Edu2deeplearning Classes

Edu2deeplearning Classes

Share

13/04/2026

क्रॉस एग्जामिनेशन से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय
➡️Tahsildar Singh vs State of UP (AIR 1959 SC 1012): इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि Evidence Act (भारतीय साक्ष्य अधिनियम) की धारा 145 (अब BSA की धारा 181) के तहत गवाह को उसके पहले के बयानों (जैसे पुलिस बयान) से कैसे टकराया (confront) जाए। यह स्थापित किया गया कि पुलिस बयानों (CrPC 162/BNSS 181) का उपयोग केवल विरोधाभास स्थापित करने के लिए किया जा सकता है, न कि साक्ष्य को पुष्ट करने के लिए।
➡️सुख सिंह बनाम स्टेट ऑफ पंजाब: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्य परीक्षा (Examination-in-chief) के बिना गवाह की प्रति-परीक्षा (Cross-examination) नहीं की जा सकती।
गोपाल शरण बनाम सत्यनारायण: यदि कोई गवाह जिरह में भाग लेने से मना करता है, तो उसकी मुख्य गवाही का कोई कानूनी मूल्य नहीं रह जाता।

➡️स्टेट ऑफ केरल बनाम रघू: यह निर्णय जोर देता है कि जिरह में गवाह के बयानों में मौजूद विरोधाभासों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए।

➡️Sat Paul v. Delhi Administration (1976): इस मामले में Evidence Act की धारा 154 (होस्टाइल गवाह) की बारीकियों को परिभाषित किया गया। अदालत ने कहा कि किसी गवाह को प्रतिपरीक्षा की अनुमति केवल 'होस्टाइल' या 'प्रतिकूल' होने के आधार पर नहीं, बल्कि गवाह के बयानों में विसंगति या न्यायालय के विवेक पर दी जाती है।

➡️Profulla Kumar Sarkar vs Emperor (1931): यह एक क्लासिक केस है जो दर्शाता है कि प्रतिपरीक्षा का उद्देश्य गवाह की विश्वसनीयता को कैसे परखना है।

➡️State of UP vs Ram Kumar, 2000 में यह स्थापित किया है कि घायल चश्मदीद गवाह के बयानों में मामूली विसंगतियां या प्रतिपरीक्षा के दौरान मामूली विरोधाभास गवाह को पूरी तरह से अविश्वसनीय नहीं बनाते हैं।

13/04/2026

Caught Red handed during Taking Bribe of 10k

Want your public figure to be the top-listed Public Figure in Giridih?
Click here to claim your Sponsored Listing.

Category

Telephone

Website

Address


SHASTRINAGAR Ward 9
Giridih
815301