Manoj Kumar Sharma
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MANOJ KUMAR SHARMA
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ज्ञान चर्चा
विषय सार्वजनिक रूप से ही त्यौहार मनाना
चर्चा रही अगस्त ,सितंबर और अक्टूबर में त्यौहारों का महीना है। अभी जन्माष्टमी गई है।अब गणेश चतुर्थी है जगह जगह पंडाल लगे है। फिर रामलीलाये होंगी, दशहरा , काली पूजा,और फिर दीपावली। सभी को बड़ा त्यौहार माना जाता है। क्योंकि ये सब त्यौहारों को हम सार्वजनिक जगहों पर ही एक साथ मनाते है।
इनको शुरू करवाने के पीछे महापुरुषों का ध्येय भी यही था। कि लोग अपने घरों से बाहर निकले मन्दिरो में इकट्ठा हो , सार्वजनिक जगह पर एकत्र होकर ये पर्व मनाये।अपने अपने घर मे रावण न फूंके। सार्वजनिक जगह पर फूंके। कथाओं के माध्यम से रामलीलाये करे और सभी भाग ले जिससे बुजुर्ग, महिलाओं और युवाओ और बच्चो को एक साथ एक जगह पर मिलने का और धार्मिक चर्चाओं का अवसर मिले।
श्री बाल गंगाधर तिलक जी ने महाराष्ट्र में श्री गणेश चतुर्थी कार्यक्रम आरम्भ किया। तुलसीदास जी ने श्री राम चरित मानस की रचना की और अपने द्वारा 500 से अधिक गांव गांव जाकर रामलीलाये प्रारम्भ की। आज पूरे देश मे इन पर्वो की धूम है।
हमे भी चाहिये कि इन पर्वो को हम निजी की जगह सार्वजनिक अपने क्षेत्र में होने वाले कार्यक्रमो में ही मनाये और जो हो सके अपना तन मन धन का सहयोग करे। उनकी आलोचना न करे। क्योंकि वो समाज को एकत्र करने का बहुत बड़ा कार्य कर रहे। और हमे भी परिवार सहित इन कार्यक्रमो में उत्साह पूर्वक भाग लेना चाहिये।
मनोज शर्मा "मन"
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