SatvaShree
22/01/2023
बागेश्वर धाम सरकार जैसे लोग भारत के लगभग सभी इलाकों में होते हैं.. उत्तराखंड में ऐसे लोगों को गंतवा कहते हैं... गंतवा, पुरुष भी होते हैं और महिलाएं भी.. इनके पास जाने वालों की भीड़ लगी रहती है... गंतवा और ज्योतिष में एक बड़ा अंतर होता है.. गंतवा आम तौर पर ये बताते हैं कि भूतकाल में आपके साथ ऐसा हुआ या आपने ऐसा किया, इसलिए आपका वर्तमान कष्टकारी है और इस कष्ट को दूर करने के लिए क्या किया जाए? जबकि ज्योतिष आपका भविष्य बताते हैं और भविष्य को सुधारने या संभावित कष्टों को दूर करने का उपाय बताते हैं.. ये गंतवा लोग आपको फोर्स नहीं करते हैं अपने यहां आने के लिए... श्रद्धा है तो आइए, वर्ना मत जाइए.. कोई जबरदस्ती नहीं.. फिर भी लोग जाते हैं? क्यों जाते हैं?
क्योंकि ये भारत है.. यहां बिल्ली के रास्ता काटने से.. किसी के छींकने से.. किसी के पीछे से आवाज लगाने से लोग रुक जाते हैं.. क्योंकि ये सब अशुभ माना जाता है.. हमारे यहां हर काम लग्न और मुहूर्त देखकर किया जाता है.. सबकी जन्मपत्री बनी होती है.. मंगलवार को आमतौर पर बाल नहीं काटते.. मीट नहीं खाते.. शाम को झाड़ू नहीं लगाते, कोई भी कार्य करने से पहले भगवान का नाम लेते हैं, क्या ये सब अंधविश्वास नहीं है? लेकिन खुद को तर्कशील कहने वाले 99% लोग ऐसा करते हैं.. कुछ खुलकर तो कुछ छुपकर इन अंधविश्वास पर भरोसा करते हैं.. तो फिर बागेश्वर बाबा के अंधविश्वास से दिक्कत क्यों?
सच तो ये है कि दिक्कत बाबा के अंधविश्वास से नहीं है क्योंकि अंधविश्वासी तो कमोबेश हम सभी हैं... बाबा से दिक्कत ये है कि सनातन धर्म को लेकर वो बीजेपी के नहीं बल्कि बजरंग दल के करीब नज़र आते हैं.. कतई कट्टर... बागेश्वर धाम सरकार लव जिहाद के भी खिलाफ हैं... पर्सनल लॉ के भी विरोधी हैं कॉमन सिविल कोड की मांग कर रहे हैं... धर्मांतरण कर चुके लोगों की घर वापसी करवा रहे हैं.. ब्रिटिश संसद में जाकर जय श्रीराम के नारे लगवा चुके.. अब जो इतना बड़ा सनातनी योद्धा हो, उसके खिलाफ तो मोर्चा खुलना ही था... ब्राह्मण होकर भी दलित-आदिवासियों के बीच उठते-बैठते हैं तो इनकी आंखों में खटक रहे हैं..
इसलिए जो अंधविश्वास और पाखंड के बहाने बाबा का विरोध कर रहे हो ना... इससे हमें तो मूर्ख मत बनाओ? इस पर्दे को गिरा दो.. खुलकर मैदान में आओ... बता दो कि तुम्हें दिक्कत अंधविश्वासी बाबा से नहीं एक हिंदू सनातनी योद्धा से है.. कायर मत बनो.. सामने से आकर लड़ो... क्योंकि बाबा तो सीना ठोक कर मैदान में हैं.. बजरंग बली ने लंका जलाई थी.. बजरंग बली के भक्त बाबा ने सनातन विरोधियों की लंका लगाई है..
जा पर कृपा राम की होई, ता पर कृपा करहिं सब कोई,
जिनके कपट,दम्भ नहिं माया, तिनके हृदय बसहु रघुराया,
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