Azhar Sabri

Azhar Sabri

Share

13/06/2026

दिल भर के पी रहे हैं जो ग़म देख देख कर,
आँखों से बह रहा है ये नम देख देख कर।

दहलीज़ पर जमी रही सन्नाटों की सदी,
लौटे न फिर भी तेरे क़दम देख देख कर।

इक वहम-सा बसा है इसी रहगुज़र के बीच,
गुज़री है उम्र सारी भरम देख देख कर।

पहचाना भी न तूने मुझे राह में कभी,
बिखरे हैं कितने ख़्वाब-ए-हरम देख देख कर।

सीने में तेरी याद अभी तक है सलामत,
जैसे कोई चिराग़-ए-हरम देख देख कर।

ढलती रही है उम्र तिरी आस के तले,
टूटे हैं फिर भी सारे भरम देख देख कर।

रग-रग में तेरी याद का तूफ़ान है अभी,
थम-थम के चल रहा है ये दम देख देख कर।

~ Azhar Sabri ~

Want your business to be the top-listed Media Company in Gaya?
Click here to claim your Sponsored Listing.

Category

Address


Gaya