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28/02/2023
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दुनियाभर में पहचाने जा रहे हैं भारतीय कवि और उनकी लेखन शैली!
यही वजह है कि कथाकार, उपन्यासकार, कवि और निबंधकार.. हिंदी भाषा के महान लेखकों में से एक माने जाने वाले विनोद कुमार शुक्ला को 'पेन नबोकोव पुरस्कार' से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। यह अवार्ड पेन अमेरिका द्वारा दिया जाता है, जो एक नॉन-प्रॉफिट आर्गेनाईज़ेशन है और पूरे विश्व में साहित्य व मानव अधिकार के क्षेत्र में काम करती है।
अंतर्राष्ट्रीय साहित्य में उपलब्धि के लिए हर साल पेन नबोकोव पुरस्कार उस लेखक को दिया जाता है जिसकी रचनाओं में मौलिकता और उत्कृष्ट शिल्प शैली का गुण हो। इस साल दुनियाभर के प्रतिष्ठित लेखकों अमित चौधरी, रोया हकाकियान और माजा मेंगिस्टे के पैनल ने इस पुरस्कार के लिए विनोद कुमार शुक्ला का चयन किया। इन्हें 2 मार्च को 59वें पेन साहित्य पुरस्कार में सम्मानित किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्मे विनोद की 'दीवार में एक खिड़की रहती थी', 'नौकरी की कमीज़', 'खिलेगा तो देखेंगे', 'लगभग जय हिंद', 'सब कुछ होना बचा रहेगा', 'अतिरिक्त नहीं' और 'पेड़ पर कमरा' कुछ प्रमुख कृतियां हैं। उनके उपन्यास 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' को साल 1999 के साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। विनोद कुमार शुक्ला को इससे पहले मातृभूमि बुक ऑफ द ईयर समेत कई पुरस्कारों से नवाज़ा जा चुका है।
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