PC Food Corner

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13/05/2021

Job Description

Hiring Housekeeping Executive/Supervisor for Patna, Bihar.

Male and Female both can apply.

Location: Bihar (Clients Location)

Local language is must -

No. of Openings : 3

Roles and Responsibilities:

Contract management:

Sourcing and overseeing manpower as per client need.

Check all completed work done by the staff.

Prepair and Cross check attendance & billings for HK, Security, Gardening, Laundry

Housekeeping Management:

Ensure that all the facilities are clean and maintained according to company policy and procedures

Recognizing areas that need to be cleaned, and assigning such areas to specific members of staff.

Drawing up a shift rota for staff Overlooking & Taking inventory & ordering & stock for housekeeping supplies & equipment's.

Ensure security and emergency preparedness procedures are implemented properly.

Building maintenance:

Supervising multi-disciplinary teams of staff including cleaning, gardeners and security Overseeing any renovations, refurbishments and building projects

Complaint Management:

Listen to customers/Client complaints and ensure that the complaints are addressed & resolved efficiently and effectively Audit and inspections Regularly conduct checks & audits of the Rooms, Common areas & all internal processes

Others:

Dealing with emergencies as they arise
Improve the efficiency and cost-effectiveness of the facility
Role also entails motivating, training, and retraining of the staff
Budget Management.
Desired Candidate Profile
Housekeeping Background
Someone who has been an Housekeeping Supervisor / Executive from Hospitals, Malls (1st pref) , Hotels, Airports, Corporate offices. etc.

Interested candidates can mail the resume / CV at
[email protected] to schedule the interview.

Or Call at 8826704227, 9811804227

Role Housekeeping Executive/Assistant.

Employment Type Full Time, Permanent

Education

Graduation Not Required

18/04/2021

*व्यक्तित्व*

मुंबई से बैंगलुरू जा रही ट्रेन में सफ़र के दौरान टीसी ने सीट के नीचे छिपी लगभग तेरह/चौदह साल की ऐक लड़की से कहा

टीसी "टिकट कहाँ है?"
काँपती हुई लडकी "नहीं है साहब।"
टी सी "तो गाड़ी से उतरो।"

इसका टिकट मैं दे रही हूँ।............पीछे से ऐक सह यात्री ऊषा भट्टाचार्य की आवाज आई जो पेशे से प्रोफेसर थी ।

ऊषा जी - "तुम्हें कहाँ जाना है ?"
लड़की - "पता नहीं मैम!"
ऊषा जी - "तब मेरे साथ चलो, बैंगलोर तक!"
ऊषा जी - "तुम्हारा नाम क्या है?"
लड़की - "चित्रा"

बैंगलुरू पहुँच कर ऊषाजी ने चित्रा को अपनी जान पहचान की ऐक स्वंयसेवी संस्था को सौंप दिया और ऐक अच्छे स्कूल में भी एडमीशन करवा दिया। जल्द ही ऊषा जी का ट्रांसफर दिल्ली हो गया जिसके कारण चित्रा से संपर्क टूट गया, कभी-कभार केवल फोन पर बात हो जाया करती थी।

करीब बीस साल बाद ऊषाजी को एक लेक्चर के लिए सेन फ्रांसिस्को (अमरीका) बुलाया गया । लेक्चर के बाद जब वह होटल का बिल देने रिसेप्सन पर गईं तो पता चला पीछे खड़े एक खूबसूरत दंपत्ति ने बिल चुका दिया था।

ऊषाजी "तुमने मेरा बिल क्यों भरा?"
*मैम, यह मुम्बई से बैंगलुरू तक के रेल टिकट के सामने कुछ भी नहीं है ।
ऊषाजी "अरे चित्रा!" ...

चित्रा और कोई नहीं बल्कि इंफोसिस फाउंडेशन की चेयरमैन सुधा मुर्ति थीं जो इंफोसिस के संस्थापक श्री नारायण मूर्ति की पत्नी हैं।
यह लघु कथा उन्ही की लिखी पुस्तक "द डे आई स्टाॅप्ड ड्रिंकिंग मिल्क" से ली गई है।

📯कभी कभी आपके द्वारा की गई किसी की सहायता, किसी का जीवन बदल सकती है।

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@ copied

06/03/2021

क्यों पसंद है भगवान विष्णु को पीला रंग, पूजा करते समय इस बात का ध्यान रखें

गुरुवार के दिन इस बात से हर कोई अवगत है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु की पूजा का इस दिन काफी महत्व माना जाता है. हिंदू धर्म के अनुसार गुरुवार के दिन की गई पूजा से इंसान को मनचाहा फल प्राप्त होता है. शास्‍त्रों के अनुसार भगवान बृहस्पति साधु और संतों के देव माने गए हैं और इसी तरह पीला रंग संपन्‍नता का प्रतीक भी है. यही वजह है कि पीला रंग इस दिन को समर्पित किया गया है.

