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प्रिय साथियों,
सीबीआई न्यायालय, पंचकुला के आदेश द्वारा सिरसा के बाबा राम रहीम को बलात्कार की घटना में दोषी करार किये जाने के उपरान्त पंचकुला, सिरसा व दर्जनों अन्य शहरों व स्थानों में हुई हिंसा की घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि भीड़ नियंत्रण की घटनाओं में अधिकांश राज्यों की पुलिस पूर्ण रूप से असफल रही है I उल्लेखनीय है कि भारत के संविधान के अनुसार लोक शांति बनाये रखना राज्यों का प्रमुख कर्तव्य है लेकिन देखा यह गया है कि अधिकांश मामलों में लोक शांति बनाये रखने में राज्य सरकारें विफल रही हैं वह चाहे अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद के तोड़े जाने की घटना हो, गुजरात के दंगों की घटना हो, हरियाणा में ही रामपाल महाराज के डेरे के कब्जे को लेकर हुए दंगे हों या मथुरा में जवाहर बाग की हिंसा की घटना हो जिसमे SP मुकुल दिवेदी व थानाध्यक्ष संतोष यादव की हत्या हुई अथवा अन्य अनेकों साम्प्रदायिक दंगों की घटना हो I
इन घटनाओं के अनेकों कारण हो सकते हैं किन्तु अन्य तमाम कारणों में जहाँ एक कारण बाबा राम रहीम के भक्तों में अंध श्रद्धा के कारण बाबा राम रहीम, रामपाल, आशाराम अथवा रामवृक्ष यादव के आदेश को भगवान् का आदेश मानना हो सकता है वहां दूसरा कारण भीड़ के लोगों में कानून का डर न होना भी है I यह भारत देश के लिए अत्यंत विडंबना ही है कि एक दिल्ली की निर्भय के साथ हुए बलात्कार के दोषियों को सजा दिलाने के लिए वर्ष 2012 में लाखों लोग राजधानी दिल्ली में महामहिम राष्ट्रपति जी के भवन की ओर कूच कर गये और एक कल की बिल्कुल विपरीत घटना जब न्यायालय से दोषी करार किये गए एक बलात्कारी के समर्थन में लाखों लोग पंचकूला, सिरसा में हिंसा पर उतर गए जिसकी आंच कई प्रदेशों में फ़ैल गई जिसमे लगभग 30 व्यक्ति मारे गए और लगभग 250 व्यक्ति घायल हुए I क्या इस घटना से हमारे देश की विश्व में बदनामी नहीं हुई ?? क्या इन घटनाओं से हमारे देश के संविधान और संविधान को बनाने वाले महान व्यक्तियों को आंसू नहीं आये होंगे ??
उल्लेखनीय है कि धारा 144 Cr. P.C. के आदेशों के उल्लंघन की सजा धारा 188 IPC में वर्णित है जो कि वर्तमान में जमानतीय (Bailable) है जिसमे सजा एक माह से अधिकतम 6 माह की है, इसलिए लोगों में धारा 144 का डर नहीं है I
अत: यदि सरकार लोगों को अनुशासित और कानून का उल्लंघन के प्रति डर की भावना जाग्रत करना चाहती है तो उसको गोस्वामी तुलसी दास जी की रामचरित मानस में अंकित चौपाई, “भय बिन प्रीत न होई गुसांई” पर ध्यान देकर नियम कानूनों में कठोर सजा का प्राविधान करना चाहिए I
भीड़ नियंत्रण से सम्बंधित पुलिस/ पैरा मिलिट्री फोर्सेज की ट्रेनिंग/ उनको इस अवसर के लिए उपलब्ध कराये गए हथियार/ टूल्स तथा भीड़ नियंत्रण से सम्बंधित कानूनों को विशेषतया धारा 144 Cr.P.C., तथा भारतीय दण्ड विधान (IPC) के चैप्टर VIII लोक शांति से सम्बंधित (related with public tranquility) धाराएँ 143/144/145/ 147/ 148/151/152/153 I.P.C. आदि {जो कि सभी जमानतीय अपराध हैं और जिनमे 6 माह से अधिकतम कारावास 3 वर्ष का दण्ड का प्राविधान है} तथा इनसे सम्बंधित जमानत एवं न्यायालय में साक्ष्य सम्बंधित धाराओं (Indian Evidence Act) में व्यापक समीक्षा उपरान्त बदलाव की आवश्यकता तत्काल रूप से वांछनीय हो गई है I
