव ,नाथ महाराज की साधना की जाती है।
उक्त साधना ओं को छोड़कर जो लोग यक्षिणी, पिशाचिनी ,अपसरा ,वीर साधना ,गंधर्व साधना ,किन्नर साधना, नायक -नायिका की साधना ,डाकिनी -शाकिनी, विद्याधर ,सिद्ध, दत्य-दानव, राक्षस ,गोरख, भूत- प्रेत, बेताल ,अघोर आदि की साधना निषेध है ।
कैसे करें तांत्रिक साधना सबसे पहले तो यह बात है कि आप क्यों तंत्र साधना करना चाहते हो।
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