Samayantar

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19/12/2025

कारवां के नए अंक में:
इस साल अक्टूबर में हिंदी की मासिक पत्रिका समयांतर ने अपने प्रकाशन के 26 वर्ष पूरे कर लिए. इसके चार हज़ार से अधिक पाठकों के लिए पत्रिका का हर अंक उस भारत का दस्तावेज़ है, जो इन वर्षों में धीरे-धीरे बदलते हुए लगभग अपरिचित हो गया है. शुरुआती दौर में लिखने वाले कई लेखक अब इस दुनिया में नहीं हैं, जबकि कई नए नाम समयांतर के माध्यम से उभर कर आज स्थापित पत्रकार, लेखक और बुद्धिजीवी के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं.

शुरुआत दिनों में, जब 1990 के दशक में भारत विश्व बाज़ार के लिए खुल रहा था, समयांतर का मुख्य ध्यान वैश्वीकरण, उदारीकरण, निजीकरण के असर और महिलाओं, किसानों, मज़दूरों के संघर्षों पर था, पर आज पत्रिका में बढ़ते लोकतांत्रिक संकट, हिंदुत्व राजनीति के उभार और जाति के प्रश्नों पर लगातार विमर्श होता है. 2002 में गुजरात में हुए मुसलमान-विरोधी नरसंहार के बाद पत्रिका ने ‘बहुसंख्यक हिंसा और धर्म का भारतीय राजनीति व समाज में हस्तक्षेप’ जैसे विषयों पर लेखों, रिपोर्टों और संपादकियों की एक महत्त्वपूर्ण शृंखला प्रकाशित करनी शुरू की.

पढ़ें समयांतर पर विष्णु शर्मा का लेख, क़ंदील : हिंदी संसार की दरिद्रता से टकराती समयांतर पत्रिका के 26 साल, लिंक कमेंट बॉक्स में.

Photos from Samayantar's post 07/12/2025

समयांतर का दिसंबर अंक वेबसाइट पर उपलब्ध है.
देखें https://samayantar.com/product/december-2025-ank/

04/11/2025

नवंबर २०२५ अंक

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