Pradeep Raj
11/11/2024
आहार के नियम भारतीय 12 महीनों के अनुसार ♥️
#चैत्र ( मार्च-अप्रैल) – इस महीने में चने का सेवन करे क्योकि चना आपके रक्त संचार और रक्त को शुद्ध करता है एवं कई बीमारियों से भी बचाता है। चैत्र के महीने में नित्य नीम की 4 – 5 कोमल पतियों का उपयोग भी करना चाहिए इससे आप इस महीने के सभी दोषों से बच सकते है। नीम की पतियों को चबाने से शरीर में स्थित दोष शरीर से हटते है।
#वैशाख (अप्रैल – मई)- वैशाख महीने में गर्मी की शुरुआत हो जाती है। बेल का इस्तेमाल इस महीने में अवश्य करना चाहिए जो आपको स्वस्थ रखेगा। वैशाख के महीने में तेल का उपयोग बिल्कुल न करे क्योकि इससे आपका शरीर अस्वस्थ हो सकता है।
#ज्येष्ठ (मई-जून) – भारत में इस महीने में सबसे अधिक गर्मी होती है। ज्येष्ठ के महीने में दोपहर में सोना स्वास्थ्य वर्द्धक होता है , ठंडी छाछ , लस्सी, ज्यूस और अधिक से अधिक पानी का सेवन करें। बासी खाना, गरिष्ठ भोजन एवं गर्म चीजो का सेवन न करे। इनके प्रयोग से आपका शरीर रोग ग्रस्त हो सकता है।
#अषाढ़ (जून-जुलाई) – आषाढ़ के महीने में आम , पुराने गेंहू, सत्तु , जौ, भात, खीर, ठन्डे पदार्थ , ककड़ी, पलवल, करेला आदि का उपयोग करे व आषाढ़ के महीने में भी गर्म प्रकृति की चीजों का प्रयोग करना आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
#श्रावण (जूलाई-अगस्त) – श्रावण के महीने में हरड का इस्तेमाल करना चाहिए। श्रावण में हरी सब्जियों का त्याग करे एव दूध का इस्तेमाल भी कम करे। भोजन की मात्रा भी कम ले – पुराने चावल, पुराने गेंहू, खिचड़ी, दही एवं हलके सुपाच्य भोजन को अपनाएं।
#भाद्रपद (अगस्त-सितम्बर) – इस महीने में हलके सुपाच्य भोजन का इस्तेमाल कर वर्षा का मौसम् होने के कारण आपकी जठराग्नि भी मंद होती है इसलिए भोजन सुपाच्य ग्रहण करे।
#आश्विन (सितम्बर-अक्टूबर) – इस महीने में दूध , घी, गुड़ , नारियल, मुन्नका, गोभी आदि का सेवन कर सकते है। ये गरिष्ठ भोजन है लेकिन फिर भी इस महीने में पच जाते है क्योकि इस महीने में हमारी जठराग्नि तेज होती है।
#कार्तिक (अक्टूबर-नवम्बर) – कार्तिक महीने में गरम दूध, गुड, घी, शक्कर, मुली आदि का उपयोग करे। ठंडे पेय पदार्थो का प्रयोग छोड़ दे। छाछ, लस्सी, ठंडा दही, ठंडा फ्रूट ज्यूस आदि का सेवन न करे , इनसे आपके स्वास्थ्य को हानि हो सकती है।
#अगहन (नवम्बर-दिसम्बर) – इस महीने में ठंडी और अधिक गरम वस्तुओ का प्रयोग न करे।
#पौष (दिसम्बर-जनवरी) – इस ऋतू में दूध, खोया एवं खोये से बने पदार्थ, गौंद के लाडू, गुड़, तिल, घी, आलू, आंवला आदि का प्रयोग करे, ये पदार्थ आपके शरीर को स्वास्थ्य देंगे। ठन्डे पदार्थ, पुराना अन्न, मोठ, कटु और रुक्ष भोजन का उपयोग न करे।
#माघ (जनवरी-फ़रवरी) – इस महीने में भी आप गरम और गरिष्ठ भोजन का इस्तेमाल कर सकते है। घी, नए अन्न, गौंद के लड्डू आदि का प्रयोग कर सकते है।
#फाल्गुन (फरवरी-मार्च) – इस महीने में गुड का उपयोग करे। सुबह के समय योग एवं स्नान का नियम बना ले। चने का उपयोग न करे।
28/07/2024
यह स्नेक प्लांट (Snake Plant) है, जो बिना किसी मेहनत के आसानी से लगाया जा सकता है। यह पौधा कार्बन डाइआक्साइड को सोखकर ऑक्सीजन बनाता रहता है, इसलिए आप इसे ड्राईंग रूम, लॉबी या फिर लिविंग रूम कहीं भी रख सकते हैं। बस ध्यान रखें की इसमें पानी तभी डालें जब इसकी मिट्टी सूखी दिखे, ज्यादा पानी इसकी कमजोरी है....
