The Message
23/06/2026
कर्बला का पैग़ाम:रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया कि सबसे अफ़ज़ल सदक़ा लोगों को पानी पिलाना है। पानी इंसान की सबसे बुनियादी ज़रूरत है, इसलिए किसी प्यासे को पानी देना बहुत बड़ा नेक काम है।
लेकिन कर्बला के मैदान में एक ऐसा दर्दनाक वाक़िआ पेश आया जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। रसूलुल्लाह ﷺ के नवासे हज़रत हुसैन (रज़ियल्लाहु अन्हु), उनके अहल-ए-बैत और उनके साथ मौजूद मासूम बच्चे प्यास से तड़प रहे थे। फ़ुरात का दरिया क़रीब होने के बावजूद उन्हें पानी तक पहुँचने से रोक दिया गया।
कर्बला सिर्फ़ एक जंग का नाम नहीं, बल्कि हक़, सब्र, क़ुर्बानी और इंसाफ़ के लिए डट जाने की मिसाल है। हज़रत हुसैन (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने ज़ुल्म के सामने झुकने के बजाय सच्चाई का साथ चुना और अपनी जान तक क़ुर्बान कर दी, लेकिन हक़ का रास्ता नहीं छोड़ा।
कर्बला हमें सिखाती है कि ताक़त हमेशा जीत की निशानी नहीं होती, बल्कि असली कामयाबी हक़ पर क़ायम रहने में है, चाहे उसके लिए कितनी ही बड़ी क़ुर्बानी क्यों न देनी पड़े।
Al-Arqam Da'wah Center Dhanbad
23/06/2026
दुनिया ने हमें सिखाया कि अपनी हर तकलीफ़ लोगों के सामने बयान करो, लेकिन इस्लाम हमें सिखाता है कि अपनी हर तकलीफ़ अल्लाह के सामने पेश करो।
आज के दौर में लाखों लोग अपनी परेशानियाँ, डर और मुश्किलें सोशल मीडिया पर साझा करते हैं ताकि लोगों से तसल्ली और सहारा मिल सके। लेकिन एक मोमिन यह जानता है कि जिसने हर मुश्किल को पैदा किया है, वही उसे दूर करने की पूरी कुदरत भी रखता है।
अल्लाह तआला फ़रमाता है: “और जब मेरे बन्दे मेरे बारे में आपसे पूछें, तो (उन्हें बता दीजिए कि) मैं बहुत क़रीब हूँ। जब कोई दुआ करने वाला मुझे पुकारता है, तो मैं उसकी दुआ क़बूल करता हूँ।” [📖 (सूरह अल-बक़रह 2:186)]
सोशल मीडिया शायद कुछ समय के लिए लोगों की तवज्जोह दिला दे, लेकिन सच्ची दुआ अल्लाह की मदद, रहमत और दिल का सुकून लेकर आती है। सबसे बेहतरीन बातें वह नहीं हैं जो हम दुनिया से करते हैं, बल्कि वे हैं जो हम अपने रब से रात की तन्हाइयों में करते हैं।
अपनी परेशानियाँ पोस्ट करने से पहले अपने हाथ दुआ के लिए उठाइए।
लोगों से तस्दीक़ (Validation) और मंज़ूरी तलाश करने से पहले अल्लाह से हिदायत माँगिए।
अपना दर्द दुनिया को सुनाने से पहले उसे उस ज़ात से कहिए जो आपके हर आँसू, हर डर और हर छुपे हुए ग़म को पहले से जानती है।
एक मोमिन की ताक़त इस बात में नहीं कि कितने लोग उसकी कहानी जानते हैं, बल्कि इस बात में है कि वह अपनी कहानी अल्लाह पर कितना भरोसा करके छोड़ देता है।
अपनी शिकायतों को दुआ में बदल दीजिए।
अपनी फ़िक्रों को तवक्कुल (अल्लाह पर भरोसा) में बदल दीजिए।
अपनी मुश्किलों को अल्लाह के और क़रीब होने का ज़रिया बना लीजिए।
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