Arvind Gaur
08/06/2026
भारतीय रंगमंच के वरिष्ठ निर्देशक, नाटककार और अभिनेता हबीब तनवीर साहब की आज 17वीं पुण्यतिथि है।
बहुआयामी व्यक्तित्व वाले हबीब साहब का भारतीय रंगमंच के विकास में योगदान अतुलनीय और अद्भुत है।
हबीब साहब ने पारंपरिक भारतीय लोकनाट्य और आधुनिक रंगमंच का अनूठा समन्वय किया। 1959 में उन्होंने नया थियेटर की स्थापना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों के साथ काम करके एक नई रंग-भाषा विकसित की।
उनके निर्देशित नाटकों में आगरा बाजार, चरणदास चोर, गाँव का नाम ससुराल, मोर नाम दामाद, कामदेव का अपना बसंत ऋतु का सपना, जिस लाहौर नई देख्या, लाला शोहरत राय, बहादुर कलारिन, हिरमा की अमर कहानी और मिट्टी की गाड़ी (मृच्छकटिकम्) प्रमुख हैं।
उनकी स्मृतियों को Asmita Theatre Group
के सभी सदस्यों की तरफ से सादर सलाम।
Habib Tanvir (1 सितंबर 1923- 8 जून 2009)
#मृत्युवर्षगांठ #हबीब_तनवीर
#हबीबतनवीर #चरणदास_चोर #आगरा_बाजार #थिएटर #अस्मिता_थिएटर
राजेश कुमार लिखित 'पगड़ी सम्भाल जट्टा' नाटक का यादगार शो चंडीगढ के टैगोर थियेटर में हुआ।
दोपहर 3:30 बजे शो के बावजूद चंडीगढ के दर्शकों का स्नेह और हिस्सेदारी अद्भुत थी। दर्शकों ने भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आज़ाद समेत सभी कलाकारों के अभिनय और संवादो पर लगातार तालियां बजाकर टीम को प्रोत्साहित किया।
अस्मिता थियेटर का यह नाटक जश्न-ए-अदब Jashn साहित्योत्सव के के तहत आयोजित किया गया। नाटक में संगीत डॉ संगीता गौड़ का है।
ऊर्जा और जोश से ओतप्रोत, अस्मिता थियेटर का यह नाटक आजादी की लड़ाई के अमर क्रांतिकारियों शहीदे आज़म भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आज़ाद के विचारों और योगदान पर आधारित है। नाटक के निर्देशक अरविन्द गौड़ है।
पगड़ी संभाल जट्टा नाटक, भगत सिंह और उनके साथियों के आज़ादी के लिए किए गए संघर्ष और बलिदान की दास्तानं है। आज़ादी की लड़ाई के दौरान वह कैसे सपने देखते थे, किस तरह की डिबेट करते थे, क्या सोचते थे, उनके सपने, उनकी विचारधारा, इस नाटक का हिस्सा है।
यह नाटक भगत सिंह और उनके साथी क्रांतिकारियों के काम, विचार और उनकी जीवंतता की कहानी है। बहुत कम उम्र में देश के लिए कुर्बान हो जाने वाले इन नौजवानों की जीवन शैली, सामाजिक और राजनीतिक दर्शन इस नाटक में बखूबी उभरता है। उनका लक्ष्य सिर्फ़ गोरे अंग्रेज़ों को भारत से निकालना नहीं था। उनके लिए आज़ादी का अर्थ था, एक ऐसा सिस्टम जहां कोई किसी का शोषण न करे, अन्याय न हो, कोई असमानता न हो।
नाटक में दर्शाये गए क्रांतिकारी विचार आज और भी ज्यादा प्रासंगिक और समकालीन हैं।
इन क्रांतिकारियों की जिंदगी, उनकी विचारधारा, उनकी सोच हमें प्रेरित करती है, हमें दिशा देती है ।
एक बेहतर समाज, बेहतर सिस्टम के लिए लड़ने के लिए हमे ताकत देती है। भगत सिंह और उनके साथियों के विचारों को जानना आज की पीढ़ी के लिए बहुत ज़्यादा ज़रूरी है। एक बेहतर भारत, बेहतर समाज के लिए ज़रूरी है कि हम उनकी सोच, उनकी दृष्टि, उनके मूल्यों और उनके सपनों को जाने और समझे।
