Dhananjay LLB
आज PRIVATISATION को कुछ लोग यह कहकर सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं कि इससे Facility और Quality में बदलाव आएगा ,यानी कि "सरकारी" की तुलना में "प्राइवेट" काॅलेज, अस्पताल अच्छे और उच्च मानक वाले होंगे ।
तो इसका मतलब गरीब को अच्छी शिक्षा और अच्छा स्वास्थ्य से वंचित कर दिया जाएगा ,इससे समानता बढेगी या असमानता?
"समानता " और "जीवन की अधिकार "की गारंटी देने वाला संविधान वाला देश में " सबको एक समान शिक्षा " और "अच्छी चिकित्सा" का ना मिल पाना कितना औचित्यपूर्ण होगा???
क्या इसके जगह यह नहीं होना चाहिए था की "सरकारी संस्थाओं " के गुणवत्ता उच्च मानक का किया जाता ?
इतिहास साक्षी रहा है कि ,जब भी समाज में असमानता बढ़ी है अस्थिरता बढ़ी है ।
मेरा निजी मत यह है कि हर काल में समाज जाती-धर्म से परे "दो " वर्गों में विभाजित रहा है - अमीर और गरीब !
आज भी भारत के 64% संपत्ति देश के 1% लोगों के हाथों में है ।
सनद रहे "अमीर" तब तक सुरक्षित है जब तक "गरीब"को यकीन है कि एक दिन वो भी "अमीर" बनेगा ।
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