आज के दिन पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्‍न होते हैं और धन संपत्ति का वरदान देते हैं. भगवान विष्‍णु को पीला रंग बहुत प्रिय है इसलिए इस दिन पीले वस्‍त्र धारण करने चाहिए और पीली वस्‍तुओं का दान किया जाता है. वहीं दूसरी तरफ आज कुछ चीजों को करने से परहेज करना भी बहुत जरूरी है.

कैसे करें भगवान विष्‍णु को प्रसन्‍न और क्‍या न करें इस दिन जानें...

- सुबह उठकर नहाने के बाद पीले रंग के कपड़े पहनें.
- पूजा में भोग लगाने के लिए गुड़ और चने की दाल को एक साथ मिला कर प्रसाद बनाएं.
- इस प्रसाद को आप भगवान को अर्पण कर पूजा करें. ऐसा करने भगवान विष्णु प्रसन्न होकर अपना आशीर्वाद आपके घर पर सदा बनाए रखते हैं.
- गुरुवार की पूजा विधि-विधान के अनुसार की जानी चाहिए और बृहस्पति देव के पूजन में पीले फूल, चने की दान, पीली मिठाई, पीले चावल आदि का उपयोग करना शुभ रहता है.
- आज के दिन केले के पेड़ का पूजन करना चाहिए और संभव हो तो इसके पास बैठकर ही बृहस्पति देव का पूजन और कथा पाठ करना चाहिए.
- अगर आज के दिन आप व्रत रख रहे हैं तो आपको केवल पीले फल ग्रहण करने चाहिए. आज के दिन पीली वस्तुओं का दान करने से मन को शांति और घर में समृद्धि का निवास रहता है.
- भगवान बृहस्पति देव की पूजा मात्र से आपके घर में गुरु का वास होता है.
- आज के दिन मन से सभी बुरे विचार त्याग कर भगवान के चरणों में अपने जीवन को अर्पण करना चाहिए.
- आज के दिन घर में पोछा नहीं लगना चाहिए और न ही कपड़े धोने या प्रेस करने को चाहिए.
- आज के दिन किसी को पैसे नहीं देने चाहिए.
- जो लोग गुरुवार का व्रत करें उन्‍हें नमक ग्रहण नहीं करना चाहिए और पीला भोजन करना चाहिए.

15/10/2020

ऑफिस से निकल कर शर्माजी ने

स्कूटर स्टार्ट किया ही था कि उन्हें याद आया,
पत्नी ने कहा था 1 दर्ज़न केले लेते आना।
तभी उन्हें सड़क किनारे बड़े और ताज़ा केले बेचते हुए

एक बीमार सी दिखने वाली बुढ़िया दिख गयी।
वैसे तो वह फल हमेशा "राम आसरे फ्रूट भण्डार" से

ही लेते थे,
पर आज उन्हें लगा कि क्यों न

बुढ़िया से ही खरीद लूँ ?
उन्होंने बुढ़िया से पूछा, "माई, केले कैसे दिए"
बुढ़िया बोली, बाबूजी 20 रूपये दर्जन,

शर्माजी बोले, माई 15 रूपये दूंगा।
बुढ़िया ने कहा, 18 रूपये दे देना,

दो पैसे मै भी कमा लूंगी।
शर्मा जी बोले, 15 रूपये लेने हैं तो बोल,

बुझे चेहरे से बुढ़िया ने,"न" मे गर्दन हिला दी।
शर्माजी बिना कुछ कहे चल पड़े

और राम आसरे फ्रूट भण्डार पर आकर

केले का भाव पूछा तो वह बोला 28 रूपये दर्जन हैं
बाबूजी, कितने दर्जन दूँ ?