उदहारण स्वरुप धारा 304B IPC दहेज़ हत्या में कानून आरोपी को अभियुक्त मानती है तथा न्यायालय में उसे ही स्वयं अपने निर्दोष होने की बात साबित करनी पड़ती है जबकि अन्य समस्त अपराधों में राज्य की ओर से जांच एजेंसी को अभियुक्त के विरुद्ध अपराध साबित करना पड़ता है क्योंकि कानून यह मानता है कि ससुराल के अन्दर बहु की जब हत्या की जाती है तो वहां कोई व्यक्ति उस घटना का गवाह नहीं होता अलावा अभियुक्त/अभियुक्तों के I इसी प्रकार हिंसक भीड़ की इतनी बड़ी तादाद को नियंत्रण करना, गिरफतारी करना ही अपने आप में एक दुष्कर कार्य होता है, तब निष्पक्ष गवाह वहां कहाँ से आयेंगे ?? अत: जो अभियुक्त घटनास्थल पर पुलिस/ पैरामिलिटरी द्वारा धारा 144 Cr.P.C. (जो कि केवल एक निषेधात्मक आदेश है) के उल्लंघन में गिरफ्तार कर आरोप पत्र द्वारा कोर्ट चालान किये जाते हैं, Indian evidence act में बदलाव कर निर्दोष साबित करने की जिम्मेदारी स्वयं अभियुक्तों पर डाली जानी चाहिए I धारा 144 Cr. P.C. के आदेशों के उल्लंघन की सजा धारा 188 IPC में वर्णित है तथा लोक शांति बनाये रखने से सम्बंधित धाराएँ 143/144/145/147/148/151/152/153 I.P.C. जो कि वर्तमान में जमानतीय (Bailable) है को अजमानतीय (Non-bailable) बनाया जाना तथा इनमे सजा की सीमा का बढाया जाना अब अपरिहार्य हो गया है I भले ही कानून व्यवस्था राज्य सरकारों का विषय हैं किन्तु 1. Police Act (जो कि वर्ष 1861 में अंग्रेजों द्वारा बनाया गया था), IPC के चैप्टर VIII (लोक शांति से सम्बंधित धाराएँ) तथा Cr.P.C. व Indian Evidence Act आदि में संशोधन संसद ही कर सकती है हालांकि कुछ मामलों में राज्य सरकार भी कुछ संशोधन कर सकती है किन्तु भीड़ नियंत्रण के मामले में यूनिफार्म अमेंडमेंट जो की पूरे भारत वर्ष के लिए हो निश्चित रूप से प्रभावशाली होने के साथ-साथ हितकर भी होगा I
अत: निवेदन है कि कृपया गंभीरता पूर्वक इस पत्र के तथ्यों पर विचार कर शीघ्र वांछनीय कार्यवाही कर देश की क़ानून व्यवस्था व क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में व्यापक सुधार करने की कार्यवाही की जाए अन्यथा देश के करोड़ों कानून का पालन करने वाले आम नागरिकों का विश्वास देश की ढीली/ लचर/ विलंबित/ महँगी/ थका देने वाली कानून व न्याय व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा I
इस पत्र को आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, भारत सरकार, नई दिल्ली तथा माननीय केंद्रीय गृह मंत्री जी भारत सरकार, नई दिल्ली को भी प्रेषित किया जा रहा है I
आप यदि इस पोस्ट से सहमत हों तो कृपया इसको like कर अधिक से अधिक शेयर कीजिएगा I
जय हिन्द,
जस्टिस इंडिया आर्गेनाईजेशन
सिरसा स्थित डेरा बाबा राम रहीम की रेप पीड़िता साध्वी की इस गुमनाम चिट्ठी को पंचकूला के स्थानीय सांध्य दैनिक अखबार 'पूरा सच' में अक्षरश: प्रकाशित किया गया था. आरोप है कि इसके बाद राम रहीम के इशारे पर 'पूरा सच' अखबार के संपादक रामचन्द्र छत्रपति के घर में घुसकर उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया गया था. उसी चिट्ठी के आधार पर राम रहीम को सीबीआई कोर्ट ने रेपिस्ट करार दिया है. कोर्ट की ओर से गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के बाद साध्वी की उसी गुमनाम चिट्ठी को दैनिक जागरण ने प्रकाशित किया है, आप पढ़िए किन शब्दों में पीड़िता ने बयां किया था दर्द-:
सेवा में,
माननीय प्रधानमंत्री महोदय जी श्री अटल बिहारी वाजपेयी, भारत सरकार
विषय : डेरे के महाराज द्वारा सैकड़ों लड़कियों से बलात्कार की जांच करें.
