Be Positive Think Positive
जब भी मैं फेसबुक खोलता हूँ, लोगों से बात करता हूँ या टीवी देखता हूँ, हर जगह धर्म की बातें ही दिखती हैं।
हर कोई अपने धर्म को ही सबसे अच्छा बताता है और कहता है कि भगवान तक पहुँचने का यही सही रास्ता है।
लेकिन दुनिया में जितनी लड़ाइयाँ और परेशानी है, उसे देखकर लगता है कि सवाल पूछना चाहिए:
क्या इंसान के लिए किसी धर्म का होना ज़रूरी है?
क्या बिना किसी धर्म को माने भी भगवान तक नहीं पहुँचा जा सकता?
क्या धर्म मानने से ज़िंदगी में शांति की गारंटी मिल जाती है?
हमें नहीं पता कि अगर आज हम हिन्दू हैं और कल कोई दूसरा धर्म अपना लें तो हमारी ज़िंदगी कैसे बदलेगी।
लेकिन दुनिया देखकर इतना समझ आता है कि बहुत सारी समस्याएँ धर्म को गलत तरह से इस्तेमाल करने की वजह से ही बढ़ी हैं।
धर्म के नाम पर लोग एक-दूसरे से दूर हो रहे हैं।
गलत काम भी धर्म के नाम पर किए जा रहे हैं।
कई लोग तो मारने–मरने को भी जन्नत समझ लेते हैं।
ऐसा देखकर दिल से बस यही निकलता है:
“भगवान का नाम लेकर इंसानियत को क्यों बदनाम करते हो?”
अगर हम मानते हैं कि भगवान ने हमें बनाया है, तो जीवन और मृत्यु भी उसी के हाथ में है।
गलतियाँ इंसान से होती हैं, पर भगवान का नाम लेकर बुराई करना — ये किस धर्म में लिखा है?
आखिर में सिर्फ इतना कहना है:
जय हिन्द, जय भारत।
इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।
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