शर्माजी बोले, 5 साल से फल तुमसे ही ले रहा हूँ,

ठीक भाव लगाओ।
तो उसने सामने लगे बोर्ड की ओर इशारा कर दिया।

बोर्ड पर लिखा था- "मोल भाव करने वाले माफ़ करें"

शर्माजी को उसका यह व्यवहार बहुत बुरा लगा,

उन्होंने कुछ सोचकर स्कूटर को वापस

ऑफिस की ओर मोड़ दिया।
सोचते सोचते वह बुढ़िया के पास पहुँच गए।

बुढ़िया ने उन्हें पहचान लिया और बोली,
"बाबूजी केले दे दूँ, पर भाव 18 रूपये से कम नही लगाउंगी।

शर्माजी ने मुस्कराकर कहा,

माई एक नही दो दर्जन दे दो और भाव की चिंता मत करो।
बुढ़िया का चेहरा ख़ुशी से दमकने लगा।

केले देते हुए बोली। बाबूजी मेरे पास थैली नही है ।

फिर बोली, एक टाइम था जब मेरा आदमी जिन्दा था
तो मेरी भी छोटी सी दुकान थी।

सब्ज़ी, फल सब बिकता था उस पर।

आदमी की बीमारी मे दुकान चली गयी,

आदमी भी नही रहा। अब खाने के भी लाले पड़े हैं।

किसी तरह पेट पाल रही हूँ। कोई औलाद भी नही है
जिसकी ओर मदद के लिए देखूं।

इतना कहते कहते बुढ़िया रुआंसी हो गयी,

और उसकी आंखों मे आंसू आ गए ।
शर्माजी ने 50 रूपये का नोट बुढ़िया को दिया तो

वो बोली "बाबूजी मेरे पास छुट्टे नही हैं।
शर्माजी बोले "माई चिंता मत करो, रख लो,

अब मै तुमसे ही फल खरीदूंगा,
और कल मै तुम्हें 500 रूपये दूंगा।

धीरे धीरे चुका देना और परसों से बेचने के लिए

मंडी से दूसरे फल भी ले आना।
बुढ़िया कुछ कह पाती उसके पहले ही

शर्माजी घर की ओर रवाना हो गए।

घर पहुंचकर उन्होंने पत्नी से कहा,

न जाने क्यों हम हमेशा मुश्किल से

पेट पालने वाले, थड़ी लगा कर सामान बेचने वालों से

मोल भाव करते हैं किन्तु बड़ी दुकानों पर

मुंह मांगे पैसे दे आते हैं।
शायद हमारी मानसिकता ही बिगड़ गयी है।

गुणवत्ता के स्थान पर हम चकाचौंध पर

अधिक ध्यान देने लगे हैं।
अगले दिन शर्माजी ने बुढ़िया को 500 रूपये देते हुए कहा,

"माई लौटाने की चिंता मत करना।

जो फल खरीदूंगा, उनकी कीमत से ही चुक जाएंगे।

जब शर्माजी ने ऑफिस मे ये किस्सा बताया तो

सबने बुढ़िया से ही फल खरीदना प्रारम्भ कर दिया।

तीन महीने बाद ऑफिस के लोगों ने स्टाफ क्लब की ओर से

बुढ़िया को एक हाथ ठेला भेंट कर दिया।

बुढ़िया अब बहुत खुश है।

उचित खान पान के कारण उसका स्वास्थ्य भी

पहले से बहुत अच्छा है ।

हर दिन शर्माजी और ऑफिस के

दूसरे लोगों को दुआ देती नही थकती।
शर्माजी के मन में भी अपनी बदली सोच और

एक असहाय निर्बल महिला की सहायता करने की संतुष्टि का भाव रहता है..!

जीवन मे किसी बेसहारा की मदद करके देखो यारों,

अपनी पूरी जिंदगी मे किये गए सभी कार्यों से

ज्यादा संतोष मिलेगा...!!
😊😊

नोट: - यदि लेख अच्छा लगा हो तो अपने Group Me जरुर शेयर करे.....
सोच को बदलो जिंदगी जीने का नजरिया बदल जायेगा।

त्यौहारों की खरीदी_
ऐसी जगह से करें

जो आपकी खरीदी की वजह से
त्यौहार मना सके ❜🙏

10/10/2020

एक राजा था जिसकी प्रजा हम भारतीयों की तरह सोई हुई थी !

बहुत से लोगों ने कोशिश की प्रजा जग जाए...

अगर कुछ गलत हो रहा है तो उसका विरोध करे,

लेकिन प्रजा को कोई फर्क नहीं पड़ता था !

राजा ने तेल के दाम बढ़ा दिये, प्रजा चुप रही,राजा ने अजीबो गरीब टैक्स लगाए, प्रजा चुप रही,राजा मनमानी करता रहा लेकिन प्रजा चुप रही,

एक दिन राजा के दिमाग मे एक बात आई उसने एक अच्छे-चौड़ेरास्ते को खुदवा के एक पुल बनाया जबकि वहां पुल की कतई आवश्यकता नहीं थी...