श्रीमान जी, यह है कि मैं पंजाब की रहने वाली हूं और अब पांच साल से डेरा सच्चा सौदा सिरसा, हरियाणा (धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा) में साधु लड़की के रूप में सेवा कर रही हूं. मेरे साथ यहां सैकड़ों लड़कियां भी डेरे में 18-18 घंटे सेवा करती हैं. हमारा यहां शारीरिक शोषण किया जा रहा है. साथ में डेरे के महाराज गुरमीत सिंह द्वारा योनिक शोषण (बलात्कार) किया जा रहा है. मैं बीए पास लड़की हूं. मेरे परिवार के सदस्य महाराज के अंध श्रद्धालु हैं, जिनकी प्रेरणा से मैं डेरे में साधु बनी थी.
साधु बनने के दो साल बाद एक दिन महाराज गुरमीत की परम शिष्या साधु गुरुजोत ने रात के 10 बजे मुङो बताया कि आपको पिता जी ने गुफा (महाराज के रहने का स्थान) में बुलाया है. मैं क्योंकि पहली बार वहां जा रही थी, मैं बहुत खुश थी. यह जानकर कि आज खुद परमात्मा ने मुङो बुलाया है. गुफा में ऊपर जाकर जब मैंने देखा महाराज बेड पर बैठे हैं. हाथ में रिमोट है, सामने टीवी पर ब्लू फिल्म चल रही है. बेड पर सिरहाने की ओर रिवॉल्वर रखा हुआ है. मैं यह सब देखकर हैरान रह गई. मुझे चक्कर आने लगे. मेरे पांव के नीचे की जमीन खिसक गई. यह क्या हो रहा है. महाराज ऐसे होंगे? ऐसा मैंने सपने में भी नहीं सोचा था. महाराज ने टीवी को बंद किया व मुङो साथ बिठाकर पानी पिलाया और कहा कि मैंने तुम्हें अपनी खास प्यारी समझकर बुलाया है. मेरा यह पहला दिन था.
महाराज ने मेरे को बांहों में लेते हुए कहा कि हम तुझे दिल से चाहते हैं. तुम्हारे साथ प्यार करना चाहते हैं, क्योंकि तुमने हमारे साथ साधु बनते वक्त तन-मन-धन सब सतगुरु के अर्पण करने को कहा था. तो अब ये तन-मन हमारा है. मेरे विरोध करने पर उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं हम ही खुदा हैं.
जब मैंने पूछा कि क्या यह खुदा का काम है तो उन्होंने कहा - श्री कृष्ण भगवान थे, उनके यहां 360 गोपियां थीं जिनसे वह हर रोज प्रेम लीला करते थे. फिर भी लोग उन्हें परमात्मा मानते हैं, यह कोई नई बात नहीं है. हम चाहें तो इस रिवॉल्वर से तुम्हारे प्राण पखेरू उड़ाकर दाह संस्कार कर सकते हैं. तुम्हारे घरवाले इस प्रकार से हमारे पर विश्वास करते हैं व हमारे गुलाम हैं. वह हमारे से बाहर जा नहीं सकते. यह तुमको अच्छे से पता है. हमारी सरकार में बहुत चलती है.
