Er. Vikash Kumar
❣️
How casually he pulled the truth....👏🙌
पहले, हर बात पर सोचते-सोचते तुम थक जाया करते थे कोई क्या बोलेगा, किसने क्या किया, क्यों किया, क्या मैं सही हूँ, क्या मैं गलत हूँ... हर सवाल तुम्हारे मन को काटता रहता था जैसे अधूरा जवाब। लेकिन एक वक्त आता है जब तुम खुद से पूछते हो, क्या सच में ये सब सोचने की ज़रूरत है?
और जब तुम ये सवाल पूछना शुरू करते हो, वहीं से healing शुरू होती है।
मन हल्का तब होता है जब तुम चीज़ों को वैसे ही स्वीकार करना सीख जाते हो
जैसे वो हैं। ना किसी को बदलने की कोशिश, ना किसी को साबित करने की ज़रूरत। बस स्वीकार करना यही पहला कदम है आज़ादी की तरफ़।
Acceptance is not a weakness, It is understanding that peace is more valuable than perfection...
Hardest time of life....🙃
Enjoy the process..🙌
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