प्रजा फिर भी चुप थी, किसी ने नहीं पूछा के भाई यहाँ तो किसीपुल की जरुरत नहीं है, आप काहे बना रहे है..?

राजा ने अपने सैनिक उस पुल पे खड़े करवा दिए और पुल से गुजरने वाले हर व्यक्ति से टैक्स लिया जाने लगा,

फिर भी किसीने कोई विरोध नहीं किया !

फिर राजा ने अपने सैनिको को हुक्म दिया कि जो भी इस पुल से गुजरे उसको ""4 जूते"" मारे जाए और एक शिकायत पेटी भी पुल पर रखवा दी कि किसी को अगर कोई शिकायत हो तो शिकायत पेटी मे लिख कर डाल दे,

लेकिन प्रजा फिर भी चुप !

राजा रोज़ शिकायत पेटी खोल कर देखता की शायद किसी ने कोई विरोध किया हो, लेकिन उसे हमेशा पेटी खाली मिलती !

कुछ दिनो के बाद अचानक एक चिट्ठी मिली ..

राजा खुश हुआ के चलो कम से कम एक आदमी तो जागा....

जब चिट्ठी खोली गयी तो उसमे लिखा था -
"हुजूर जूते मारने वालों की संख्या बढ़ा दी जाए"...

हम लोगों को घर जाने मे देरी होती है !

ऐसे हो गए हैं हम ....
और हमारा समाज......

एक तनख्वाह से कितनी बार टेक्स दूं और क्यों...जबाब है???
मैनें तीस दिन काम किया,
तनख्वाह ली - टैक्स दिया
मोबाइल खरीदा - टैक्स दिया--'
रिचार्ज किया - टैक्स दिया
डेटा लिया - टैक्स दिया
बिजली ली - टैक्स दिया
घर लिया - टैक्स दिया
TV फ्रीज़ आदि लिये - टैक्स दिया
कार ली - टैक्स दिया
पेट्रोल लिया - टैक्स दिया
सर्विस करवाई - टैक्स दिया
रोड पर चला - टैक्स दिया
टोल पर फिर - टैक्स दिया
लाइसेंस बनाया - टैक्स दिया
गलती की तो - टैक्स दिया
रेस्तरां मे खाया - टैक्स दिया
पार्किंग का - टैक्स दिया
पानी लिया - टैक्स दिया
राशन खरीदा - टैक्स दिया
कपड़े खरीदे - टैक्स दिया
जूते खरीदे - टैक्स दिया
कितबें ली - टैक्स दिया
टॉयलेट गया - टैक्स दिया
दवाई ली तो - टैक्स दिया
गैस ली - टैक्स दिया
सैकड़ों और चीजें ली ओर - टैक्स दिया, कहीं फ़ीस दी, कहीं बिल, कहीं ब्याज दिया, कहीं जुर्माने के नाम पर तो कहीं रिश्वत के नाम पर पैसा देने पड़े, ये सब ड्रामे के बाद गलती से सेविंग मे बचा तो फिर टैक्स दिया----
सारी उम्र काम करने के बाद कोई सोशल सेक्युरिटी नहीं, कोई पेंशन नही, कोई मेडिकल सुविधा नहीं, बच्चों के लिये अच्छे स्कूल नहीं, पब्लिक ट्रांस्पोर्ट नहीं, सड़कें खराब, स्ट्रीट लाईट खराब, हवा खराब, पानी खराब, फल सब्जी जहरीली, हॉस्पिटल महंगे, हर साल महंगाई की मार, आकस्मिक खर्चे व् आपदाएं , उसके बाद हर जगह लाइनें।।।।
सारा पैसा गया कहाँ????
करप्शन में ,
इलेक्शन में ,
अमीरों की सब्सिड़ी में ,
माल्या जैसो के भागने में
अमीरों के फर्जी दिवालिया होने में ,
स्विस बैंकों में ,
नेताओं के बंगले और कारों मे,
और हमें झण्डू बाम बनाने मे।
अब किस को बोलूं कौन चोर है???
आखिर कब तक हमारे देशवासी यूंही घिसटती जिन्दगी जीते रहेंगे?????
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कृपया इसे हरेक नागरिक को भेजें.
साला इतना लगान तो अंग्रेज भी नहीं लेते थे
Indian


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