हरियाणा व पंजाब के मुख्यमंत्री, पंजाब के केंद्रीय मंत्री हमारे चरण छूते हैं. राजनीतिज्ञ हमसे समर्थन लेते हैं, पैसा लेते हैं और हमारे खिलाफ कभी नहीं जाएंगे. हम तुम्हारे परिवार के नौकरी लगे सदस्यों को बर्खास्त करवा देंगे. सभी सदस्यों को अपने सेवादारों (गुडों) से मरवा देंगे. सबूत भी नहीं छोड़ेंगे. यह तुम्हें अच्छी तरह पता है कि हमने गुंडों से पहले भी डेरे के प्रबंधक फकीर चंद को खत्म करवा दिया था जिनका अता-पता तक नहीं है. ना ही कोई सबूत बकाया है. जो कि पैसे के बल पर हम राजनीतिक व पुलिस और न्याय को खरीद लेंगे. 1इस तरह मेरे साथ मुंह काला किया और पिछले तीन मास में 20-30 दिन बाद किया जा रहा है.
आज मुझको पता चला कि मेरे से पहले जो लड़कियां रहती थीं, उन सबके साथ मुंह काला किया गया है. डेरे में मौजूद 35-40 साधु लड़की 35-40 वर्ष की उम्र से अधिक हैं जो शादी की उम्र से निकल चुकी हैं. जिन्होंने परिस्थितियों से समझौता कर लिया है. इनमें ज्यादातर लड़कियां बीए, एमए, बीएड, एमफिल पास हैं, मगर घरवालों के अंधविश्वासी होने के कारण नरक का जीवन जी रही हैं.
हमें सफेद कपड़े पहनना, सिर पर चुन्नी रखना, किसी आदमी की तरफ आंख न उठाकर देखना, आदमी से 5-10 फुट की दूरी पर रहना महाराज का आदेश है लेकिन दिखाने में देवी हैं मगर हमारी हालत वेश्याओं जैसी है.
मैंने एक बार अपने परिवारवालों को बताया कि डेरे में सबकुछ ठीक नहीं है तो मेरे घर वाले गुस्से में होते हुए कहने लगे कि अगर भगवान के पास रहते हुए ठीक नहीं है तो ठीक कहां है. तेरे मन में बुरे विचार आने लग गए हैं. सतगुरु का सिमरण किया कर. मैं मजबूर हूं. यहां सतगुरु का आदेश मानना पड़ता है. यहां कोई भी दो लड़कियां आपस में बात नहीं कर सकतीं. घरवालों को टेलिफोन मिलाकर बात नहीं कर सकतीं. घरवालों का हमारे नाम फोन आए तो हमें बात करने का महाराज के आदेशानुसार हुक्म नहीं है. यदि कोई लड़की डेरे की इस सच्चाई के बारे में बात करती है तो महाराज का हुक्म है कि उसका मुंह बंद कर दो.
पिछले दिनों बठिंडा की लड़की साधु ने जब महाराज की काली करतूतों का सभी लड़कियों के सामने खुलासा किया तो कई साधु लड़कियों ने मिलकर उसे पीटा. जो आज भी घर पर इस मार के कारण बिस्तर पर पड़ी है. जिसका पिता ने सेवादारों से नाम कटवाकर चुपचाप घर बैठा दिया है. जो चाहते हुए भी बदनामी और महाराज के डर से किसी को कुछ नहीं बता रही.
एक कुरुक्षेत्र जिले की एक साधु लड़की जो घर आ गई है, उसने अपने घर वालों को सब कुछ सच बता दिया है. उसका भाई बड़ा सेवादार था, जो कि सेवा छोड़कर डेरे से नाता तोड़ चुका है. संगरूर जिले की एक लड़की जिसने घर आकर पड़ोसियों को डेरे की काली करतूतों के बारे में बताया तो डेरे के सेवादार / गुंडे बंदूकों से लैस लड़की के घर आ गए. घर के अंदर से कुंडी लगाकर जान से मारने की धमकी दी व भविष्य में किसी से कुछ भी नहीं बताने को कहा.
