Shwet Prem Ras

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11/05/2026

ये थी वृन्दावन के सुप्रसिद्ध मन्दिर गोपेश्वर महादेव की सेवायत पुजारी ।

ध्यान दीजिए ।

गोपेश्वर *महादेव* ।

यह कई वर्षों से महादेव की पूजा में थी ।

इनकी मृत्यु कैसे हुई ???

Accident से और वह भी Bike के टक्कर से ।

ध्यान दीजिए ।

यह वही महादेव हैं जिनके विषय में कहा जाता है कि अकाल मृत्यु नहीं होगी ।

और इसकी प्रमुख पुजारी की मृत्यु कैसे हुई ????

Accident से ।

जिसे आप लोग अकाल नाम देते हैं ।

*अकाल मृत्यु वो मरे, जो काम करे चंडाल का। काल भी उसका क्या करे, जो भक्त हो महाकाल का ।।*

ध्यान दीजिए ।

न इसका काम कोई चांडाल का था ।

न ही कोई यह अभक्त थी ।

महाकाल की ही भक्त थी ये ।

लेकिन क्या हुआ ???

आप लोगों के हिसाब से अकाल मृत्यु हुई ।

यह उन बाबाओं बुबियों के मुँह पर तमाचा है करारा वाला जिन्होंने ऐसे घटिया सिद्धांत जन जन में व्याप्त किये हैं ।

और देखिये सबसे बड़ी बात , इसकी मृत्यु वृन्दावन में हुई ।

लो ! और सोने पर सुहागा ।

इसलिए इन सब कुटिल सिद्धांतों ने केवल और केवल सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों का ह्रास किया है ।

इन्हीं सिद्धांतों के कारण लोग नास्तिक बनते हैं , धर्म परिवर्तन के मूल कारण यही बाबा लोगों की कुत्सित philosophy है जो भोली भाली जनता को बरगलाती है ।

इसलिए सिद्धांत को सदा साथ रखिये तो कभी कुछ नहीं होगा ।

केवल वेदों शास्त्रों की philosophy के साथ साथ भगवदप्राप्त महापुरुषों की philosophy पर विश्वास करना सीखिये ।

अन्यथा एक दिन सब धर्म से च्युत होने लगेंगे ।

यही हाल वृन्दावन के नाव हादसे में हुआ जिसमें 16 लोगों की जान चली गयी ।

इसके बाद किसी बाबा ने सामने आकर अपनी philosophy को नहीं बताया कि राधा राधा करने से यम के द्वार से बच जाओगे ।

वृन्दावन में किसी भी प्रकार मरने से भगवदप्राप्ति हो जाएगी ।

सांत्वना तक किसी बाबा ने नहीं दिया जिन बाबाओं का कहना था कि -

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने

मंत्र से मृत्यु नहीं होगी ।

इन सब सिद्धांतों से बाहर निकलिये आप लोग और सही सही वेदों शास्त्रों के सिद्धांतों का पालन करिये अन्यथा नास्तिक बनने में कोई देर नहीं लगेगी ।

मैं जानता हूँ सदियों से क्या हज़ारों वर्षों से ग़लत ग़लत सिद्धांत शास्त्र , भगवान और सन्तों महापुरुषों के प्रति डाले गए हैं , वह जल्दी नहीं निकल सकती और उन धारणाओं के टूटने पर दर्द भी होता है , बहुत कष्ट होता है ।

लेकिन उस कष्ट से बहुत असंख्य गुना अच्छा है कि 84 लाख योनियों के कष्ट से मुक्त हो जाओ ।

धीरे धीरे सिद्धांतों को हृदयंगम करिये तभी साधना मार्ग में दौड़ेंगे ।

गौरांग महाप्रभु ने कहा -

सिद्धांत बलिया चित्ते ना करे आलस ।

सिद्धान्त समझने में आलस्य मत करो ।

कुल्हाड़ी को धार देने में आलस्य मत करो ।

इसलिए सब लोग सही सही तत्त्वज्ञान से सम्बन्ध रखिये ।

श्वेताभ पाठक
Shwetabh Pathak
Shwet Prem Ras
www.shwetpremras.in

#वायरल #वृन्दावन

10/05/2026

मन भज नित सीताराम रे !
ममतामयी श्रीमात जानकी , रघुनन्दन सुखधाम रे !
गौर वरनि मिथिलेश कुमारी , अवध बिहारी श्याम रे !
पतिव्रताहूँ जनकनंदिनी , पुरूषोत्तम श्रीराम रे !
प्राणप्रिया जोइ रघुनन्दन की , पुनि प्यारे सिय बाम रे !
सिंहासन आरूढ़ि दोउ जब , लखि लाजत शत काम रे !
कहत “श्वेत” मन भेद न दोउ मंह , एकहुँ दोउ श्रीधाम रे !

- Shwetabh Pathak ( श्वेताभ पाठक )
Shwet Prem Ras

#वायरल #राम

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