भगत सिंह हर पीढ़ी के लिए हीरो हैं,और ऐसे क्रांतिकारियों की कहानी को नाटक में प्रस्तुत करना एक चुनौती भी है और प्रेरणादायक शक्ति भी है। अपने हीरोज़ के बारे में, उनके विचारों के बारे में जानकर हमें प्रेरणा भी मिलती है और देश के लिए उनकी प्रतिबद्धता और कुर्बानियों का एहसास भी होता है।
उन्होंने स्वाधीनता के लिए जो कुर्बानियाँ दी उसको याद रखना ज़रूरी है, ताकि एक बेहतर लोकतांत्रिक भारत, उनके सपनों के देश को हम बना पाएं। ऐसा भारत जहां जाति और धर्म के नाम पर किसी तरह का शोषण, भेदभाव और असामनता न हो।
#शहीददिवस #शहीदभगतसिंह #शहीदसुखदेव #शहीदराजगुरू
25/05/2026
आज राजेश कुमार लिखित 'पगड़ी संभाल जट्टा' नाटक का मंचन, दोपहर 3 बजे, चंडीगढ के टैगोर थियेटर में होगा।
जश्न-ए-अदब साहित्योत्सव के सांस्कृतिक कारवाँ विरासत के तहत आयोजित इस कार्यक्रम मे प्रवेश निःशुल्क है। ‘पहले आओ, पहले सीट पाओ’ के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा।
कृपया आप चंडीगढ के अपने मित्रों को यह सूचना फ़ॉरवर्ड कर सहयोग कीजिए।
Entry Free. Register at JashneAdab.org
अस्मिता थियेटर: प्रतिबद्ध रंगकर्म के बेमिसाल 33 साल।
ऊर्जा और जोश से ओतप्रोत, अस्मिता थियेटर का यह नाटक आजादी की लड़ाई के अमर क्रांतिकारियों शहीदे आज़म भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आज़ाद के विचारों और योगदान पर आधारित है। नाटक की संगीत निर्देशक डाॅ संगीता गौड़ है।
पगड़ी संभाल जट्टा नाटक, भगत सिंह और उनके साथियों के आज़ादी के लिए किए गए संघर्ष और बलिदान की दास्तानं है। आज़ादी की लड़ाई के दौरान वह कैसे सपने देखते थे, किस तरह की डिबेट करते थे, क्या सोचते थे, उनके सपने, उनकी विचारधारा, इस नाटक का हिस्सा है।
यह नाटक भगत सिंह और उनके साथी क्रांतिकारियों के काम, विचार और उनकी जीवंतता की कहानी है। बहुत कम उम्र में देश के लिए कुर्बान हो जाने वाले इन नौजवानों की जीवन शैली, सामाजिक और राजनीतिक दर्शन इस नाटक में बखूबी उभरता है। उनका लक्ष्य सिर्फ़ गोरे अंग्रेज़ों को भारत से निकालना नहीं था। उनके लिए आज़ादी का अर्थ था, एक ऐसा सिस्टम जहां कोई किसी का शोषण न करे, अन्याय न हो, कोई असमानता न हो।
नाटक में दर्शाये गए क्रांतिकारी विचार आज और भी ज्यादा प्रासंगिक और समकालीन हैं।
इन क्रांतिकारियों की जिंदगी, उनकी विचारधारा, उनकी सोच हमें प्रेरित करती है, हमें दिशा देती है ।
एक बेहतर समाज, बेहतर सिस्टम के लिए लड़ने के लिए हमे ताकत देती है। भगत सिंह और उनके साथियों के विचारों को जानना आज की पीढ़ी के लिए बहुत ज़्यादा ज़रूरी है। एक बेहतर भारत, बेहतर समाज के लिए ज़रूरी है कि हम उनकी सोच, उनकी दृष्टि, उनके मूल्यों और उनके सपनों को जाने और समझे।
भगत सिंह हर पीढ़ी के लिए हीरो हैं,और ऐसे क्रांतिकारियों की कहानी को नाटक में प्रस्तुत करना एक चुनौती भी है और प्रेरणादायक शक्ति भी है। अपने हीरोज़ के बारे में, उनके विचारों के बारे में जानकर हमें प्रेरणा भी मिलती है और देश के लिए उनकी प्रतिबद्धता और कुर्बानियों का एहसास भी होता है।
उन्होंने स्वाधीनता के लिए जो कुर्बानियाँ दी उसको याद रखना ज़रूरी है, ताकि एक बेहतर लोकतांत्रिक भारत, उनके सपनों के देश को हम बना पाएं। ऐसा भारत जहां जाति और धर्म के नाम पर किसी तरह का शोषण, भेदभाव और असामनता न हो।
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