इसी प्रकार कई लड़कियां जैसे कि जिला मानसा (पंजाब), फिरोजपुर, पटियाला, लुधियाना की हैं. जो घर जाकर भी चुप हैं क्योंकि उन्हें जान का खतरा है. इसी प्रकार जिला सिरसा, हिसार, फतेहबाद, हनुमान गढ़, मेरठ की कई लड़कियां जो कि डेरे की गुंडागर्दी के आगे कुछ नहीं बोल रहीं.
अत: आपसे अनुरोध है कि इन सब लड़कियों के साथ-साथ मुङो भी मेरे परिवार के साथ जान से मार दिया जाएगा अगर मैं इसमें अपना नाम-पता लिखूंगी. क्योंकि मैं चुप नहीं रह सकती और ना ही मरना चाहती हूं. जनता के सामने सच्चाई लाना चाहती हूं. अगर आप प्रेस के माध्यम से किसी भी एजेंसी से जांच करवाएं तो डेरे में मौजूद 40-45 लड़कियां जो कि भय और डर में हैं. पूरा विश्वास दिलाने के बाद सच्चाई बताने को तैयार हैं. हमारा डॉक्टरी मुआयना किया जाए ताकि हमारे अभिभावकों व आपको पता चल जाएगा कि हम कुमारी देवी साधु हैं या नहीं. अगर नहीं तो किसी के द्वारा बर्बाद हुई हैं. ये बता देंगे कि महाराज गुरमीत राम रहीम सिंह जी, संत डेरा सच्चा सौदा के द्वारा तबाह की गई हैं.
प्रार्थी: एक निर्दोष जलालत का जीवन जीने को मजबूर (डेरा सच्चा सौदा सिरसा).
साभार: NDTV khabar
14/06/2016
केजरी जी, क्याआपने इनकी पीड़ा को समझा और एहसास किया ? 16जूनको इस घटना की तीसरी बरसी है ? अभी तक दिल्ली स्टेट का कंपनसेशन नहीं मिला जो अन्य राज्यों की भांति आपको देना था और देना है ? कृपया अधिक से अधिक शेयर करें I
For Justice to NDMC Estate Officer Mohd. Moeen Khan & his family
देश की जनता गत माह अप्रैल में NIA के DSP तंजील अहमद व उसकी पत्नी पर हुई ताबड़तोड़ गोलीकांड को नहीं भूली जिसमे तंजील अहमद साहब की हत्या हुई I इस घटना को प्रारंभ में मीडिया के अनुसार आतंकवादिओं के द्वारा हत्या किये जाने पर आशंका व्यक्त की गई थी किन्तु जांच के उपरान्त यह घटना प्रॉपर्टी विवाद के कारण होना साबित हुई जिसमे कुछ अभियुक्त गिरफ्तार भी किये जा चुके हैं. तंजील अहमद की ओखला में शव यात्रा में दिल्ली के मुख्या मंत्री अरविन्द केजरीवाल शरीक हुए और जांच के रिजल्ट आने से पूर्व ही तंजील अहमद के परिवार को एक करोड़ रूपये का अनुदान दिए जाने की घोषणा कर दी किन्तु 3 दिन पूर्व केजरीवाल जी की विधान सभा क्षेत्र में कार्यरत NDMC के एस्टेट अफसर मोहम्मद मोइन खान जो ‘कनाट होटल’ के मालिक रमेश कक्कड़ के द्वारा दिए गए बड़े लालच और धमकी के आगे नहीं झुकने और ईमानदारी पर अटल रहने के कारण 147 करोड़ के देनदार रमेश कक्कड़ के क्रोध का शिकार होकर उसके गुर्गों की जामिया नगर, दिल्ली में अनेकों गोलियां खाकर जान गवां बैठेने पर भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने का नारा लगाने वाली आप की सरकार के मुखिया केजरीवाल द्वारा 1 करोड़ उसके परिवार को देने की बात तो दूर, 2 शब्द भी उसकी ईमानदारी की शहादत पर न बोल सके और वह मात्र भ्रष्टाचार के विरुद्ध यह गाना, “एक ऐसे गगन के तले, जहाँ चोर न हो जहाँ भ्रष्ट भी न हो बस आपका राज चले” गुनगुनाते रहे? NDMC के मेयर ने भी क्या किया? क्या वह अपने