Meher kaur

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18/06/2024

कबीर साहेब जी का कलयुग में प्रकट होकर निसंतान दंपत्ति नीरू और नीमा को मिलना

कबीर साहेब परम अक्षर ब्रह्म हैं जो प्रत्येक युग में आते हैं और वेदों में बताई विधि के अनुसार लीला करते हैं। कबीर साहेब सतयुग में सत्य सुकृत नाम से, त्रेतायुग में मुनींद्र ऋषि के नाम से, द्वापरयुग में करुणामय नाम से और कलियुग में अपने वास्तविक नाम कबीर से अवतरित होते हैं। पवित्र वेदों में कबीर परमेश्वर के प्राकट्य के प्रमाण मिलते हैं। पवित्र यजुर्वेद अध्याय 29 मंत्र 25, पवित्र सामवेद संख्या 1400, ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 से 20, और अथर्ववेद काण्ड नं. 4 अनुवाक नं. 1, मंत्र नं. 7 में भी इस बात का प्रमाण है।

नीरू और नीमा का असली नाम गौरी शंकर और सरस्वती था, जो द्वापर युग में सुपच सुदर्शन के माता-पिता थे। सुदर्शन ने कबीर साहेब के उपदेश को स्वीकार किया था और अंत में उनसे प्रार्थना की थी कि उनके माता-पिता को भी संभालें। कबीर साहेब ने आश्वासन दिया कि वे उचित समय पर उनकी मदद करेंगे। गौरी शंकर और सरस्वती का पुनर्जन्म काशी में नीरू और नीमा के रूप में हुआ। वे ब्राह्मण थे और भगवान शिव के उपासक थे। उनकी पूजा से प्राप्त धन का उपयोग वे धर्म-भण्डारा के लिए करते थे। अन्य स्वार्थी ब्राह्मणों को उनसे ईर्ष्या थी इसलिए मुसलमानों ने उन्हें बलपूर्वक मुसलमान बना दिया, जिससे उनका नाम नूर अली यानी नीरू और नियामत यानि नीमा रखा गया।

विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को ब्रह्ममुहूर्त में पूर्ण परमेश्वर कबीर (कविर्देव) जी अपने मूल स्थान सतलोक से काशी में लहर तारा तालाब के अंदर कमल के फूल पर बालक रूप में प्रकट हुए। उस दिन भी रोज़ की तरह नीरू और नीमा लहर तारा तालाब पर स्नान करने गए हुए थे। नीमा भगवान शिव से प्रार्थना कर रही थी कि उन्हें एक संतान प्राप्त हो। उसी समय, सत्यलोक से एक तेज प्रकाश पुंज के रूप में कबीर साहेब बालक के रूप में कमल के फूल पर प्रकट हुए। नीमा ने तालाब में बालक को देखकर अपने पति नीरू को बुलाया। नीरू ने पहले तो उसे कल्पना समझा, लेकिन बाद में कमल के फूल पर बालक को देखकर उसे उठा लिया और उसे नीमा को दे दिया। नीमा ने बालक को सीने से लगा लिया।

नीरू ने नीमा को समझाने का प्रयास किया कि वे इस बालक को छोड़ दें, क्योंकि समाज में उनका कोई सहयोगी नहीं है और लोग उन्हें सवालों के घेरे में लेंगे। लेकिन नीमा ने बालक को छोड़ने से इनकार कर दिया। उसने कहा कि वह इस बालक को छोड़ने की बजाय मृत्यु को स्वीकार करेगी। नीरू ने पहली बार अपनी पत्नी को धमकाया, लेकिन बालक ने नीरू से कहा कि उसे घर ले चलें, उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। नीरू यह सुनकर घबरा गया और बालक को लेकर चुपचाप घर की ओर चल पड़ा।

कबीर साहेब को जब नीरू और नीमा घर लेकर आए तो उनकी अद्भुत छवि को देखने पूरी काशी उमड़ पड़ी। स्वर्ग लोक से देवता आदि भी उन्हें देखने आए तथा उनकी छवि पर मुग्ध होकर बच्चे के किसी देव का अवतार होने का दावा कर रहे थे। परमात्मा कबीर इस तरह कलियुग में प्रकट हुए, साधारण मनुष्य की लीला करते हुए अपनी प्यारी आत्माओं को मिले और तत्वज्ञान का बोध करवाया। आज से लगभग 600वर्ष पूर्व कबीर साहेब के चौसठ लाख शिष्य हो गए थे। कबीर साहेब परम अक्षर ब्रह्म हैं जिनका वास्तविक परिचय शास्त्रों में दिया हुआ है। संत रामपाल जी महाराज ने आज सर्व ग्रंथों से यह प्रमाणित किया है और कबीर साहेब के परमेश्वर होने के सभी साक्ष्य प्रदान किए हैं।


इस वर्ष 20 जून से 22 जून 2024 तक, जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में 627वें कबीर प्रकट दिवस के अवसर पर एक विशेष समागम का आयोजन किया जा रहा है। इस समागम पर आयोजित किए जाने वाले विशेष कार्यक्रम कुछ इस प्रकार है:

* निःशुल्क भंडारा: सभी आगंतुकों के लिए 20 से 22 जून 2024 तक निःशुल्क भंडारे का आयोजन होगा।
* निःशुल्क नाम दीक्षा: इस अद्वितीय अवसर पर संत रामपाल जी महाराज से निःशुल्क नाम दीक्षा प्राप्त की जा सकती हैं।
* 3 दिवसीय अखंड पाठ: 20 से 22 फरवरी 2024 तक, 3 दिनों तक अखंड पाठ का आयोजन होगा।
* रक्तदान शिविर, निशुल्क नेत्र व दांतो की जांच, दहेज मुक्त विवाह और आध्यात्मिक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है।
* विशेष सत्संग प्रसारण: 22 जून 2024 को संत रामपाल जी महाराज के सत्संग का विशेष प्रसारण साधना टीवी चैनल पर सुबह 9:15 बजे (IST) से होगा।
* सोशल मीडिया प्रसारण: इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण निम्नलिखित सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों पर भी उपलब्ध होगा:

page:- Spiritual Leader Saint Rampal Ji
YouTube:- Sant Rampal Ji Maharaj
Twitter:-

आप सभी इस महान अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करें और इस आध्यात्मिक आयोजन का लाभ उठाएं। वहीं इस कार्यक्रम में आने के लिए आप निम्न सतलोक आश्रम में आ सकते हैं:

1. सतलोक आश्रम धनाना धाम, सोनीपत, हरियाणा
2. सतलोक आश्रम मुंडका, दिल्ली
3. सतलोक आश्रम धूरी, पंजाब
4. सतलोक आश्रम खमाणो, पंजाब
5. सतलोक आश्रम सोजत, राजस्थान
6. सतलोक आश्रम शामली, उत्तर प्रदेश
7. सतलोक आश्रम कुरुक्षेत्र, हरियाणा
8. सतलोक आश्रम भिवानी, हरियाणा
9. सतलोक आश्रम बैतूल, मध्य प्रदेश
10. सतलोक आश्रम इंदौर, मध्य प्रदेश
11. सतलोक आश्रम धनुषा, नेपाल

संत रामपाल जी महाराज जी से निःशुल्क नाम दीक्षा लेने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें ⬇️
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