घरों के अंदर कौन से पौधे लगाएं जाएं, यह लोगों की सबसे बड़ी समस्या होती हैं। इस पोस्ट में कुछ ऐसे ही इनडोर प्लांट के बारें में बताएंगे, जिन्हे कम रोशनी में भी ग्रो कर सकते हैं-
#एरिका_पाम :- यह छायादार जगहों पर लगाने के लिए सबसे उपयुक्त पौधा हैं, जो सुंदर होने के साथ-साथ वायु प्रदूषण को भी कम करता हैं। इसे बेडरूम या लिविंग रूम में बहुत आसानी से रखा जा सकता हैं।
#पीस_लिली :- स्वास्थ्य लाभ की दृष्टि से घरों में लगाने के लिए यह सबसे अच्छा पौधा हैं। यह पौधा विषैले गैसों को सोखकर उसे शुद्ध करने की क्षमता रखता हैं तथा बरसात में यह घरों में फफूंदी भी नहीं उगने देता हैं। इस तरह से यह पौधा घरेलू प्रदूषण को नियंत्रित करने का एक बेहतर विकल्प हैं।
#एलोवेरा :- औषधीय गुणों के अतिरिक्त इस पौधे में दूषित हवा को शुद्ध करने की भी क्षमता होती हैं। इसे लगाना और देखभाल करना बहुत आसान हैं। छायादार जगहों व धूप दोनो में इन्हें लगाया जा सकता हैं।
#मनी_प्लांट :- सौभाग्य एवं समृद्धि का प्रतीक यह पौधा छायादार जगहों पर बहुत आसानी से उगता हैं। यह न केवल घर की सुन्दरता बढ़ाता हैं, बल्कि वास्तु की दृष्टि से भी बहुत महत्त्वपूर्ण पौधा हैं।
#स्नेक_प्लांट :- यह इनडोर प्लांट हवा को शुद्ध करके वायु प्रदूषण को नियंत्रित करता हैं। इसे छायादार जगहों पर लगा सकते हैं। इसे बहुत कम पानी की आवश्यकता होती हैं। यह बिना पानी के कई हफ्तों तक सर्वाइव कर लेता हैं।
#जेडजेड_प्लांट :- इसका वानस्पतिक नाम Zamioculcas zamiifolia हैं। अपने आकर्षक व चमकदार पत्तों के साथ यह बेहद खूबसूरत दिखने वाला पौधा हैं। यह इनडोर और आउटडोर दोनों जगह बहुत अच्छे से ग्रो होता हैं।
#चाइनीज_एवरग्रीन :- यह एक बेहतरीन लो-लाइट इनडोर प्लांट हैं। इसे उगाना बहुत आसान हैं और यह हवा से फॉर्मलाडिहाइड और बेंजीन जैसे विषाक्त पदार्थों को सोखकर उसे साफ करता हैं। इसका वानस्पतिक एग्लोनेमा हैं।
#सिंगोनियम :- तीर के आकार के पत्तों के कारण इन्हें सामान्य तौर पर एरोहेड कहा जाता हैं। इनकी कटिंग्स को आसानी से बोतल में पानी भरकर लगा सकते हैं। छायादार स्थानों पर यह गमलों में भी बखूबी चलते हैं।
#लकी_बम्बू :- इसका वानस्पतिक नाम ड्रैसिना सैंडरियाना हैं। यह सकारात्मकता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता हैं। यह सबसे अच्छे ऑफिस डेस्क और टेबलटॉप प्लांट्स में से एक हैं। इसको पानी और मिट्टी दोनों में उगाया जा सकता हैं।
्लांट :- इसका वानस्पतिक नाम फाइकस इलास्टिका हैं। बड़े पत्ते वाला यह खूबसूरत पौधा कम धूप में भी बहुत अच्छे से ग्रो करता हैं और बिना पानी के कई हफ्तों तक सर्वाइव कर लेता हैं।
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