ऐसे ईमानदार, बहादुर व कर्मठ अधिकारी के घर उसके परिवार को सान्तवना देने गए? नेताओं में ऐसी संवेदना कहाँ? चाहे वह किसी भी पार्टी के हो ? वह तो केवल वहां जाते है जहाँ जाने से उनको वोट बैंक का लाभ दिखाई देता हो I क्या इस प्रकार की घटनाओं से ईमानदार अधिकारियों का मनोबल नहीं टूटेगा? क्या सरकारी अधिकारी जान गवांने के बजाये इस प्रकार के भ्रष्ट व्यापारियों/ अपराधियों से एन केन पराकरेण समझौता करने में ही भलाई नहीं समझेंगें ? अभी तक पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों/ कर्मचारियों द्वारा तो ईमानदारी से अपराधियों के विरुद्ध कार्यावाही करने में अपनी जान गवाने की अनेकों घटनाएं सामने आयी है लेकिन सिविलियन अफसरों द्वारा ईमानदारी पर अडिग रहने व निर्भय रहकर अपने दायित्व से पीछे न हटने का और उसके कारण अपनी जान गंवाने का यह अनोखा मामला वह भी देश की राजधानी में प्रकाश में आया है I इस प्रकार के अति विशिष्ठ प्रकरण में ईमानदार अधिकारियों में उत्साह भरने व निर्भयपूर्वक कार्य करने हेतु मनोबल बढाने के लिए तत्काल खान परिवार को आर्थिक अनुदान दिए जाने, उसके परिवार के एक योग्य सदस्य/आश्रित को उसी विभाग में यथा योग्य नौकरी दिए जाने के अलावा मरणोपरांत ईमानदारी के मेडल से अलंकृत किये जाने की महती आवश्यकता है जिससे भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन को प्रयाप्त बल मिल सके और समाज में भी एक अच्छा सन्देश जा सके I जिस प्रकार सेना व पुलिस में शौर्य, बहादुरी, विशिष्ट, अति विशिष्ट सेवाओं के लिए सम्बंधित अधिकारियों को पदक प्रदान किये जाते हैं इसी प्रकार केंद्र सरकार व राज्य सरकारों को भी अपने सिविलियन अधिकारियों/ कर्मचारियों को भी एस्टेट अफसर मोहमद मोइन खान की तरह निर्भय होकर ईमानदारीपूर्वक कार्य करने पर पदक (मेडल) प्रदान करने की परम्परा की शुरुआत की जानी चाहिए I इस प्रकरण में मीडिया ने 16 मई की इस सनसनीखेज घटना को 3 दिन बाद आज 19 मई को देश के सामने प्रकट किया है, इसका कारण तो वही जाने किन्तु विलम्ब का कारण उसको अपनी साख कायम रखने के लिए स्पष्ट करना चाहिए I जस्टिस इंडिया आर्गेनाईजेशन (justiceIndia.Org) शहीद एस्टेट अफसर मोहम्मद मोइन खान की ईमानदारी व निर्भीकता को सलाम करता है और उसकी आत्मा की शांति के लिए एक परमात्मा/ अल्लाह से प्रार्थना करता है तथा उसके परिवार पर आयी इस दुःख की घडी में उसके साथ है I देश के प्रधान मंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी से अति विनम्र अनुरोध है कि कृपया इस प्रकरण में हुए शहीद ऐसे ईमानदार व निर्भीक अधिकारी तथा उसके दुखी परिवार के प्रति सहानुभूति प्रकट करते हुए उनको आर्थिक अनुदान, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा शहीद मोहम्मद मोइन खान की ईमानदारी व निर्भीकता को गौरान्वित कराने हेतु शीघ्र कार्यवाही करें ताकि देश के ईमानदार अधिकारियों में निर्भीकता से ईमानदारी से कार्य करते रहने की प्रेरणा मिलती रहे I
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